मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। Meerut Uldepur Demolition को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश का अनुपालन करते हुए, प्राधिकरण बहुत जल्द उल्देपुर क्षेत्र में चिह्नित की गई अवैध कॉलोनियों और बिना नक्शे के बने मकानों पर बुलडोजर चलाने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मेडा ने न्यायिक आयोग के गठन हेतु 35 लाख रुपये की धनराशि भी जमा कर दी है।

​तैयार हुई लिस्ट, पुलिस फोर्स का इंतजार

अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण अभियान के लिए एक विस्तृत सूची (लिस्ट) तैयार कर ली है। इसमें उन सभी इमारतों और कॉलोनियों को शामिल किया गया है जो मानकों के विपरीत बनी हैं। कार्रवाई के लिए आवश्यक भारी मशीनरी, बुलडोजर और कर्मचारियों की टीम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वर्तमान में पुलिस प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं ताकि अभियान के लिए पर्याप्त पुलिस बल मिल सके।

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​विरोध से निपटने की खास रणनीति

उल्देपुर क्षेत्र में पहले भी जब प्राधिकरण की टीम कार्रवाई के लिए गई थी, तब स्थानीय लोगों ने भारी विरोध और धरना-प्रदर्शन किया था। इसी वजह से इस बार मेडा कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। चर्चा है कि जैसे ही न्यायिक आयोग की विशेष टीम उल्देपुर पहुंचेगी, उसी की सीधी निगरानी में यह महाअभियान शुरू किया जाएगा, ताकि कोई भी स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।

​मेडा उपाध्यक्ष का आधिकारिक बयान

मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय कुमार मीणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश थे कि न्यायिक आयोग के गठन के लिए पहले चरण में 35 लाख रुपये की व्यवस्था की जाए। प्राधिकरण ने तय समय के भीतर यह राशि जमा कर दी है। उन्होंने कहा कि अब आगे की जो भी कार्रवाई होगी, वह न्यायिक आयोग के सदस्यों और स्थानीय पुलिस-प्रशासन के आपसी समन्वय के आधार पर ही सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद से इलाके में अवैध निर्माणकर्ताओं के बीच काफी हलचल है।

​जोन-ए के 16,726 घरों का री-सर्वे शुरू

उल्देपुर के अलावा, शहर के पुराने इलाके जोन-ए में भी मेडा ने एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। यहां कुल 16,726 भवनों का दोबारा से सर्वे (री-सर्वे) किया जा रहा है। प्राधिकरण की टीम यह जांच कर रही है कि इन भवनों का निर्माण कब हुआ था। मुख्य रूप से यह देखा जा रहा है कि संबंधित इमारत मेडा की स्थापना से पहले बनी थी या उसके बाद।

​सत्यापन के लिए मांगे जा रहे पुराने दस्तावेज

इस सत्यापन प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने के लिए भवन स्वामियों से पुराने हाउस टैक्स रिकॉर्ड, जमीन का बैनामा और अन्य मालिकाना हक के प्रमाण मांगे गए हैं। मेडा अधिकारियों का अनुमान है कि जोन-ए में शामिल 80 फीसदी से ज्यादा मकान वर्ष 1975 या उससे भी पुराने हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय दस्तावेजों की पूरी जांच होने के बाद ही लिया जाएगा। कुल मिलाकर, मेडा अब सीधे कार्रवाई करने से पहले रिकॉर्ड को पूरी तरह पुख्ता कर रहा है।

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