नई दिल्ली (New Delhi): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 की कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक ऐसा सख्त नियम लागू किया है, जिसने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। बोर्ड ने विज्ञान (Science) और सामाजिक विज्ञान (Social Science) विषयों की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में एक बड़ा बदलाव करते हुए 'अनुशासन-आधारित सेक्शन-वाइज मूल्यांकन प्रणाली' (Discipline-Based Section-Wise Evaluation System) को अनिवार्य कर दिया है।READ ALSO:-यूपी पुलिस का 'हृदय परिवर्तन': अब खौफ नहीं, 'सम्मान' होगा खाकी का नया हथियार; थाने में 'ओए' की जगह गूंजेगा 'सर', डीजीपी मुख्यालय ने तैयार किया 'सद्भावना' का ब्लूप्रिंट
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इस नए नियम के तहत, यदि कोई छात्र सही उत्तर भी 'गलत सेक्शन' में लिख देता है, तो उसे उस उत्तर के लिए कोई अंक नहीं दिए जाएंगे। परीक्षक उसे 'अटेंप्ट नॉट डन' (Attempt Not Done) मानते हुए शून्य (0) अंक देंगे। यह नियम इतना कठोर है कि परीक्षा के बाद होने वाली री-चेकिंग या पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया में भी इस गलती को सुधारा नहीं जा सकेगा।
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क्या है नया 'सेक्शन-वाइज' मूल्यांकन नियम?

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सीबीएसई का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है। पहले छात्र किसी भी क्रम में उत्तर लिख देते थे, जिससे कई बार परीक्षकों को उत्तर खोजने में परेशानी होती थी और मार्किंग में गलती होने की संभावना रहती थी। अब बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रश्न-पत्र के जिस सेक्शन का प्रश्न है, उसका उत्तर उत्तर-पुस्तिका में उसी निर्धारित सेक्शन के तहत ही लिखा जाना चाहिए।
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उदाहरण के लिए, यदि विज्ञान के पेपर में 'जीवविज्ञान' (Biology) का प्रश्न सेक्शन-ए में है, और छात्र उसका उत्तर 'रसायन विज्ञान' (Chemistry) वाले सेक्शन-बी के बीच में लिख देता है, तो वह उत्तर जांचा ही नहीं जाएगा।
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विषयवार नई संरचना: जानें किस सेक्शन में क्या लिखना है

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सीबीएसई ने स्पष्टता के लिए विषयों को अलग-अलग सेक्शनों में बांटा है। छात्रों को उत्तर लिखते समय इसी क्रम का पालन करना होगा।
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विज्ञान (Science) - कोड 086

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विज्ञान की उत्तर-पुस्तिका अब तीन अनिवार्य खंडों में विभाजित होगी:
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  1. \r\n
    सेक्शन A (Section A): जीवविज्ञान (Biology)
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    सेक्शन B (Section B): रसायन विज्ञान (Chemistry)
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सेक्शन C (Section C): भौतिक विज्ञान (Physics)
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  6. \r\n
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(नोट: यह क्रम प्रश्न-पत्र के अनुसार बदल सकता है, लेकिन छात्र को अपनी कॉपी में हेडिंग वही डालनी है जो प्रश्न-पत्र में दी गई है।)
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सामाजिक विज्ञान (Social Science) - कोड 087

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सामाजिक विज्ञान में चार प्रमुख विषय होते हैं, इसलिए इसे चार सेक्शनों में बांटा गया है:
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  1. \r\n
    सेक्शन A (Section A): इतिहास (History)
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  2. \r\n
  3. \r\n
    सेक्शन B (Section B): भूगोल (Geography)
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सेक्शन C (Section C): राजनीति विज्ञान (Political Science)
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    सेक्शन D (Section D): अर्थशास्त्र (Economics)
    \r\n
  8. \r\n
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अनुशासन ही सफलता की कुंजी

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दीवान स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. वीके मिश्रा ने इस बदलाव को छात्रों के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों बताया है। उन्होंने कहा, "छात्रों को परीक्षा शुरू होने से पहले उत्तर-पुस्तिका में इन सेक्शनों की स्पष्ट हेडिंग लिखना अनिवार्य है। उत्तरों को ठीक उसी क्रम और सेक्शन में रखना होगा। किसी भी हाल में अलग-अलग विषयों के उत्तर एक सेक्शन में मिक्स नहीं होने चाहिए।"
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डॉ. मिश्रा ने आगे बताया कि अक्सर छात्र हड़बड़ी में फिजिक्स के न्यूमेरिकल केमिस्ट्री के सेक्शन में हल कर देते हैं। पहले मानवीय आधार पर परीक्षक इसे चेक कर लेते थे, लेकिन अब सिस्टम बदल चुका है। अब अलग-अलग सेक्शनों की कॉपियां अलग-अलग विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) के पास जा सकती हैं। ऐसे में यदि फिजिक्स का उत्तर केमिस्ट्री के बंडल में चला गया, तो वह बिना चेक हुए रह जाएगा।
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15 मिनट का 'रीडिंग टाइम' बना गेम-चेंजर

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सीबीएसई द्वारा प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए दिए जाने वाले शुरुआती 15 मिनट अब केवल प्रश्न पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि 'पेज प्लानिंग' (Page Planning) के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं।
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15 मिनट में क्या करें?

