बढ़ते ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) से आम जनजीवन, विशेषकर मरीजों और स्कूली बच्चों को होने वाली परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। शहर में ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह (DM Dr. V.K. Singh) ने सभी संबंधित विभागों को सख्ती से नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब शहर के सभी स्कूलों, अस्पतालों और अन्य चिह्नित संवेदनशील स्थानों के 100 मीटर के दायरे को 'नो-हॉर्न जोन' (No-Horn Zone) घोषित किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
कलेक्ट्रेट सभागार में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बुलाई गई एक उच्च स्तरीय बैठक में जिलाधिकारी ने पुलिस और परिवहन विभाग (Transport Department) को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सघन संयुक्त अभियान चलाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶100 मीटर के दायरे में लगेंगे 'नो-हॉर्न जोन' के बोर्ड
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सालयों के आसपास शांति का माहौल होना अत्यंत आवश्यक है। बेवजह हॉर्न बजाने से न केवल मरीजों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, बल्कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई में भी भारी व्यवधान उत्पन्न होता है।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने तय किया है कि स्कूलों, अस्पतालों (Hospitals) और अन्य चिह्नित संवेदनशील जगहों (Sensitive Areas) के आसपास 100 मीटर के दायरे में अनिवार्य रूप से 'नो-हॉर्न जोन' के चेतावनी बोर्ड (Signboards) लगाए जाएंगे। इससे वाहन चालकों को नियमों की स्पष्ट जानकारी रहेगी। बोर्ड लगने के बाद भी यदि कोई वाहन चालक अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाता पाया गया, तो उसका तत्काल चालान किया जाएगा।
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प्रेशर हॉर्न और 'पटाखा' साइलेंसर पर चलेगा पुलिस का डंडा
शहर की सड़कों पर बुलेट जैसी मोटरसाइकिलों में पटाखे जैसी आवाज निकालने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर (Loud Silencers) और भारी वाहनों में तेज प्रेशर हॉर्न का चलन तेजी से बढ़ा है, जो ध्वनि प्रदूषण का एक मुख्य कारण है।
जिलाधिकारी ने इस पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वाहनों में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न (Pressure Horn) लगाने और पटाखे की आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ अब जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) की टीमें मिलकर एक विशेष संयुक्त चेकिंग अभियान (Joint Campaign) चलाएंगी। पकड़े जाने पर न केवल चालान काटा जाएगा, बल्कि वाहनों को सीज करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
तय मानकों से अधिक तेज आवाज में डीजे बजाने पर कटेगा चालान
शादी-विवाह और अन्य समारोहों में कानफोड़ू आवाज में बजने वाले डीजे (DJ) को लेकर भी प्रशासन ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। बैठक में यह फैसला लिया गया कि शहर में डीजे और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों (Loudspeakers) का इस्तेमाल केवल सुप्रीम कोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय किए गए ध्वनि मानकों (Decibel Limits) के अनुसार ही किया जा सकेगा।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›यदि कोई भी संचालक या आयोजक निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाता हुआ पाया गया, तो मौके पर ही चालान किया जाएगा और डीजे के उपकरण भी जब्त किए जा सकते हैं। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल (Coordination) स्थापित कर इन नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति), अपर नगर आयुक्त, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) समेत पुलिस और प्रशासनिक विभागों के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
Sabse pehle comment karne wale banein.