समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की गिरफ्तारी और जमानत का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान उनके वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भावुक दलील देते हुए कहा कि आजम खान हर मामले का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। सिब्बल ने कहा, ''मैं 80 साल का हो गया हूं। मेरे खिलाफ 28 मामले हैं। ऐसे में तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा।'' उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे चुनाव के दौरान आजम खान को जेल में रखने की कोशिश बताया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आजम खान की याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। साथ ही हाईकोर्ट से 16 नवंबर को मामले पर सुनवाई कर अंतरिम आदेश पर विचार करने का आग्रह किया।

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'हर मुकदमे का सामना करूंगा, लेकिन जमानत चाहिए'

आजम खान की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने अदालत में उनकी उम्र और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आजम खान लंबे समय से अलग-अलग मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं और एक मामले में राहत मिलने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तारी हो जाती है।

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सिब्बल ने दलील दी कि आजम खान हर मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस उम्र में लगातार जेल में रहना उनके लिए गंभीर स्थिति है।

2006 की घटना और 2019 की FIR पर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने ED के मामले की बुनियाद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि जिस घटना को आधार बनाया जा रहा है, वह वर्ष 2006 की है, जबकि इस संबंध में FIR वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी।

उन्होंने सवाल किया कि इतने पुराने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा कानून कैसे लागू किया गया। सिब्बल ने आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि शिकायतों में पांच हजार रुपये नकद, सोने की बालियां और चार बकरियां चोरी किए जाने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बकरियां और गायें भी अपराध से अर्जित संपत्ति मानी जाएंगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनकी दलील में कुछ दम हो सकता है, लेकिन अदालत इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देना चाहती।

जेल से बाहर आते ही ED ने कर लिया था गिरफ्तार

आजम खान को 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। हाईकोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सुनाई गई सात साल की सजा पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से बाहर निकलते ही ED ने आजम खान को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह मामला मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से संबंधित है।

ED की कार्रवाई के बाद आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया। एक नवंबर को अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

चुनाव के दौरान जेल में रखने की साजिश का आरोप

कपिल सिब्बल ने अदालत में आरोप लगाया कि आजम खान की गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक मंशा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान आजम खान को जेल में रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि जब आजम खान को एक मामले में राहत मिली और वह जेल से बाहर आए तो उन्हें तत्काल दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि ये आरोप बचाव पक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

अब 16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी। पीठ ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया और संबंधित रिकॉर्ड दो दिन के भीतर स्थानांतरित करने को कहा।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया कि याचिका मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखी जाए, ताकि इसे 16 नवंबर को डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से उसी दिन आजम खान की अंतरिम राहत की मांग पर आदेश पारित करने पर विचार करने का भी आग्रह किया है। फिलहाल आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली है और उनकी रिहाई का फैसला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा।

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