\r\n\r\n\r\n\r\nआज दिनांक 04.02.2026 को रात्रि करीब 02.15 बजे पीआरवी द्वारा सूचना प्राप्त हुई थाना टीलामोड़ स्थित भारत सिटी में टावर बी-1 फ्लैट नं0 907 की नवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियों के कूदने की और मौके पर ही जिनकी मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई । मौके पर पहुँचकर जॉच की गई तो तीन… pic.twitter.com/lhGRjsTk6T
\r\n— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) February 4, 2026


1. घटना की वो काली रात: मिनट-दर-मिनट क्या हुआ?
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मंगलवार रात का घटनाक्रम: मौत की पटकथा
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- \r\n सोने का समय: परिवार रोज की तरह खाना खाकर सोया था। फ्लैट में दो कमरे और एक हॉल है। एक कमरे में माता-पिता और बेटा सोए थे, जबकि दूसरे कमरे में तीनों बहनें—निशिका, प्राची और पाखी—सोने चली गईं। किसी को आभास नहीं था कि यह उनकी आखिरी रात है।\r\n \r\n
- \r\n दरवाजा बंद: सोने के बहाने तीनों बहनें अपने कमरे में गईं और दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया। यह कोई सामान्य लॉक नहीं था; पुलिस जांच और परिजनों के बयानों के मुताबिक, यह उस साजिश का हिस्सा था जिसे वे अपने मोबाइल स्क्रीन पर चल रहे गेम के निर्देशों (Tasks) के तहत अंजाम देने वाली थीं।\r\n \r\n
- \r\n रात 2:00 बजे: जब पूरी सोसाइटी गहरी नींद में थी, इन तीनों बहनों ने बालकनी की तरफ रुख किया। पुलिस की जांच के अनुसार, बालकनी की रेलिंग तक पहुंचने के लिए उन्होंने एक 'स्टूल' का सहारा लिया। यह स्टूल ही वह जरिया बना जिससे वे मौत के मुहाने तक पहुंचीं।\r\n \r\n
- \r\n 80 फीट की ऊंचाई: वो फ्लैट 9वीं मंजिल पर था। वहां से जमीन की दूरी करीब 80 फीट थी। एक-एक करके तीनों बहनों ने उस ऊंचाई से छलांग लगा दी। इतनी ऊंचाई से गिरने पर बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी।\r\n \r\n
- \r\n धमाका और सन्नाटा: उनके गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि नीचे सुरक्षा गार्ड और आसपास के लोग सहम गए। माता-पिता भी आवाज सुनकर दौड़े। उन्होंने बेटियों के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वह बंद था।\r\n \r\n
- \r\n टूटा दरवाजा, टूटे सपने: किसी अनहोनी की आशंका में पिता ने दरवाजा तोड़ा। अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई—कमरा खाली था और बालकनी का दरवाजा खुला था। जब वे दौड़कर नीचे पहुंचे, तो उनकी तीनों लाड़लियां खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं।\r\n \r\n
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पुलिस का त्वरित एक्शन और अस्पताल की दौड़
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2. सुसाइड नोट का सच: "सॉरी पापा... गेम हमारी जान है"
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सुसाइड नोट के प्रमुख और झकझोरने वाले अंश:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं। कोरियन गेम हमारी जिंदगी है, हमारी जान है। शायद अब आपको एहसास होगा कि हम आपसे कितना प्यार करते थे और उस गेम से भी, जिसे आप छुड़वाना चाहते थे। हमें माफ कर देना, लेकिन हमें कोरिया जाना है।"\r\n
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3. "कोरिया जाने की जिद": अजीबोगरीब व्यवहार और अलगाव
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व्यवहार में आए 5 खतरनाक बदलाव:
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- \r\n स्कूल से नाता टूटा: गेम की लत इस कदर हावी थी कि तीनों ने 2 साल पहले स्कूल जाना छोड़ दिया था। शिक्षा से उनका नाता पूरी तरह टूट चुका था। वे दिन-रात सिर्फ मोबाइल में ही लगी रहती थीं।\r\n \r\n
- \r\n सामाजिक अलगाव (Social Isolation): वे घर से बाहर नहीं निकलती थीं। पड़ोसियों, रिश्तेदारों या दोस्तों से बात करना तो दूर, वे अपनी दुनिया में ही सिमट कर रह गई थीं। बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह कट चुका था।\r\n \r\n
