Digi Yatra for International Flights: कल्पना कीजिए कि आप विदेश जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे हैं और आपको एंट्री गेट पर लाइन में लगकर अपना पासपोर्ट (Passport) निकालने की जरूरत ही न पड़े! आपने बस कैमरे के सामने अपना चेहरा दिखाया और आपका डिजिटल गेट अपने आप खुल गया। सुनने में यह किसी हॉलीवुड साई-फाई फिल्म की 'फ्यूचर फैसिलिटी' (Future Facility) लग सकती है, लेकिन अब भारत में यह हकीकत बनने जा रही है।
अब तक केवल घरेलू उड़ानों (Domestic Flights) तक सीमित रही डिजी यात्रा (Digi Yatra) ने अब अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स (International Flights) के लिए भी दस्तक दे दी है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶7 एयरपोर्ट्स पर शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project)
नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत, 1 नवंबर 2026 से देश के 7 प्रमुख हवाई अड्डों—दिल्ली (Delhi), मुंबई (Mumbai), बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, चेन्नई और अमृतसर (Amritsar)—पर इसका पैसेंजर ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
- किसके लिए है सुविधा? फिलहाल यह पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक चलेगा और केवल ई-पासपोर्ट (E-Passport) रखने वाले चुनिंदा भारतीय नागरिकों (Indian Travelers) के लिए उपलब्ध होगा।
- कौन सी एयरलाइंस हैं शामिल? इस ट्रायल फेज में एयर इंडिया (Air India) की सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और इंडिगो (IndiGo) की चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा।
ई-पासपोर्ट और फेस स्कैन से कैसे बनेगी डिजिटल पहचान? (How it Works)
घरेलू उड़ानों में डिजी यात्रा के लिए [Aadhaar Redacted] आधारित रजिस्ट्रेशन होता है, लेकिन इंटरनेशनल ट्रायल में प्रक्रिया थोड़ी अलग और अधिक सुरक्षित रखी गई है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›- स्कैनिंग: यात्री को डिजी यात्रा ऐप (Digi Yatra App) पर अपने ई-पासपोर्ट का पहला पेज स्कैन करना होगा।
- चिप रीडिंग: इसके बाद स्मार्टफोन के NFC (Near Field Communication) फीचर के जरिए पासपोर्ट की इलेक्ट्रॉनिक चिप को पढ़ा जाएगा।
- फेस वेरिफिकेशन: सेल्फी के जरिए यात्री के चेहरे का वेरिफिकेशन होगा और उसका 'डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल' (Digital Travel Credential) तैयार हो जाएगा। इसके बाद यात्री को एयरलाइन से मिला बोर्डिंग पास (Boarding Pass) ऐप पर अपलोड करना होगा। इसके इस्तेमाल से एयरपोर्ट एंट्री और सिक्योरिटी चेक पर बार-बार दस्तावेज निकालने की झंझट खत्म हो जाएगी।
क्या इमिग्रेशन की प्रक्रिया भी बदल जाएगी? (Immigration Process)
यह समझना बहुत जरूरी है कि डिजी यात्रा किसी भी तरह से आपके भौतिक पासपोर्ट या वीजा (Visa) का कानूनी विकल्प नहीं है।
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- इस ट्रायल में इमिग्रेशन (Immigration) की प्रक्रिया शामिल नहीं है।
- यात्रियों को इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने अपना असल पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज पहले की तरह ही दिखाने होंगे।
- बदलाव केवल एयरपोर्ट के चुनिंदा चेकपॉइंट (एंट्री और सिक्योरिटी) पर समय बचाने के लिए किया गया है, न कि विदेश जाने की कानूनी औपचारिकताओं में।
डेटा प्राइवेसी: आपका चेहरा और बायोमेट्रिक डेटा कितना सुरक्षित है?
चेहरे की पहचान (Facial Recognition) तकनीक के साथ डेटा सिक्योरिटी सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरता है। एविएशन टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और स्ट्रेटजी हेड सुंदर नटराजन के मुताबिक:
"इंटरनेशनल डिजी यात्रा भी 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' सिद्धांत पर काम करती है। यात्री का बायोमेट्रिक डेटा उसके अपने स्मार्टफोन में ही सुरक्षित रहता है। यह डेटा डिजी यात्रा के किसी सेंट्रल सर्वर पर स्टोर नहीं किया जाता है।"
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यात्रा के दौरान यह डेटा एन्क्रिप्टेड (Encrypted) फॉर्म में यात्री की सहमति से एयरपोर्ट के सिस्टम के साथ साझा किया जाता है और यात्रा पूरी होने के ठीक 24 घंटे के भीतर इसे एयरपोर्ट के सर्वर से हमेशा के लिए डिलीट (Delete) कर दिया जाता है।
भविष्य की उड़ान
डिजी यात्रा का सिस्टम पहले ही देश के 39 से ज्यादा एयरपोर्ट्स पर सफलतापूर्वक काम कर रहा है और इसके जरिए अब तक 11 करोड़ से अधिक घरेलू यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। अगर दिसंबर 2026 तक चलने वाला यह इंटरनेशनल ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर चेहरे की पहचान से सफर की शुरुआत हो सकती है, जिससे लंबी कतारों और कागजी कार्रवाई से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डिजी यात्रा फाउंडेशन द्वारा इंटरनेशनल ट्रायल के संबंध में जारी की गई प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है।
Sabse pehle comment karne wale banein.