लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप धारण किया कि देखते ही देखते कई जिले मातम में डूब गए। बुधवार शाम को राज्य के विभिन्न हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। तेज आंधी के कारण जहां सैकड़ों विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ गए, वहीं कई घरों की दीवारें और टीन शेड तिनके की तरह उड़ गए।READ ALSO:-बिजनौर पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर एक्शन में एसपी अभिषेक झा, कई उप-निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र बदले
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इस भयानक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) में मिर्जापुर, फतेहपुर, उन्नाव, बदायूं, बरेली, चंदौली, कौशांबी और कानपुर सहित कई जिलों में अब तक कुल 40 से अधिक लोगों के मारे जाने की दुखद खबर है। यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और कई गांवों में बिजली के खंभे गिरने से अंधेरा छा गया है। तबाही के इस मंजर के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखते हुए 24 घंटे के भीतर राहत कार्य पूरा करने और पीड़ितों को मुआवजा सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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मिर्जापुर बना 'मौत का केंद्र': 17 लोगों ने गंवाई जान
\r\n\r\nइस भयंकर तूफान का सबसे खौफनाक असर विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले में देखने को मिला है। यहां आंधी-पानी और आकाशीय बिजली गिरने से सबसे अधिक 17 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है।
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- \r\n पीपा पुल टूटा: गौरा परमानपुर मार्ग पर बना पीपा पुल तेज बहाव और तूफान में टूट गया, जिससे करीब 20 गांवों का संपर्क टूट गया है और आवागमन पूरी तरह ठप है।\r\n \r\n
- \r\n थानावार मौतें: पड़री थाना क्षेत्र में 5, अदलहाट में 3, कछवां में 2, और चील्ह, लालगंज, संतनगर तथा कोतवाली देहात में 1-1 व्यक्ति की मौत हुई है।\r\n \r\n
- \r\n दर्दनाक हादसे: नदीगहना सारी पोखरी गांव में आम का पेड़ गिरने से 9 साल के मासूम अंशु मौर्य की जान चली गई। वहीं लालगंज में एक उड़ते हुए टीन शेड ने नीलम नाम की महिला की गर्दन काट दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हरदरा के पास एक स्कॉर्पियो कार पर भारी पेड़ गिर गया, जिसमें राणा उर्फ बबलू की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।\r\n \r\n
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फतेहपुर, उन्नाव और बदायूं में भी बिछी लाशें
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- \r\n फतेहपुर (Fatehpur): यहां आंधी-तूफान से 7 लोगों की मौत हुई है। एडीएम अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि गाजीपुर थाना क्षेत्र के डोढ़ावर गांव में टीन शेड गिरने से 12 वर्षीय ऋतिक की जान चली गई। इसके अलावा दो महिलाओं सहित कई लोग दीवार और पेड़ के नीचे दबकर मर गए।\r\n \r\n
- \r\n उन्नाव (Unnao): जिले में कच्चे मकान ढहने और पेड़ों के गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में विनोद, सियाराम, अंश, रामबाबू, दिनेश और छंगा शामिल हैं। प्रशासन नुकसान का सर्वे कर रहा है।\r\n \r\n
- \r\n बदायूं (Badaun): यहां 5 लोगों की जान गई है। दो रानेट चौराहे पर चलते डंपर पर पेड़ गिरने से चालक योगेश की मौत हो गई। वहीं सिद्धपुर कैथौली गांव में दीवार गिरने से दो चचेरी बहनों की दर्दनाक मौत हो गई।\r\n \r\n
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चंदौली और कौशांबी: कहीं मलबे में दबे, कहीं आग का तांडव
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- \r\n चंदौली (Chandauli): चकिया तहसील क्षेत्र में अलग-अलग हादसों में 3 लोगों की मौत हो गई। शिकारगंज में दीवार गिरने से 53 वर्षीय गुलाब की मौत हुई। वहीं हेतिमपुर गांव में एक मुर्गी फार्म जमींदोज हो गया, जिसमें 1000 से अधिक चूजे दबकर मर गए।\r\n \r\n
- \r\n कौशांबी (Kaushambi): सिराथू तहसील के केसारी गांव में एक विशाल पेड़ की डाल गिरने से वृद्ध महिला शकुंतला की मौत हो गई। वहीं तरसौरा गांव में आंधी के दौरान खेत से उड़ी चिंगारी ने भयानक रूप ले लिया और कई रिहायशी मकानों को जलाकर खाक कर दिया। इस अग्निकांड में भारी नुकसान हुआ है।\r\n \r\n
