मुजफ्फरनगर (Crime & Local Desk): उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर नकेल कसने और 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति के तमाम सरकारी दावों के बीच, धरातल पर कई बार ऐसी तस्वीरें सामने आ जाती हैं जो पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर देती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संवेदनशील जिले मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) के चरथावल थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक व्यापारी की दुकान पर लगे सुरक्षा कवच यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे को अज्ञात शरारती तत्वों या शातिर अपराधियों ने जानबूझकर तोड़ दिया है।READ ALSO:-'हेल्थ' के नाम पर आपकी सेहत से बड़ा खिलवाड़! FSSAI का चला डंडा, इमामी (Emami) समेत 8 नामी फूड कंपनियों को भेजा गया सख्त नोटिस
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यह घटना सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसी बड़ी और खौफनाक आपराधिक साजिश की बू आ रही है। सबसे ज्यादा चौंकाने और निराश करने वाली बात यह है कि पीड़ित द्वारा स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत दिए हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले में कोई भी ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है। पुलिस की इस सुस्ती और ढुलमुल रवैये ने न केवल पीड़ित परिवार को खौफ के साये में जीने को मजबूर कर दिया है, बल्कि पूरे इलाके के व्यापारियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
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क्या है पूरा घटनाक्रम? अंधेरे की आड़ में रची गई साजिश
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यह पूरा मामला मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम दुधली देवी (Village Dudhli Devi) का है। इसी गांव के रहने वाले प्रमोद कुमार गांव में ही अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए एक किराना एवं खाद-बीज की दुकान संचालित करते हैं। प्रमोद कुमार की यह दुकान गांव के मुख्य व्यावसायिक केंद्रों में से एक है, जहां किसानों और ग्रामीणों का दिन भर अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आना-जाना लगा रहता है। दुकान में अक्सर नकदी और कीमती सामान रखा रहता है।
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दुकान की सुरक्षा सुनिश्चित करने और रात के समय किसी भी प्रकार की चोरी, डकैती या अनहोनी से बचने के लिए प्रमोद कुमार ने अपने प्रतिष्ठान के बाहर और भीतर एक आधुनिक सीसीटीवी कैमरा सिस्टम लगवा रखा था। लेकिन, बीते दिनों किसी रात को अंधेरे और सन्नाटे का फायदा उठाते हुए कुछ अज्ञात बदमाशों ने इस कैमरे को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। सुबह जब प्रमोद कुमार अपनी दुकान खोलने पहुंचे, तो कैमरे की यह टूटी हुई हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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सामान्य शरारत नहीं, किसी बड़ी वारदात की 'रेकी' और फुलप्रूफ प्लानिंग!

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पीड़ित व्यापारी प्रमोद कुमार का स्पष्ट तौर पर मानना है कि यह घटना गांव के बच्चों की कोई सामान्य शरारत या मामूली तोड़फोड़ कतई नहीं है। अपराधियों की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) को देखते हुए यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
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अपराध जगत के जानकार और क्राइम एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अक्सर शातिर अपराधी किसी बड़ी वारदात (जैसे- लूट, डकैती, चोरी या जानलेवा हमला) को अंजाम देने से पहले इलाके की 'रेकी' (Reconnaissance) करते हैं। वारदात के दौरान उनकी पहचान उजागर न हो और पुलिस को उनके खिलाफ कोई पुख्ता डिजिटल सुराग (Digital Evidence) न मिल सके, इसके लिए सबसे पहले घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और लाइटों को ही निशाना बनाया जाता है। प्रमोद कुमार को दिन-रात यही डर सता रहा है कि बदमाशों ने उनका कैमरा इसलिए तोड़ा है ताकि भविष्य में वे बेखौफ होकर उनके प्रतिष्ठान पर कोई बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम दे सकें और पीछे कोई भी रिकॉर्डिंग न बचे।
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पुलिस की चौखट पर न्याय की गुहार, लेकिन नतीजा सिफर

