Meerut News: मेरठ में नादिर अली एंड कंपनी के कार्यालय में घुसकर रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। सेल्स मैनेजर प्रदीप जोशी की तहरीर पर देहली गेट थाना पुलिस ने पांच नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के साथ अभद्रता की और वक्फ संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर कथित तौर पर गाली-गलौज की गई और एक महीने के भीतर संपत्ति से कब्जा छोड़ने की चेतावनी दी गई। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है और कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी जांच का हिस्सा है।

4 सितंबर को कार्यालय में पहुंचने का आरोप

सेल्स मैनेजर प्रदीप जोशी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 4 सितंबर 2026 को दोपहर करीब दो बजे अमजद अली अपने साथियों फजलू, इमरान, यूसुफ पहलवान और राजा उर्फ बादशाह के साथ कार्यालय में पहुंचे। शिकायत के मुताबिक, पांचों ने कार्यालय में मौजूद कारिंदा मुतवल्ली फाइज आफताब और अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

आरोप है कि इस दौरान कार्यालय में विवाद की स्थिति बन गई और वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह विवाद वक्फ संपत्ति को लेकर चल रहे मतभेद से जुड़ा हुआ है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

वक्फ संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बनाने का आरोप

प्रदीप जोशी की तहरीर के अनुसार, आरोपियों ने वक्फ संपत्ति को अपने नाम कराने का दबाव बनाया। शिकायत में कहा गया है कि जब कार्यालय पक्ष ने उनकी मांग नहीं मानी तो कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर गाली-गलौज की गई और एक महीने के भीतर संपत्ति से कब्जा छोड़ने की चेतावनी दी गई। इस पूरे मामले में संपत्ति के स्वामित्व, वक्फ से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के दावों की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

सूचना देने पर पुलिस पहुंची, CCTV फुटेज सौंपी

शिकायत के मुताबिक, कार्यालय में मौजूद सहयोगी नूर आलम ने घटना की सूचना पुलिस को दी। आरोप है कि पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद आरोपी धमकी देते हुए वहां से चले गए।

पीड़ित पक्ष ने कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी पुलिस को सौंपी है। शिकायतकर्ता के अनुसार, फुटेज में कई लोग कार्यालय में आते-जाते और विवाद करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इस फुटेज की जांच कर रही है, ताकि घटना के क्रम और उसमें शामिल लोगों के बारे में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जानकारी जुटाई जा सके।

पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया है कि आरोपियों के खिलाफ पहले से मुकदमे दर्ज हैं और उन पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति पर कब्जे की कोशिश करने के आरोप भी हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इन्हें शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

देहली गेट पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

देहली गेट थाना प्रभारी अतुल कुमार ने बताया कि तहरीर के आधार पर पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, पुलिस की जांच में शिकायत, CCTV फुटेज और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका अहम रहेगी। मुकदमा दर्ज होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के संबंध में कौन-से आरोप साक्ष्यों से पुष्ट होते हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन