बिजनौर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए चर्चित पूर्व मंत्री और एजेपी (AJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का Swami Prasad Maurya Bijnor दौरा अचानक सियासी हलचल का केंद्र बन गया है। जनपद के शेरकोट में प्रस्तावित उनकी एक विशाल जनसभा की अनुमति स्थानीय प्रशासन ने अंतिम समय में रद्द कर दी। इस प्रशासनिक फैसले के बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्य तय कार्यक्रम के तहत शेरकोट पहुंचे और अपने समर्थकों के बीच अपनी बात मजबूती से रखी।

​शेरकोट पहुंचने पर सियासी हलचल तेज

जानकारी के अनुसार, शेरकोट कस्बे में एजेपी अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का एक बड़ा जनसभा कार्यक्रम आयोजित होना था। इसके लिए तैयारियां भी चल रही थीं, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले प्रशासन की तरफ से अचानक अनुमति (परमिशन) निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। अनुमति रद्द होने की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पारा चढ़ गया। हालांकि, पूर्व मंत्री ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और सीधे शेरकोट कस्बे का रुख किया।

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​चुंगी नंबर 5 के ढाबे पर उमड़ी समर्थकों की भीड़

जनसभा स्थल पर कार्यक्रम न हो पाने के कारण स्वामी प्रसाद मौर्य शेरकोट स्थित चुंगी नंबर 5 के पास एक स्थानीय सैनी ढाबे पर पहुंचे। जैसे ही इलाके के लोगों और उनके समर्थकों को इस बात की भनक लगी, ढाबे पर भारी भीड़ जमा हो गई। बिना किसी औपचारिक मंच के ही वह अपने समर्थकों के बीच घिर गए और वहीं से अपनी बात रखी। इस दौरान वहां का राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ नजर आया।

​प्रशासन पर लगाया सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप

समर्थकों के बीच पहुंचकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने जनसभा की अनुमति ऐन वक्त पर रद्द किए जाने को लेकर सीधे तौर पर सत्ता पक्ष को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है, बल्कि सत्ता के भारी दबाव में आकर उनके कार्यक्रम को रोकने की यह कार्रवाई की गई है।

​प्रशासन द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले और मौर्य के पलटवार के बाद बिजनौर जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल, इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है।

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