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बरेली: टीन शेड के साथ हवा में उड़ा युवक, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
\r\n\r\nबरेली (Bareilly) में तूफान से 4 लोगों की मौत हुई है (देवकी, लीपी, घासीराम और गोमती)। लेकिन बरेली इस आपदा में प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां प्रशासन ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर सबसे तेजी से कार्रवाई करते हुए मृतकों के परिजनों के बैंक खातों में 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि भेज दी है। पशु हानि के लिए भी 15.33 लाख रुपये बांटे गए हैं। बरेली के भमोरा क्षेत्र में एक बेहद हैरान करने वाली घटना घटी, जहां तेज हवा के बवंडर में एक युवक टीन शेड के साथ ही हवा में उछल गया। नीचे गिरने से उसके हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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मुजफ्फरनगर: बागवानों और किसानों की टूट गई कमर
\r\n\r\nपश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी और ओलावृष्टि ने कृषि क्षेत्र को तबाह कर दिया है। आम, लीची, लोकाट, नाशपाती और आलूबुखारा के बागों में भारी नुकसान हुआ है। पेड़ों से फल टूटकर गिर गए हैं, जिससे बागवानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।
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सीएम योगी का कड़ा एक्शन: 24 घंटे में मुआवजा देने का फरमान
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दैवीय आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य मशीनरी को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को ग्राउंड जीरो पर जाकर प्रभावित परिवारों से मिलने का आदेश दिया है।
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राहत और मुआवजे का ब्यौरा (Government Relief Package):
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- \r\n जनहानि (Loss of Life): आपदा में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को 4 लाख रुपये की तत्काल सहायता।\r\n \r\n
- \r\n फसल नुकसान (Crop Damage): 33% से अधिक फसल नष्ट होने पर:\r\n\r\n
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- \r\n वर्षा सिंचित क्षेत्र: ₹8,500 प्रति हेक्टेयर\r\n \r\n
- \r\n सुनिश्चित सिंचित क्षेत्र: ₹17,000 प्रति हेक्टेयर\r\n \r\n
- \r\n 12 माही फसल व कृषि वानिकी: ₹22,500 प्रति हेक्टेयर (अधिकतम 2 हेक्टेयर तक)।\r\n \r\n
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- \r\n खेतों से मलबा हटाने के लिए: अतिवृष्टि से खेतों में आई गाद/मलबा हटाने के लिए ₹18,000 प्रति हेक्टेयर की मदद।\r\n \r\n
- \r\n पशुहानि (Livestock Loss):\r\n\r\n
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- \r\n दुधारू पशु (गाय-भैंस): ₹37,500\r\n \r\n
- \r\n गैर दुधारू पशु (बैल-घोड़े): ₹32,000\r\n \r\n
- \r\n गधा, खच्चर, बछड़ा: ₹20,000\r\n \r\n
- \r\n छोटे पशु (भेड़, बकरी, सुअर): ₹4,000 प्रति पशु।\r\n \r\n
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लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई: राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और एडीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्पष्ट निर्देश दिया है कि सर्वे का काम पूरी पारदर्शिता के साथ तत्काल पूरा किया जाए। सीएम योगी ने चेतावनी दी है कि राहत कार्य और मुआवजा बांटने में किसी भी स्तर की प्रशासनिक लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश में आई यह अंधी और तूफान प्रकृति के रौद्र रूप का एक डरावना उदाहरण है। पलक झपकते ही दर्जनों हंसते-खेलते परिवार उजड़ गए। हालांकि, इस विपदा की घड़ी में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन जिस तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, उससे पीड़ितों को एक बड़ा संबल मिला है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि खराब मौसम और तेज आंधी के दौरान घरों के अंदर ही रहें, बड़े पेड़ों, जर्जर इमारतों और बिजली के खंभों के पास बिल्कुल न खड़े हों। सावधानी ही इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से बचने का सबसे कारगर उपाय है।
Sabse pehle comment karne wale banein.