उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में बिजली चोरों पर लगाम कसने के लिए ऊर्जा विभाग ने अब तकनीक का सबसे आधुनिक हथियार अपना लिया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (Paschimanchal Vidyut Vitran Nigam Limited - PVVNL) की आईटी टीम ने शहर में बिजली चोरी (Electricity Theft) पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सफलतापूर्वक उपयोग करना शुरू कर दिया है।
एआई तकनीक के माध्यम से बिजली की खपत के विशाल डेटा का विश्लेषण (Data Analysis) कर यह पता लगाया जा रहा है कि शहर के किन इलाकों और फीडरों पर सबसे अधिक बिजली चोरी हो रही है। इसी तकनीक की सटीक जानकारी के आधार पर ऊर्जा विभाग की विजिलेंस टीमें छापेमारी कर रही हैं।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶अब्दुल्लापुर में एआई से पकड़ी गई 20 किलोवाट की चोरी
पीवीवीएनएल की आईटी टीम (IT Team) द्वारा एआई विश्लेषण के बाद की गई संस्तुति के आधार पर, मेरठ शहर में पांच अतिसंवेदनशील फीडरों पर बिजली चोरी के खिलाफ एक सघन अभियान (Campaign) चलाया जा रहा है।
हाल ही में, इस एआई डेटा के आधार पर अब्दुल्लापुर (Abdullapur) इलाके में ऊर्जा विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। इस छापेमारी में एक ही दिन में पांच घरों में बिजली के मीटर को बायपास कर और सीधे तार (कटिया) डालकर की जा रही कुल 20 किलोवाट (20 KW) की भारी बिजली चोरी पकड़ी गई। इन सभी उपभोक्ताओं के खिलाफ संबंधित थाने में बिजली चोरी अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›एआई ने इन 5 फीडरों को किया सबसे अधिक 'चोरी वाला' चिह्नित
आईटी टीम ने बताया कि एआई ने पिछले कई महीनों के बिजली सप्लाई और बिलिंग डेटा (Billing Data) का गहराई से विश्लेषण किया। इस विश्लेषण के बाद, शहर के पांच ऐसे फीडरों (Feeders) की पहचान की गई है जहां लाइन लॉस (Line Loss) सबसे ज्यादा है और बिजली चोरी की प्रबल संभावना है।
एआई द्वारा चिह्नित किए गए इन पांच फीडरों में शामिल हैं:
भूसामंडी (Bhusamandi)
नूरनगर (Noornagar)
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विकास पुरी (Vikas Puri)
विकास पुरी (द्वितीय फीडर)
अब विभाग की पूरी प्रवर्तन टीम (Enforcement Team) इन्हीं पांच फीडरों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चला रही है।
कैसे काम कर रहा है एआई? मुख्य अभियंता ने बताया तरीका
पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) रजनीकांत मिश्र ने इस नई और हाई-टेक प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेरठ शहर में लगभग चार लाख (4 Lakh) बिजली उपभोक्ता हैं। इतने बड़े डेटाबेस को मैन्युअल रूप से चेक करना इंसानों के लिए लगभग असंभव था, लेकिन एआई से यह डेटा विश्लेषण (Data Analysis) बेहद सरल और सटीक हो गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि, "अगर कोई उपभोक्ता दिन में तो भारी मात्रा में बिजली का उपयोग कर रहा है, लेकिन रात में उसके मीटर की रीडिंग या बिजली की खपत शून्य (Zero) है, तो एआई सिस्टम तुरंत ऐसे उपभोक्ताओं की सूची (List) निकालकर सामने रख देता है।"
मुख्य अभियंता ने आगे बताया, "दिन में बिजली का उपयोग करने और रात में बिल्कुल नहीं करने वाला उपभोक्ता निश्चित रूप से कोई दुकानदार, वर्कशॉप या ऑफिस ही होगा। ऐसे में हमारी टीम तुरंत यह जांच करती है कि कहीं वह व्यक्ति 'घरेलू कनेक्शन' (Domestic Connection) पर ही व्यावसायिक (Commercial) बिजली का उपयोग तो नहीं कर रहा है। इसी पैटर्न और डेटा विसंगतियों (Anomalies) के आधार पर अब बिजली चोरी करने वालों को घर बैठे चिह्नित किया जा रहा है।"
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम का यह हाई-टेक कदम न केवल बिजली चोरी पर अंकुश लगाएगा, बल्कि इससे विभाग के राजस्व (Revenue) में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है। विभाग का कहना है कि भविष्य में इस एआई तकनीक को ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.