धामपुर (बिजनौर): किसी भी समाज में जागरूकता की लौ जलाने का सबसे सशक्त माध्यम 'शिक्षक' (Teacher) होता है। एक शिक्षक हर दिन सैकड़ों बच्चों और उनके जरिए हजारों परिवारों से सीधे जुड़ा होता है। इसी दूरगामी सोच के साथ, धामपुर शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर एक अभिनव पहल की।READ ALSO:-मेरठ में 'कचरे से क्रांति': अब गीले कूड़े से बनेगी CNG गैस; शहर से हमेशा के लिए खत्म होंगे बदबूदार कूड़े के पहाड़, 20 हजार घरों के रोशन होंगे चूल्हे
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विश्व क्षय रोग दिवस (World Tuberculosis Day) के अवसर पर धामपुर के ब्लॉक संसाधन केंद्र (Block Resource Center - BRC) को एक जन-जागरूकता मंच में तब्दील कर दिया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह था कि स्कूलों को केवल किताबी ज्ञान का केंद्र न रखकर, उन्हें 'सार्वजनिक स्वास्थ्य' (Public Health) और 'बीमारी निवारण' का प्रथम रक्षा कवच (First line of defense) बनाया जाए।
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भारत सरकार ने 2025 तक देश को पूरी तरह से 'टीबी मुक्त' (TB Free India) बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धामपुर क्षेत्र के प्राइमरी (Primary Schools) और जूनियर हाई स्कूलों (Junior High Schools) के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को इस विशेष कार्यशाला में आमंत्रित किया गया था।
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'हां! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं': 2025 की थीम का क्या है अर्थ?
\r\n\r\nबैठक की शुरुआत इस वर्ष की थीम (Theme of 2025) पर गहन चर्चा के साथ हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि "Yes! We can end TB" कोई साधारण नारा नहीं है, बल्कि यह एक आशावाद और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। दशकों से टीबी (तपेदिक/क्षय रोग) को एक लाइलाज और कलंकित बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान और डॉट्स (DOTS) जैसी प्रभावी उपचार प्रणालियों के कारण इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।
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- \r\n शिक्षकों की भूमिका: वैज्ञानिकों ने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने छात्रों के बीच टीबी से जुड़ी भ्रांतियों (Stigma) को दूर करें। यदि कक्षा में किसी बच्चे को लगातार दो हफ्ते से ज्यादा खांसी है, हल्का बुखार रहता है, या वजन कम हो रहा है, तो शिक्षक तुरंत उस बच्चे के अभिभावकों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र (CHC/PHC) में मुफ्त जांच कराने की सलाह दें।\r\n \r\n
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BRC वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का संबोधन: रोगों का समूल नाश
\r\n\r\nकार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित BRC के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने क्षय रोग के साथ-साथ अन्य संक्रामक और जानलेवा बीमारियों के निवारण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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टीबी (TB) से बचाव और उपचार:
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- \r\n लक्षणों की पहचान: लगातार खांसी, बलगम में खून आना, शाम के समय बुखार बढ़ना, सीने में दर्द और भूख न लगना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं।\r\n \r\n
- \r\n मुफ्त इलाज: विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच (बलगम और एक्स-रे) और पूरा इलाज बिल्कुल मुफ्त है। इसके अलावा, सरकार टीबी के मरीजों को पोषण के लिए 'निक्षय पोषण योजना' के तहत हर महीने 500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। शिक्षकों को इस योजना का प्रचार-प्रसार करने को कहा गया।\r\n \r\n
- \r\n संक्रमण रोकना: टीबी हवा के जरिए फैलने वाला रोग (Airborne disease) है। खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखना सबसे जरूरी बचाव है। स्कूलों में वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह) अच्छा होना चाहिए।\r\n \r\n
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मच्छरों का आतंक: डेंगू और मलेरिया से बच्चों को बचाने की रणनीति
\r\n\r\nगर्मी और बारिश का मौसम आते ही उत्तर प्रदेश में डेंगू (Dengue), मलेरिया (Malaria) और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर-जनित बीमारियों का खतरा चरम पर पहुंच जाता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम होती है, इसलिए वे मच्छरों के सबसे आसान शिकार बनते हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शिक्षकों को 'मच्छर मुक्त स्कूल' (Mosquito-free Schools) बनाने के लिए कड़े निर्देश दिए:
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- \r\n पूरी आस्तीन के कपड़े: प्रार्थना सभा (Assembly) में बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि बच्चे स्कूल में पूरी बांह (Full sleeves) की शर्ट और पैंट पहनकर आएं, ताकि मच्छरों के काटने का खतरा कम हो।\r\n \r\n
- \r\n मच्छर रोधी क्रीम/कॉयल: जरूरत पड़ने पर स्कूल परिसरों में प्राकृतिक मच्छर रोधी उपायों का इस्तेमाल किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n लक्षणों पर नजर: यदि कोई बच्चा तेज बुखार, सिरदर्द या जोड़ों में दर्द की शिकायत करता है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास भेजा जाए।\r\n \r\n
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स्कूल परिसर में जलभराव पर सख्त पाबंदी: "रुका हुआ पानी, बीमारियों की खानी"