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    \r\n
  1. \r\n
    हेडिंग डालें: उत्तर-पुस्तिका मिलते ही सबसे पहले हर सेक्शन के लिए पर्याप्त पेज छोड़ते हुए ऊपर बड़े अक्षरों में सेक्शन का नाम (जैसे: SECTION A - BIOLOGY) लिख लें।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    जगह का अनुमान: अनुमान लगाएं कि बायो के लिए कितने पेज लगेंगे, फिर उसके बाद ही केमिस्ट्री का सेक्शन शुरू करें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सप्लीमेंटरी शीट: यदि मुख्य कॉपी भर जाए और सप्लीमेंटरी शीट लेनी पड़े, तो उस पर भी सबसे ऊपर विषय और सेक्शन का नाम (जैसे: PHYSICS continued...) अवश्य लिखें।
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  6. \r\n
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'अटेंप्ट नॉट डन' (Attempt Not Done) का खतरा

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यह शब्द छात्रों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। नए नियमों के अनुसार:
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  • \r\n
    यदि आपने सेक्शन A में सेक्शन B का उत्तर लिखा, तो कंप्यूटर और परीक्षक उसे 'Extra' या 'Irrelevant' मानकर क्रॉस (X) कर देंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    भले ही आपका उत्तर 100% सही हो, और उसमें डायग्राम भी बना हो, लेकिन गलत जगह होने के कारण उस पर 0 अंक चढ़ेंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    री-चेकिंग के दौरान छात्र यह दावा नहीं कर सकेगा कि उसका उत्तर सही था, क्योंकि नियम पहले ही बता दिए गए थे।
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  • \r\n
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अभिभावकों के लिए सलाह: घर पर कैसे कराएं तैयारी?

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यह बदलाव रातों-रात आदत में नहीं आएगा। अभिभावकों को चाहिए कि वे प्री-बोर्ड (Pre-Board) और घर पर होने वाले मॉक टेस्ट (Mock Tests) में इस पैटर्न का सख्ती से पालन कराएं।
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  1. \r\n
    असली माहौल दें: बच्चे को घर पर अभ्यास कराते समय एक कॉपी दें और उसे कहें कि पहले पेज प्लानिंग करे।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    सेक्शन मिक्स न करें: अगर बच्चा टेस्ट देते समय इतिहास के बीच में भूगोल का नक्शा बना दे, तो उसे तुरंत टोकें और उस उत्तर को काट दें ताकि उसे अपनी गलती का अहसास हो।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    स्पीड नहीं, प्लानिंग: बच्चों को समझाएं कि अब सिर्फ तेज लिखना काफी नहीं है, सही जगह पर लिखना ज्यादा जरूरी है।
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परीक्षा के दिन के लिए 'लाइफ-सेविंग' टिप्स (Exam Day Tips)

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अगर परीक्षा हॉल में गलती हो जाए तो क्या करें? घबराहट में अक्सर बड़ी गलतियां होती हैं। यहाँ कुछ टिप्स दी गई हैं:
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  • \r\n
    गलती हो जाए तो: मान लीजिए आप सेक्शन A में सेक्शन B का उत्तर लिख चुके हैं। घबराएं नहीं। उस पूरे उत्तर को एक लाइन से काट दें (Cut it clearly)। फिर सही सेक्शन में जाकर 'Question No.' डालकर दोबारा उत्तर लिखें।
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  • \r\n
  • \r\n
    नया पेज, नया सेक्शन: हमेशा नया सेक्शन, नए पेज से शुरू करें (Start new section from a fresh page)। कंजूसी न करें।
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  • \r\n
  • \r\n
    साफ हेडिंग: सेक्शन की हेडिंग को अंडरलाइन करें ताकि परीक्षक को दूर से ही दिख जाए कि यहाँ से विषय बदल गया है।
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  • \r\n
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सीबीएसई का यह कदम मूल्यांकन में अनुशासन और स्पष्टता लाने के लिए है। यह छात्रों को भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार करेगा जहाँ निर्देशों का पालन (Instruction Compliance) बेहद जरूरी होता है। अब सिर्फ रट्टा मारना या ज्ञान होना काफी नहीं है, बल्कि 'सही प्रेजेंटेशन' (Correct Presentation) ही आपको टॉपर बनाएगा। समय रहते अभ्यास करने वाले छात्र ही इस चुनौती से पार पा सकेंगे।
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