- \r\n अत्यधिक निकटता (Pathological Co-dependency): पिता ने एक बेहद चौंकाने वाली बात बताई। उन्होंने कहा कि तीनों बहनें हर वक्त एक साथ रहती थीं। हद तो यह थी कि वे नहाती भी एक साथ थीं और टॉयलेट भी साथ जाती थीं। मनोवैज्ञानिक इसे 'Shared Psychosis' या साझा भ्रम की स्थिति मान सकते हैं, जहां एक व्यक्ति का भ्रम दूसरे में स्थानांतरित हो जाता है और वे एक ही तरह से सोचने लगते हैं।\r\n \r\n
- \r\n लीडर और फॉलोअर का पैटर्न: पिता के मुताबिक, बड़ी बेटी निशिका या मंझली बेटी प्राची अक्सर लीडर की भूमिका में होती थीं। प्राची बाकी दोनों को टास्क देती थी और वे बिना सवाल किए उसकी हर बात मानती थीं। यह स्पष्ट करता है कि गेम का मास्टरमाइंड उन्हें निर्देश देता था, जिसे वे आपस में बांट लेती थीं।\r\n \r\n
- \r\n गोपनीयता और छिपाव: जब भी माता-पिता उनके कमरे में जाते, वे तीनों उठकर दूसरे कमरे में चली जाती थीं ताकि कोई उनकी बातों को सुन न सके या मोबाइल स्क्रीन को देख न सके। यह गोपनीयता ही उनकी मौत का कारण बनी।\r\n \r\n
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4. आखिर क्या है यह 'कोरियन लव गेम'? (The Killer Game Explained)
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गेम का फॉर्मेट और कार्यप्रणाली:
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- \r\n पहचान: कोरियन लव गेम एक ऑनलाइन चैट सिस्टम या गेम है। यह किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और विभिन्न मैसेजिंग ऐप्स के जरिए फैलता है।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी प्रोफाइल (Impersonation): इसमें सामने वाला व्यक्ति (Admin/Handler) खुद को कोरियन या कोई आकर्षक विदेशी लड़का/लड़की बताकर चैट शुरू करता है। आज के दौर में बच्चों में K-Pop (कोरियन पॉप कल्चर) और कोरियन ड्रामा के प्रति जो दीवानगी है, उसका फायदा उठाकर उन्हें आकर्षित किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n विश्वास जीतना (Grooming Phase): शुरुआत में प्यार, दोस्ती और 'कोरिया ले जाने' के सुनहरे सपने दिखाए जाते हैं। आसान-आसान टास्क दिए जाते हैं, जैसे— "आज अपनी पसंद का खाना खाओ" या "रात को 12 बजे उठकर मैसेज करो"। इससे बच्चे को लगता है कि यह मजेदार है और सामने वाला उनका हितैषी है।\r\n \r\n
- \r\n ब्रेनवॉश और दबाव: धीरे-धीरे टास्क कठिन और अजीब होने लगते हैं। जैसे— "परिवार से बात मत करो", "खुद को कमरे में बंद करो", "अपने शरीर पर निशान बनाओ"। मानसिक दबाव बनाया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n डर का खेल: जब बच्चा गेम छोड़ना चाहता है, तो उसे डराया जाता है। कई मामलों में ब्लैकमेलिंग की जाती है।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम टास्क (The Final Step): ब्लू व्हेल की तरह, इसका भी अंतिम चरण आत्महत्या (Self-Harm/Suicide) होता है, जिसे 'गेम जीतने' या 'कोरिया जाने' का एकमात्र रास्ता बताया जाता है। गाजियाबाद की घटना में भी यही पैटर्न दिखाई देता है।\r\n \r\n
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5. ब्लू व्हेल और मोमो चैलेंज की यादें हुईं ताजा
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- \r\n ब्लू व्हेल चैलेंज (Blue Whale Challenge): यह रूस से शुरू हुआ एक कुख्यात गेम था। इसमें 50 दिनों तक 50 टास्क दिए जाते थे।\r\n\r\n
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- \r\n टास्क: हाथ पर ब्लेड से व्हेल मछली बनाना, डरावनी फिल्में देखना, सुबह 4 बजे उठना।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम चरण: छत से कूदना।\r\n \r\n
- \r\n स्थिति: भारत सरकार ने 2017 में इसे बैन कर दिया था, लेकिन डार्क वेब और गुप्त लिंक्स के जरिए इसके वेरिएशन आज भी मौजूद हो सकते हैं।\r\n \r\n
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- \r\n मोमो चैलेंज (Momo Challenge): इसमें व्हाट्सएप पर एक डरावनी गुड़िया की फोटो के साथ अनजान नंबर से मैसेज आते थे और बच्चों को हिंसक टास्क दिए जाते थे।\r\n \r\n
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6. पुलिस जांच: क्या कह रही है कानून व्यवस्था?
