लखनऊ (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश में मौसम का अत्यंत खौफनाक और रौद्र रूप देखने को मिला है। बुधवार को अचानक आसमान में छाए काले बादलों और धूलभरी आंधी ने पूरे प्रदेश में कोहराम मचा दिया। तेज आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और कई जगह हुई ओलावृष्टि ने व्यापक तबाही मचाई है। प्रकृति के इस कहर के आगे इंसान पूरी तरह से बेबस नजर आया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कहीं विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ गए, तो कहीं कमजोर मकानों की छतें और दीवारें भरभरा कर गिर पड़ीं। आकाशीय बिजली गिरने और इन दर्दनाक हादसों में अब तक कुल 15 लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्षक' बने 'भक्षक': नशे में धुत पुलिसकर्मियों ने ढाबे पर मचाया खौफनाक उत्पात, वीडियो बनाने पर तोड़ा मोबाइल, SSP ने किया सस्पेंड
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कुदरत का खौफनाक मंजर: चंद मिनटों में बिछ गई लाशें

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बुधवार की सुबह जब लोगों की दिनचर्या शुरू ही हो रही थी, तभी मौसम ने अचानक करवट ली। तेज धूलभरी आंधी ने दिन में ही रात जैसा अंधेरा कर दिया। सड़कों पर चल रहे लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तूफानी हवाओं ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया।
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बरेली और रामपुर जैसे जिलों में इन तेज हवाओं का असर इतना भयंकर था कि सड़कों के किनारे लगे बड़े-बड़े लोहे के यूनिपोल, विज्ञापन के होर्डिंग और साइनबोर्ड तिनके की तरह उड़ गए या बीच से टूटकर सड़क पर आ गिरे। इससे यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया और कई वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा। शाहजहांपुर में भयंकर धूलभरी आंधी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, जबकि संभल, मेरठ और बरेली में मूसलाधार बारिश ने जलभराव की स्थिति पैदा कर दी।
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जिलों का दर्दनाक हाल: कहाँ कितनी मौतें हुईं?
\r\nप्रदेशभर में आंधी-तूफान और बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। इन मौतों ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं:
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    बदायूं में सबसे ज्यादा कहर: बदायूं जिले में कुदरत का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिला है। यहाँ अलग-अलग स्थानों पर पेड़ गिरने, दीवार ढहने और बिजली गिरने की घटनाओं में 5 लोगों की दर्दनाक मौत दर्ज की गई है।
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    फतेहपुर में भी 5 मौतें: बदायूं की तरह ही फतेहपुर जिले में भी आंधी-तूफान काल बनकर आया। जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में हुई हृदयविदारक घटनाओं में 5 लोगों ने अपनी जान गंवा दी।
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    भदोही का दर्दनाक हादसा: भदोही जिले से सबसे अधिक झकझोर देने वाली खबर सामने आई। यहाँ एक कच्चे मकान पर एक पुराना और विशाल नीम का पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर गिर पड़ा। इस भयानक हादसे में मकान के मलबे और पेड़ के नीचे दबकर एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। बचाव दल को शवों को निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
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    उन्नाव में 3 जानें गईं: उन्नाव जिले में भी तेज आंधी और बारिश ने तबाही मचाई। यहां आकाशीय बिजली की चपेट में आने और अन्य हादसों के कारण तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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इन हादसों में घायल हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन द्वारा तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
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38 जिलों में आंधी-तूफान और बारिश का 'येलो अलर्ट'

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हालात अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेशवासियों को सावधान रहने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर समेत प्रदेश के 38 जिलों में अगले तीन से चार घंटों के लिए भारी बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने का 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है।
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जिन जिलों में सबसे ज्यादा अलर्ट घोषित किया गया है, उनमें पश्चिमी और मध्य यूपी के कई प्रमुख जिले शामिल हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी अति आवश्यक कार्य के घरों से बाहर न निकलें। विशेषकर किसानों को खेतों में काम करने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि खेतों में आकाशीय बिजली गिरने का खतरा सबसे अधिक होता है।
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आखिर क्यों बिगड़ा मौसम? क्या है वैज्ञानिक कारण?

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मई के महीने में, जब आमतौर पर झुलसा देने वाली गर्मी और लू चलती है, इस तरह के तूफानी मौसम ने सभी को हैरान कर दिया है। इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण को समझाते हुए लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में यह अचानक बदलाव एक मजबूत 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण हुआ है।
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पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उठने वाले तूफानों का एक स्वरूप है, जो हिमालयी क्षेत्रों से टकराकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में नमी लाता है। इसी सिस्टम के सक्रिय होने से हवा के दबाव में तेजी से बदलाव आया है, जिसके परिणामस्वरूप इतनी तेज गति की हवाओं (50-60 किमी/घंटा) के साथ गरज-चमक और बारिश की स्थिति उत्पन्न हुई है। अतुल कुमार सिंह के अनुसार, आज और कल (गुरुवार) भी मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा, जिससे तापमान में कुछ समय के लिए हल्की गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को चिलचिलाती धूप से फौरी राहत मिलेगी।
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सावधान! 15 मई से फिर लौटेगा गर्मी और लू का भयानक सितम

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भले ही बारिश और ठंडी हवाओं ने अभी पारे को नीचे ला दिया है, लेकिन यह राहत बहुत ही अल्पकालिक है। मौसम विभाग ने एक और गंभीर चेतावनी जारी की है। पूर्वानुमान के अनुसार, 15 मई से उत्तर प्रदेश में मौसम फिर से एक यू-टर्न लेगा और भीषण गर्मी अपनी पूरी ताकत के साथ वापस लौटेगी।
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जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होगा, आसमान साफ हो जाएगा और तेज चिलचिलाती धूप सीधे धरती पर पड़ेगी। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि 15 मई के बाद से दिन के तापमान में अचानक 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इसके कारण प्रयागराज, झांसी, आगरा, और कानपुर जैसे जिलों में पारा एक बार फिर 45 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर सकता है। इसके साथ ही 'हीटवेव' यानी गर्म लू के थपेड़े लोगों को परेशान करेंगे।
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प्रशासन और आम जनता के लिए सुझाव

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लगातार बदलते मौसम और आपदाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने कुछ खास निर्देश जारी किए हैं:
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    पेड़ों और खंभों से दूर रहें: तेज हवाएं चलने के दौरान कभी भी पुराने पेड़ों, होर्डिंग्स या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों।
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    कच्चे मकानों में सावधानी: जिन लोगों के मकान कच्चे या जर्जर हैं, वे तूफान के समय सुरक्षित और पक्के स्थानों पर शरण लें।
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    आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट के समय खुले मैदान, खेत या छतों पर जाने से बचें। बिजली के उपकरणों का प्लग निकाल दें।
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उत्तर प्रदेश की सरकार भी हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत व बचाव कार्य में तेजी लाने और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
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