Climate Change Effect: क्या दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का असर भारत में आने वाले खतरनाक तूफानों (Cyclones) पर पड़ रहा है? क्या भारत में साइक्लोन्स की संख्या वाकई घट रही है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department - IMD) के डायरेक्टर जनरल (डीजी) डॉ. मृत्युंजय महापात्र (Dr. Mrutyunjay Mohapatra) ने इन गंभीर सवालों के बेहद चौंकाने वाले जवाब दिए हैं। हाल ही में जारी की गई 'नवंबर 2026 के लिए बारिश और तापमान का मासिक पूर्वानुमान' रिपोर्ट के दौरान उन्होंने इस महत्वपूर्ण मौसमी घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶उन्होंने बताया कि इस साल (2026) देश में केवल दो ही बड़े चक्रवात आए हैं—पहला चक्रवात 'अर्नब' (Cyclone Arnab) था और दूसरा हाल ही में आया साइक्लोन 'मुरासु' (Cyclone Murasu)।
एक साल में आमतौर पर कितने चक्रवात आते हैं?
क्लाइमेट चेंज का साइक्लोन की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) और तीव्रता पर पड़ रहे असर को स्पष्ट करते हुए डॉ. महापात्र ने कहा:
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›- आमतौर पर भारत में एक साल में 4 से 5 चक्रवात (Cyclones) आते हैं।
- इनमें से 3 से 4 चक्रवात पोस्ट-मानसून सीजन यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच बनते हैं।
- वहीं, 1-2 चक्रवात प्री-मानसून सीजन यानी अप्रैल से जून के बीच आते हैं। लेकिन, मौसम के इस बदलते मिजाज के कारण इस साल न तो प्री-मानसून सीजन में और न ही मुख्य मानसून सीजन के दौरान कोई बड़ा चक्रवात आया।
चक्रवातों की कमी के पीछे 'अल नीनो' (El Nino) का हाथ
मौसम भवन के डीजी के मुताबिक, इस साल तूफानों की संख्या घटने का सबसे बड़ा कारण 'अल नीनो' (El Nino) का बेहद मजबूत प्रभाव है।
अल नीनो के प्रभाव वाले वर्षों में बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) और अरब सागर (Arabian Sea) में चक्रवातों की संख्या आमतौर पर सामान्य से काफी कम रहती है।
- अल नीनो का असर: इस दौरान आने वाले चक्रवातों की तीव्रता कम होती है, उनका रास्ता (Track) छोटा होता है और उनका जीवनकाल भी कम रहता है। इनका सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु (Tamil Nadu), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और कभी-कभी श्रीलंका के तटों पर पड़ता है।
- ला नीना का असर: इसके ठीक विपरीत, जब 'ला नीना' (La Nina) का प्रभाव होता है, तो चक्रवात ओडिशा (Odisha), पश्चिम बंगाल (West Bengal), म्यांमार और बांग्लादेश की ओर बढ़ते हैं। इनका ट्रैक लंबा और तीव्रता बहुत अधिक होती है, जिससे भारी तबाही मचती है।
संख्या घटी, लेकिन 'खतरा' और तबाही की क्षमता बढ़ी!
भारत के तटीय इलाकों में साइक्लोन्स की कुल संख्या भले ही कम हो रही हो, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण एक और नया और गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
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डॉ. महापात्र ने चेतावनी देते हुए कहा, "भारत के तटीय इलाकों में साइक्लोन्स की संख्या कम हो रही है, लेकिन बहुत तीव्र (Intense) चक्रवातों की संख्या या तो स्थिर है या लगातार बढ़ रही है। अरब सागर की तरफ इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। मैं यहां 'अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफानों' (Extremely Severe Cyclonic Storms) की बात कर रहा हूं।"
धीमी गति से हो रहा है ज्यादा विनाश
मौसम विभाग की रिसर्च में सामने आया है कि बंगाल की खाड़ी में जब साइक्लोन पूर्वी तट के करीब पहुंचते हैं, तो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण उनकी गति धीमी (Slow Motion) हो जाती है।
जब चक्रवात की गति धीमी हो जाती है, तो वह एक ही जगह पर ज्यादा देर तक टिका रहता है। इस वजह से, समान तीव्रता वाला चक्रवात भी कहीं अधिक विनाशकारी प्रभाव डालता है। तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश बहुत बड़े इलाके को तबाह कर देती है।
हाल ही में आया "अर्नब" चक्रवात (Cyclone Arnab) इसका सबसे सटीक उदाहरण था, जिसे आंध्र प्रदेश के तट पर 'लैंडफॉल' (Landfall) की प्रक्रिया पूरी करने में ही 6 घंटे लग गए।
वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि संख्या कम होने के बावजूद, भविष्य में आने वाले तूफानों की तबाही की क्षमता जलवायु परिवर्तन के कारण कहीं अधिक घातक (Lethal) हो सकती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जलवायु परिवर्तन और चक्रवातों पर जारी रिपोर्ट और महानिदेशक के आधिकारिक बयानों पर आधारित है।
Sabse pehle comment karne wale banein.