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जांच के मुख्य बिंदु:
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- \r\n मोबाइल फॉरेंसिक: पुलिस तीनों बच्चियों के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक लैब भेजेगी। साइबर सेल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे किस ऐप, वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए यह गेम खेल रही थीं। चैट हिस्ट्री रिकवर करना पुलिस की प्राथमिकता है।\r\n \r\n
- \r\n एडमिन की तलाश: पुलिस यह ट्रेस करने की कोशिश कर रही है कि वह "हैंडलर" कौन था जो इन बच्चियों को निर्देश दे रहा था। क्या वह भारत में बैठा कोई अपराधी है या विदेश से संचालित हो रहा है?\r\n \r\n
- \r\n आईपी एड्रेस ट्रैकिंग: गेम सर्वर और आईपी एड्रेस को ट्रैक किया जा रहा है ताकि इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n आत्महत्या की पुष्टि: पुलिस का मानना है कि बच्चियों ने 'अंतिम टास्क' के रूप में ही छलांग लगाई होगी, क्योंकि जिस तरह उन्होंने कमरे को बंद किया, स्टूल का इंतजाम किया और एक साथ कूदीं, वह पूरी तरह से पूर्व-नियोजित (Pre-planned) लगता है।\r\n \r\n
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7. पिता का दर्द और हर माता-पिता के लिए चेतावनी
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पिता का बयान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मेरी बच्चियों के साथ बहुत बुरा हुआ। उन्होंने लिखा- 'पापा, हम गेम नहीं छोड़ सके।' अगर मुझे पता होता कि उन्हें ऐसे खतरनाक टास्क दिए जा रहे हैं, तो मैं सख्ती करके पहले ही मोबाइल छीन लेता। मैं सभी मां-बाप से हाथ जोड़कर विनती करता हूं— अपने बच्चों को मोबाइल गेम खेलने न दें। आप नहीं जानते कि उस स्क्रीन के पीछे कौन सा राक्षस बैठा है जो आपके बच्चे के दिमाग से खेल रहा है। पता ही नहीं चलता कि कौन सा टास्क दिया जा रहा है।"\r\n
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8. एक्सपर्ट की राय: क्यों मौत के जाल में फंसते हैं बच्चे?
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- \r\n डोपामाइन रश (Dopamine Rush): वीडियो गेम और सोशल मीडिया दिमाग में डोपामाइन (खुशी देने वाला रसायन) रिलीज करते हैं। यह नशे की तरह होता है।\r\n \r\n
- \r\n वैलिडेशन की भूख: ऑनलाइन अजनबी जब तारीफ करते हैं या 'टास्क' पूरा करने पर शाबाशी देते हैं, तो अकेलेपन के शिकार बच्चों को लगता है कि कोई उन्हें समझता है।\r\n \r\n
- \r\n फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO): "कोरिया जाना है"—यह सपना उन्हें वास्तविकता से काट देता है। उन्हें लगता है कि गेम के जरिए वे एक फैंटेसी दुनिया में पहुंच जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n शेयर्ड साइकोसिस (Shared Psychosis): इस केस में तीनों बहनें एक साथ थीं। जब समूह में कोई काम किया जाता है, तो जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ जाती है और डर खत्म हो जाता है। इसे 'मोब मेंटलिटी' का छोटा रूप भी कहा जा सकता है। एक बहन का भ्रम दूसरी और तीसरी बहन में फैल गया।\r\n \r\n
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9. पेरेंटिंग अलर्ट: अपने बच्चे को कैसे बचाएं?
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खतरे के संकेत (Red Flags to Watch):
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- \r\n अगर बच्चा अचानक बहुत ज्यादा समय अकेले कमरे में बिताने लगे।\r\n \r\n
- \r\n नींद कम आना या रात-रात भर जागना।\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को छिपाना जब आप पास आएं।\r\n \r\n
- \r\n व्यवहार में अचानक बदलाव—चिड़चिड़ापन, गुस्सा या बहुत ज्यादा उदासी।\r\n \r\n
- \r\n शरीर पर कोई रहस्यमयी चोट या निशान (कट के निशान)।\r\n \r\n
- \r\n दोस्तों और परिवार से बातचीत बंद कर देना।\r\n \r\n
- \r\n खाना-पीना छोड़ देना या बहुत कम कर देना।\r\n \r\n
- \r\n स्कूल जाने से कतराना या पढ़ाई में अचानक गिरावट।\r\n \r\n
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सुरक्षा के उपाय (Safety Guidelines):
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- \r\n संवाद (Communication): बच्चों को डांटने के बजाय उनसे दोस्त बनकर बात करें। जानें कि वे ऑनलाइन क्या करते हैं और किसके साथ चैट करते हैं।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल डिटॉक्स: घर में इंटरनेट और मोबाइल इस्तेमाल का एक समय निर्धारित करें। रात को सोते समय मोबाइल बच्चों के कमरे में न रहने दें।\r\n \r\n
- \r\n निगरानी (Monitoring): 'Google Family Link' या अन्य पेरेंटल कंट्रोल ऐप्स का इस्तेमाल करें ताकि आप देख सकें कि बच्चा कौन सा गेम खेल रहा है।\r\n \r\n
- \r\n गैजेट्स की जगह: कंप्यूटर या गेमिंग कंसोल को घर के कॉमन एरिया (हॉल) में रखें, न कि बेडरूम में।\r\n \r\n
- \r\n जागरूकता: बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग (Grooming) और साइबर बुलिंग के बारे में समझाएं। उन्हें बताएं कि ऑनलाइन दोस्त हमेशा वह नहीं होते जो वे दिखते हैं।\r\n \r\n
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एक अधूरी कहानी जो सवाल छोड़ गई
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गाजियाबाद की इन तीन बहनों को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि।
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Sabse pehle comment karne wale banein.