\r\n\r\nबैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा स्कूलों की स्वच्छता (School Hygiene) था। वैज्ञानिक ने सभी हेडमास्टरों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि किसी भी स्कूल परिसर में या उसके आसपास गंदे पानी का भराव (Stagnant Water) नहीं होना चाहिए।
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जलभराव से जुड़े खतरे और बचाव:
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- \r\n डेंगू के मच्छर की ब्रीडिंग: डेंगू फैलाने वाला 'एडीज मच्छर' (Aedes aegypti) साफ लेकिन रुके हुए पानी में पनपता है।\r\n \r\n
- \r\n निर्देश: शिक्षकों से कहा गया कि वे नियमित रूप से स्कूल की छतों, टूटे हुए बर्तनों, पुराने टायरों, और खाली गमलों की जांच करें। कहीं भी बारिश या हैंडपंप का पानी इकट्ठा न होने दें।\r\n \r\n
- \r\n नालियों की सफाई: यदि स्कूल के पास नालियां चोक हैं, तो ग्राम प्रधान या नगर पालिका के माध्यम से उनकी तुरंत सफाई कराई जाए और एंटी-लार्वा स्प्रे या जला हुआ मोबिल ऑयल (Oil) डलवाया जाए।\r\n \r\n
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वैक्सीनेशन (टीकाकरण): मजबूत भविष्य की नींव
\r\n\r\nगंभीर बीमारियों से बचाव में रोकथाम के साथ-साथ 'इम्यूनाइजेशन' (Immunization) का महत्व सबसे अधिक है। बैठक में वैज्ञानिक ने यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) और मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush) के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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- \r\n जागरूकता का अभाव: अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रांतियों के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को टीके नहीं लगवाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n शिक्षक बनेंगे 'वैक्सीन एंबेसडर': शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई कि वे स्कूल में होने वाली पीटीएम (Parent-Teacher Meeting - PTM) या गांव की चौपालों में जाकर अभिभावकों को बताएं कि बीसीजी (BCG - जो टीबी से बचाता है), पोलियो, खसरा, रूबेला और डीपीटी के टीके बच्चों के जीवन के लिए कितने आवश्यक हैं। यदि किसी बच्चे का कोई टीका छूट गया है, तो उसे एएनएम (ANM) या आशा (ASHA) कार्यकर्ता की मदद से लगवाया जाए।\r\n \r\n
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शिक्षकों की प्रतिक्रिया: "हम निभाएंगे अपनी जिम्मेदारी"
\r\n\r\nइस वृहद कार्यशाला में भाग लेने वाले धामपुर के शहरी और ग्रामीण (Urban and Rural) दोनों क्षेत्रों के शिक्षकों में भारी उत्साह देखा गया।
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- \r\n एकजुटता: प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल के शिक्षकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे इस बैठक में मिले ज्ञान को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखेंगे।\r\n \r\n
- \r\n स्कूलों में चलेगा अभियान: कई प्रधानाध्यापकों ने बताया कि वे अगले दिन से ही अपनी-अपनी प्रार्थना सभाओं में 'स्वास्थ्य जागरूकता सेगमेंट' (Health Awareness Segment) शुरू करेंगे। बच्चों को साफ-सफाई, साबुन से हाथ धोने और बीमारियों के लक्षणों के बारे में नियमित रूप से बताया जाएगा।\r\n \r\n
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'टीबी मुक्त भारत 2025' और धामपुर की भूमिका (Vision 2025)
\r\n\r\nभारत ने दुनिया के लक्ष्य (2030) से 5 साल पहले, यानी 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। धामपुर BRC की यह बैठक उसी राष्ट्रीय विजन का एक हिस्सा है।
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जब एक स्कूल का बच्चा अपने घर जाकर अपने माता-पिता को टीबी के लक्षणों या जलभराव के नुकसान के बारे में बताता है, तो इसका असर सीधे समाज की मानसिकता पर पड़ता है। शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के इस 'क्रॉस-सेक्टोरल कोलाबरेशन' (Cross-sectoral collaboration) की स्थानीय प्रशासन द्वारा भी भारी प्रशंसा की जा रही है।
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एक स्वस्थ समाज की ओर कदम
\r\n\r\nधामपुर के ब्लॉक संसाधन केंद्र पर विश्व क्षय रोग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह बैठक केवल एक रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि यह बीमारियों के खिलाफ एक जंग का ऐलान था। इस बैठक ने साबित कर दिया है कि जब शिक्षक (गुरु) ठान लेता है, तो समाज की कोई भी अज्ञानता या बीमारी टिक नहीं सकती।
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मुख्य संदेश:
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- \r\n टीबी लाइलाज नहीं है, इसका पक्का इलाज है। (हां! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं)।\r\n \r\n
- \r\n मच्छरदानी और पूरे कपड़ों का इस्तेमाल करें।\r\n \r\n
- \r\n स्कूल और घर के आसपास पानी न जमा होने दें।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।\r\n \r\n
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धामपुर के शिक्षकों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। अब जिम्मेदारी अभिभावकों और आम नागरिकों की है कि वे स्कूलों द्वारा चलाए जा रहे इस स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में अपना पूर्ण सहयोग दें, ताकि हमारा शहर, हमारा राज्य और हमारा देश बीमारियों से मुक्त होकर एक स्वर्णिम भविष्य की ओर बढ़ सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.