उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले के प्रमुख नगर धामपुर (Dhampur) में स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान 'सरस्वती शिशु मंदिर' (Saraswati Shishu Mandir) में शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को आधुनिक भारत के निर्माता और 'लौह पुरुष' भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नौनिहालों और युवा पीढ़ी को देश की एकता और अखंडता के सबसे बड़े प्रतीक सरदार पटेल के जीवन आदर्शों से अवगत कराना था।
मां शारदा की वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
विद्यालय में आयोजित इस भव्य जयंती कार्यक्रम (Rashtriya Ekta Diwas) का शुभारंभ विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती (मां शारदा) की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य, वरिष्ठ आचार्यों और छात्र-छात्राओं ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर और पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरा विद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और भारत माता की जय के जयघोष से गूंज उठा।
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565 रियासतों का विलय कर भारत को किया था एक: आचार्य कुंवरपाल सिंह
श्रद्धांजलि सभा के बाद बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य कुंवरपाल सिंह ने सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व और ऐतिहासिक कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत के इस महान सपूत का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात प्रांत के नाडियाड (Nadiad, Gujarat) में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।
आचार्य कुंवरपाल सिंह ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि सरदार पटेल एक अत्यंत कुशल स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighter) और बैरिस्टर (वकील) थे। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिलने के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती छोटी-बड़ी रियासतों को एक साथ लाने की थी। सरदार पटेल ने अपनी अद्भुत राजनीतिक सूझबूझ, कूटनीति और फौलादी इरादों के बल पर देश की 565 से अधिक बिखरी हुई देसी रियासतों का शांतिपूर्ण विलयीकरण (Integration of Princely States) कर एक अखंड और विशाल भारतीय संघ का निर्माण किया।
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उन्होंने बच्चों को समझाया कि सरदार पटेल की इसी अभूतपूर्व दृढ़ इच्छाशक्ति (Strong Willpower) और कभी न झुकने वाले संकल्प के कारण ही पूरा देश उन्हें सम्मान से 'लौह पुरुष' (Iron Man of India) के नाम से जानता है।
महापुरुषों के जीवन से लें प्रेरणा: प्रधानाचार्य अमरपाल सिंह
कार्यक्रम के अगले चरण में सरस्वती शिशु मंदिर धामपुर के प्रधानाचार्य श्री अमरपाल सिंह ने वहां उपस्थित सभी 'शिशुओं' (छात्र-छात्राओं) को अपना विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल महापुरुषों की जयंती मना लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बताए गए रास्तों पर चलना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रधानाचार्य श्री अमरपाल सिंह ने जोर देते हुए कहा कि हम सभी को सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान महापुरुषों के जीवन, उनके संघर्षों और उनके त्याग से प्रेरणा (Inspiration) लेनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को समझाया कि विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जब चरित्र का निर्माण होता है। हमें इन महान विभूतियों के आदर्शों को अपनाकर अपने व्यक्तिगत जीवन और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए, ताकि हम एक मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें।
आचार्य बंधुओं और भगिनियों का रहा विशेष सहयोग
इस प्रेरणादायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त आचार्य बंधुओं और भगिनियों (शिक्षकों और शिक्षिकाओं) का पूर्ण और सक्रिय सहयोग रहा। शिक्षकों ने बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को बेहद सुचारू रूप से संभाला। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया। यह आयोजन शिशु मंदिर के छात्रों के मन में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की एक अमिट छाप छोड़कर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
Sabse pehle comment karne wale banein.