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घटना का पता चलते ही, डरे-सहमे प्रमोद कुमार ने बिना कोई समय गंवाए न्याय की उम्मीद में चरथावल थाने का रुख किया। उन्होंने थाना प्रभारी (SHO Charthawal) को इस पूरी घटना की विस्तार से लिखित शिकायत दी और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की मांग की।
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लेकिन विडंबना देखिए कि उत्तर प्रदेश पुलिस, जो अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने और त्वरित न्याय के लिए जानी जाती है, इस मामले में पूरी तरह से उदासीन नजर आ रही है। पीड़ित प्रमोद कुमार का सीधा आरोप है कि:
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    थाने में शिकायत दर्ज कराने के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई सक्रियता या गंभीरता नहीं दिखाई है।
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    न तो पुलिस की कोई जांच टीम मौके पर गहराई से मुआयना करने पहुंची है, न ही गांव के संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई है।
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    पुलिस के इस लचर रवैये से अपराधियों के हौसले पूरी तरह से बुलंद हो गए हैं। उन्हें लगने लगा है कि वे सरेआम कुछ भी कर लें, पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाएगी।
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परिवार में खौफ और रातों की उड़ी नींद

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पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कदम न उठाए जाने के कारण प्रमोद कुमार और उनका पूरा परिवार खुद को बेहद असुरक्षित (Unsafe) महसूस कर रहा है। दिन भर दुकान पर काम करते समय और रात को सोते वक्त, उन्हें हर आहट पर यह खौफ सताता रहता है कि कहीं आज रात बदमाश उनकी दुकान का ताला न चटका दें या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना न घट जाए।
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आज के डिजिटल युग में एक आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च करके खुद की और समाज की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगवाता है। जब वही कैमरा सुरक्षित नहीं है और शिकायत करने पर पुलिस भी कोई मदद नहीं कर रही है, तो आम व्यापारी आखिर अपनी सुरक्षा की गुहार लेकर किसके पास जाए? यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है।
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ग्रामीणों और क्षेत्रीय व्यापारियों में पनप रहा भारी रोष

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यह घटना केवल प्रमोद कुमार की दुकान या उनके परिवार तक सीमित नहीं रह गई है। ग्राम दुधली देवी और आसपास के क्षेत्र के अन्य दुकानदारों में भी इस घटना के बाद से काफी रोष और डर पनप रहा है। क्षेत्रीय लोगों में चर्चा का बाजार गर्म है कि यदि समय रहते इन शरारती तत्वों या शातिरों की पहचान कर उन पर कानूनी चाबुक नहीं चलाया गया, तो ऐसी घटनाओं को और भी ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।
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लोगों का कहना है कि पुलिस को अक्सर जो घटनाएं छोटी लगती हैं, वही आगे चलकर किसी बड़े अपराध की नींव रखती हैं। यदि आज पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कैमरा तोड़ने वालों को गिरफ्तार नहीं किया, तो कल को यही बेखौफ अपराधी गांव में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाएंगे।
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क्या कुंभकर्णी नींद से जागेगा पुलिस प्रशासन?

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अब सवाल यह उठता है कि क्या चरथावल थाना पुलिस किसी बड़ी घटना के घटित होने का इंतजार कर रही है? प्रमोद कुमार ने मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और उच्चाधिकारियों से एक बार फिर हाथ जोड़कर अपील की है कि उनके मामले का संज्ञान लिया जाए और इसकी निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराई जाए।
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पीड़ित की मुख्य मांगें:

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    कैमरा तोड़ने वाले दोषियों की जल्द से जल्द शिनाख्त कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
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    उनके प्रतिष्ठान और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
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    इलाके में रात के समय पुलिस गश्त (Night Patrolling) को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जाए।
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मुजफ्फरनगर जैसे जिले में, जहां अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था हमेशा से एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रहे हैं, पुलिस को नागरिकों की हर छोटी-बड़ी शिकायत को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। पीड़ित व्यापारी प्रमोद कुमार की यह चिंता बिल्कुल जायज है और इसे नजरअंदाज करना किसी बड़ी चूक का कारण बन सकता है। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि मीडिया में मामला उछलने और पीड़ित की लगातार गुहार के बाद मुजफ्फरनगर का पुलिस महकमा कब अपनी नींद से जागता है और इन अज्ञात शातिरों को सलाखों के पीछे भेजकर इलाके के लोगों में सुरक्षा का विश्वास दोबारा कायम करता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ही इस खौफ को खत्म कर सकती है।
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