अक्टूबर की विदाई के साथ ही पूरे देश में सर्दियों की हल्की दस्तक महसूस होने लगी है। हालांकि, मौसम में लगातार हो रहे बदलावों के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को नवंबर महीने के लिए अपना मासिक मौसम पूर्वानुमान (Monthly Weather Forecast) जारी कर दिया है। मौसम विभाग के इस नवीनतम अलर्ट के अनुसार, नवंबर का महीना केवल कड़ाके की सर्दी ही नहीं लाएगा, बल्कि देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश (Unseasonal Rain) की भी संभावना है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में बन रही अल-नीनो (El Nino) की स्थितियां बताई जा रही हैं।
नवंबर में कैसा रहेगा तापमान का मिजाज?
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल नवंबर में मौसम का मिजाज मिलाजुला रहने वाला है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶अधिकतम तापमान: हिमालय की तलहटी वाले कुछ पहाड़ी इलाकों को छोड़कर, भारत के ज्यादातर हिस्सों में नवंबर के दौरान अधिकतम तापमान (Maximum Temperature) सामान्य से ज्यादा रहने के आसार हैं। इसका मतलब है कि दिन के समय लोगों को हल्की गर्मी या उमस का अहसास हो सकता है।
न्यूनतम तापमान: देश के अधिकांश हिस्सों में रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। हालांकि, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लोगों को रात में कड़ाके की ठंड का अहसास हो सकता है, क्योंकि यहां न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे नीचे रहने की संभावना जताई गई है।
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मध्य और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का अलर्ट
नवंबर में बारिश को लेकर IMD ने विशेष पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, देश के मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ चुनिंदा इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश (Above Normal Rainfall) होने की संभावना है। वहीं, देश के बाकी अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
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आंकड़ों की बात करें तो, नवंबर में देशभर में कुल मिलाकर दीर्घकालिक औसत (LPA - Long Period Average) की 77 फीसदी बारिश होने का अनुमान है। (क्या है LPA?): LPA का सीधा कनेक्शन किसी खास क्षेत्र में लंबी अवधि (सामान्यतः 30 से 50 वर्षों) के दौरान दर्ज की गई बारिश के औसत आंकड़ों से होता है। वर्ष 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर, पूरे भारत के लिए नवंबर महीने का एलपीए 29.7 मिलीमीटर तय है। वहीं, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में नवंबर के दौरान बारिश का एलपीए लगभग 118.7 मिलीमीटर है, जहां इस बार 77 प्रतिशत बारिश की उम्मीद है।
भारत के मौसम पर पड़ेगा 'अल नीनो' का गहरा असर
मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) पर अत्यधिक तीव्र ‘अल नीनो’ (El Nino) की स्थितियां सक्रिय रूप से बनी हुई हैं।
नवीनतम ‘मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम’ (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के पूर्वानुमानों से यह संकेत मिलता है कि नवंबर और दिसंबर के महीनों के दौरान भी ये तीव्र ‘अल नीनो’ की स्थितियां ज्यों की त्यों बनी रह सकती हैं। इसी के प्रभाव से भारत में हवाओं के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिसके चलते सर्दियों में अप्रत्याशित गर्मी और बेमौसम बारिश के हालात बन रहे हैं।
फ्लैशबैक: 1901 के बाद सबसे गर्म रहा यह अक्टूबर
नवंबर के पूर्वानुमान के साथ-साथ IMD ने अक्टूबर के मौसम का भी विस्तृत विश्लेषण पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अक्टूबर में भारत में 1901 के बाद से सबसे अधिक मासिक औसत अधिकतम तापमान (32.43 डिग्री सेल्सियस) दर्ज किया गया है। इसके पीछे भी तीव्र अल नीनो की स्थितियां ही मुख्य वजह रहीं। सामान्यतः अक्टूबर का औसत अधिकतम तापमान 31.37 डिग्री सेल्सियस रहता है।
इसके अलावा, इस साल अक्टूबर का मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी 20.83 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1901 के बाद से पांचवीं बार है जब अक्टूबर में इतना अधिक न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है (सामान्य औसत 20.01 डिग्री सेल्सियस होता है)। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों की ओर इशारा कर रहे हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.