लखनऊ (Lucknow News): उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) की छवि को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों पर अब विराम लगने वाला है। प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय ने एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत खाकी वर्दी का रौब नहीं, बल्कि अब उसका 'सद्व्यवहार' नजर आएगा। थाने की दहलीज पर कदम रखने वाले हर पीड़ित और फरियादी को अब पुलिसकर्मी 'सर' (Sir) कहकर संबोधित करेंगे और उन्हें ससम्मान कुर्सी पर बैठाकर उनकी पीड़ा सुनी जाएगी।READ ALSO:-विदेश से लौटते वक्त अब बैग भरकर लाएं खुशियां: कस्टम नियमों में ऐतिहासिक बदलाव, लिमिट बढ़कर ₹75,000 हुई; ज्वेलरी पर 'कीमत' का झंझट खत्म, अब 'वजन' से होगी बात
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इस बदलाव को केवल कागजी आदेश तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारने के लिए मुरादाबाद स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी (Dr. B.R. Ambedkar Police Academy) में पुलिसकर्मियों की 'इमोशनल और बिहेवियरल इंटेलिजेंस' (Emotional and Behavioral Intelligence) की क्लास शुरू होने जा रही है।
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क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
\r\n\r\nअक्सर देखा गया है कि जब कोई पीड़ित, विशेषकर गरीब या कमजोर वर्ग का व्यक्ति, अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचता है, तो पुलिस का रूखा व्यवहार उसे और डरा देता है। फरियादी पहले से ही तनाव में होता है, और पुलिस की बेरुखी उसकी हिम्मत तोड़ देती है। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह (27-28 दिसंबर) में लखनऊ पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन किया गया। डीजीपी और शीर्ष अधिकारियों ने माना कि अपराध नियंत्रण और तकनीक के साथ-साथ पुलिस की 'सॉफ्ट स्किल्स' (Soft Skills) पर काम करना समय की मांग है। इसी मंथन से निकला है 'व्यवहार परिवर्तन' का यह नया ब्लूप्रिंट।
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मास्टर ट्रेनर तैयार करेगी पुलिस अकादमी
\r\n\r\nडीजी ट्रेनिंग (DG Training) राजीव सभरवाल ने इस योजना की रूपरेखा तैयार की है। यह ट्रेनिंग मॉडल 'ट्रेन द ट्रेनर' (Train the Trainer) की तर्ज पर काम करेगा।
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- \r\n चयन प्रक्रिया: प्रदेश के हर जिले से चुनिंदा इंस्पेक्टर (Inspectors) और क्षेत्राधिकारी (COs) स्तर के अधिकारियों को चुना जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n अकादमी में प्रशिक्षण: इन चयनित अधिकारियों को मुरादाबाद स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी बुलाया जाएगा। यहां उन्हें मनोविज्ञान और संचार कौशल (Communication Skills) के विशेषज्ञ बताएंगे कि एक पीड़ित के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n जिलों में विस्तार: ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये अधिकारी अपने-अपने जिलों में लौटेंगे और वहां तैनात अन्य पुलिसकर्मियों, सिपाहियों और दरोगाओं को यही ट्रेनिंग देंगे।\r\n \r\n
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'सर' बोलना सिर्फ शब्द नहीं, सम्मान है
\r\n\r\nइस पहल का सबसे अहम हिस्सा 'भाषा' और 'बॉडी लैंग्वेज' है।
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- \r\n संबोधन: अब 'अबे', 'तू', या रूखे शब्दों की जगह 'सर', 'मैडम', 'श्रीमान' जैसे शब्दों का प्रयोग अनिवार्य होगा।\r\n \r\n
- \r\n बैठने की व्यवस्था: फरियादी के आते ही उसे सबसे पहले पीने का पानी और बैठने के लिए कुर्सी दी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n सुनने की कला: पुलिसकर्मी को शिकायतकर्ता की बात बिना बीच में टोके धैर्यपूर्वक सुननी होगी।\r\n \r\n
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डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल ने कहा, "थाने में आने वाला हर फरियादी सम्मान का हकदार है। उनके साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए। फरियादी की बात ध्यान से सुनना और उनकी समस्याओं को समझना पुलिसिंग का ही हिस्सा है। यह ट्रेनिंग चरणबद्ध तरीके से कराई जाएगी।"
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लखनऊ कार्यशाला: बदलाव की नींव
\r\n\r\n27 और 28 दिसंबर 2025 को लखनऊ मुख्यालय में हुई दो दिवसीय कार्यशाला इस बदलाव की नींव बनी। इसमें न केवल अपराध नियंत्रण, साइबर क्राइम और नई तकनीक पर चर्चा हुई, बल्कि सबसे ज्यादा जोर 'जन-सुनवाई' (Public Hearing) की गुणवत्ता पर दिया गया। अधिकारियों ने पाया कि कई बार एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद पीड़ित पुलिस के व्यवहार से असंतुष्ट रहता है। इस 'गैप' को भरने के लिए ही अब संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाया जाएगा।
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मनोवैज्ञानिक प्रभाव और जनता का विश्वास
\r\n\r\nपुलिसिंग के जानकारों का मानना है कि यह कदम 'कम्युनिटी पुलिसिंग' (Community Policing) को मजबूत करेगा।
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- \r\n तनाव कम होगा: जब पुलिसकर्मी विनम्रता से पेश आएगा, तो फरियादी का आधा तनाव वहीं खत्म हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n बेहतर इनपुट: एक डरा हुआ व्यक्ति कभी भी पुलिस को पूरी जानकारी नहीं दे पाता। मित्रवत व्यवहार से पुलिस को अपराध की तह तक जाने में मदद मिलेगी।\r\n \r\n
- \r\n छवि सुधार: उत्तर प्रदेश पुलिस को अक्सर सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है, लेकिन यह नई पहल उसे एक 'संवेदनशील फोर्स' के रूप में स्थापित करेगी।\r\n \r\n
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चुनौतियां और आगे की राह
\r\n\r\nहालांकि, इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा। यूपी पुलिस पर काम का भारी दबाव, लंबी ड्यूटी के घंटे और संसाधनों की कमी अक्सर पुलिसकर्मियों के चिड़चिड़ेपन का कारण बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यवहारिक ट्रेनिंग के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' (Stress Management) पर भी ध्यान देना होगा।
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प्रशिक्षण निदेशालय ने सभी जिला कप्तानों (SP/SSP) को पत्र भेजकर इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी दे दी है। जल्द ही पहला बैच मुरादाबाद अकादमी के लिए रवाना होगा।
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UP Police Behavior Change 2026 की यह पहल अगर सही तरीके से लागू होती है, तो यह पुलिस और जनता के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत होगी। वर्दी का असली सम्मान डराने में नहीं, बल्कि किसी के आंसू पोंछने और उसे 'सर' कहकर सम्मान देने में है। अब देखना होगा कि थानों के रोजनामचे में दर्ज होने वाली शिकायतों के साथ-साथ पुलिस की जुबान और व्यवहार में यह बदलाव कितनी जल्दी दिखाई देता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.