आजाद समाज पार्टी के नेता बाबर चौहान खरदौनी को मेरठ की इंचौली थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के आधार पर की। पुलिस के मुताबिक मामला करीब दो-तीन साल पुराने एक आपराधिक केस से जुड़ा है। 

बाबर चौहान खरदौनी की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब वह आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में किठौर सीट से आसपा के लिए चुनावी तैयारी कर रहे थे। जुलाई में आजाद समाज पार्टी ने उन्हें किठौर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया था। 

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गैर-जमानती वारंट पर हुई गिरफ्तारी

इंचौली पुलिस ने बाबर चौहान को NBW के आधार पर गिरफ्तार किया है। मेरठ के एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था और इसी के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी की। पुलिस उनसे संबंधित मामले में पूछताछ कर रही है। 

उपलब्ध रिपोर्टों में मामले को रंगदारी से जुड़े पुराने मुकदमे के तौर पर बताया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं करती। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

गिरफ्तारी की खबर मिलते ही थाने पहुंचे समर्थक

बाबर चौहान की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता और उनके समर्थक देर रात इंचौली थाने पहुंच गए। रिपोर्ट के मुताबिक थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई।

पुलिस इस दौरान बाबर चौहान से मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ करती रही। 

किठौर से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी

बाबर चौहान खरदौनी को आजाद समाज पार्टी ने जुलाई 2026 में किठौर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया था। पार्टी ने उस समय उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों के लिए प्रभारियों की घोषणा की थी। ऐसे प्रभारियों को आगे चलकर प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना बताई गई थी। 

बाबर चौहान इससे पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने आजाद समाज पार्टी का रुख किया। अब किठौर सीट पर उनकी सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा था।

रंगदारी केस में क्या है पुलिस का पक्ष?

फिलहाल पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि बाबर चौहान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था और उसी के आधार पर गिरफ्तारी की गई। पुलिस उनसे पुराने मामले को लेकर पूछताछ कर रही है।

इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि रंगदारी के आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या रहती है, इस पर नजर रहेगी।

यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब किठौर विधानसभा क्षेत्र में 2027 चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अब बाबर चौहान की गिरफ्तारी का राजनीतिक और कानूनी असर क्या रहता है, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

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