आधुनिक भारत के निर्माता, देश की 560 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोने वाले अद्वितीय रणनीतिकार और 'लौह पुरुष' (Iron Man of India) के नाम से विख्यात भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती पूरे देश में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' (Rashtriya Ekta Diwas) के रूप में मनाई जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जनपद में भी देशभक्ति और राष्ट्रीय अखंडता के संकल्प के साथ सरदार पटेल को याद किया गया।
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को बिजनौर कलेक्ट्रेट (Bijnor Collectorate) स्थित सभागार में एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने महान स्वतंत्रता सेनानी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶
पुष्पांजलि अर्पित कर लौह पुरुष को किया गया नमन
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। उपस्थित सभी वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने बारी-बारी से उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन (Floral Tribute) अर्पित किए। सभागार का माहौल पूरी तरह से राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जहां हर कोई आजाद भारत के इस महान शिल्पकार के योगदान को नमन कर रहा था।

'रियासतों के एकीकरण में पटेल का योगदान अविस्मरणीय'
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Movement) में उनके अहम योगदान को याद करते हुए कहा कि, अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिलने के बाद भारत छोटे-छोटे टुकड़ों और सैकड़ों देसी रियासतों (Princely States) में बंटा हुआ था। ऐसे नाजुक समय में सरदार पटेल ने ही अपनी राजनीतिक सूझबूझ, कूटनीति और फौलादी इरादों से उन सभी रियासतों का भारतीय संघ (Indian Union) में शांतिपूर्ण विलय कराया। उनके इसी भगीरथ प्रयास के कारण ही आज हम एक मजबूत, अखंड और विशाल भारत का स्वरूप देख पा रहे हैं।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›🏪 आपके शहर के ऑफर
आधुनिक भारत के नवनिर्माण में दूरदर्शी सोच
संबोधन के दौरान अधिकारियों ने कहा कि आजादी के बाद भारत के नवनिर्माण में सरदार पटेल की दूरदर्शी सोच, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण का विशेष योगदान रहा है। चाहे सिविल सेवाओं (Civil Services) का गठन हो या देश की आंतरिक सुरक्षा का ढांचा तैयार करना हो, पटेल के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श आज भी देश की एकता, अखंडता एवं राष्ट्र निर्माण के लिए हम सभी को प्रेरणा प्रदान करते हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने ली राष्ट्रीय एकता की शपथ
श्रद्धांजलि सभा और विचारों के आदान-प्रदान के बाद कार्यक्रम का सबसे अहम हिस्सा 'राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ' (Rashtriya Ekta Diwas Shapath) रहा। सभागार में मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने-अपने स्थानों पर खड़े होकर अपना दायां हाथ आगे किया और सत्यनिष्ठा के साथ यह शपथ ली:"मैं सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूं कि मैं राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूंगा और अपने देशवासियों के बीच यह संदेश फैलाने का भी भरसक प्रयत्न करूंगा। मैं यह शपथ अपने देश की एकता की भावना से ले रहा हूं जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यों द्वारा संभव बनाया जा सका।"
इस गरिमामय अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न प्रशासनिक विभागों के अधिकारी, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने एकजुट होकर देश की उन्नति में अपना योगदान देने का संकल्प दोहराया।
Sabse pehle comment karne wale banein.