उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) शहर के निवासियों के लिए यातायात और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर दो बड़ी राहत की खबरें हैं। शहर को लंबे समय से चली आ रही भीषण जाम (Traffic Jam) की समस्या से मुक्ति दिलाने के प्रयास अब जमीनी स्तर पर तेज हो गए हैं। दिल्ली रोड स्थित रोडवेज के प्रमुख भैंसाली बस स्टैंड (Bhaisali Bus Stand) को अब पूरी तरह से शहर के बाहर भूड़बराल और मोदीपुरम में स्थानांतरित (Shift) किया जाना है।
जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचा दी है। वहीं, त्योहारी सीजन में जाम से फौरी राहत देने के लिए स्थानीय प्रशासन ने ई-रिक्शा (E-Rickshaw) के प्रवेश पर भी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶दीपावली तक कबाड़ी बाजार से घंटाघर तक ई-रिक्शा बैन
त्योहारी सीजन में बाजारों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और जाम को देखते हुए यातायात पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। आज से लेकर दीपावली (Diwali) तक मेरठ शहर के कबाड़ी बाजार, प्याऊ चौराहे से लेकर घंटाघर तक के व्यस्त मार्ग पर ई-रिक्शा का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहेगा। इस रूट को जाम मुक्त रखने के लिए यह फौरी व्यवस्था लागू की गई है ताकि आम जनता आसानी से अपनी त्योहारी खरीदारी कर सके।
मोदीपुरम बस अड्डे की भूमि के अवार्ड तैयार, 44 करोड़ की मांग
जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भैंसाली बस स्टैंड को दो हिस्सों में बांटकर शहर के दोनों छोर (उत्तरी और दक्षिणी) पर भेजा जा रहा है। मोदीपुरम (Modipuram) में नए बस अड्डे के निर्माण के लिए 11,848 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन सिवाया, पल्हैड़ा और दुल्हैड़ा गांवों से ली गई है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›अधिकारियों के अनुसार, यहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है और भूमि मालिकों के अवार्ड भी तैयार कर लिए गए हैं। अब जमीन मालिकों को केवल मुआवजा राशि (Compensation) का वितरण किया जाना बाकी है। इसके लिए जिला प्रशासन ने एनसीआरटीसी (NCRTC) से 44 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी आगामी दो से तीन दिनों में यह पैसा उपलब्ध कराने का वादा कर रही है। मोदीपुरम में छोटे-छोटे भूखंड होने के कारण लगभग 100 किसान परिवारों को यह मुआवजा दिया जाएगा। पैसा वितरित होते ही यह भूमि एनसीआरटीसी के नाम दर्ज कर दी जाएगी, और दीपावली तक जमीन एजेंसी को सौंपने की पूरी संभावना है।
भूड़बराल की जमीन हो चुकी है NCRTC के नाम
भूड़बराल (Bhudbaral) बस अड्डे के लिए जमीन का अधिग्रहण कर जिला प्रशासन ने उसे पहले ही एनसीआरटीसी को सौंप दिया है।
भूड़बराल में दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (Namo Bharat) के शताब्दीनगर स्टेशन से सटी 28,507 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया है।
इस जमीन का खसरा-खतौनी में एनसीआरटीसी के नाम दर्ज भी किया जा चुका है।
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इन दोनों नए बस अड्डों के लिए कुल मिलाकर भूड़बराल, पल्हैड़ा, दुल्हेड़ा और सिवाया गांवों की लगभग 40 हजार वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहित की गई है।
एक सप्ताह में होगा मुआवजा वितरण: एडीएम
एडीएम (भूमि अध्याप्ति) नवीन चंद्र ने बताया कि भूड़बराल के बाद अब मोदीपुरम बस अड्डे की जमीन भी जल्द ही एनसीआरटीसी को उपलब्ध कराने की तैयारी है। उन्होंने कहा, "एनसीआरटीसी मुआवजे के लिए 44 करोड़ रुपये आगामी दो से तीन दिन में उपलब्ध कराने का वादा कर रहा है। पैसा आते ही एक सप्ताह से भी कम समय में किसानों को मुआवजा वितरण कराकर जमीन पर कब्जा ले लिया जाएगा।"
2027 तक बनकर तैयार होगा भूड़बराल बस अड्डा
एनसीआरटीसी के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) पुनीत वत्स ने बताया कि भूड़बराल और मोदीपुरम दोनों नए बस अड्डों के भवन निर्माण के लिए एनसीआरटीसी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
भूड़बराल बस अड्डे का अत्याधुनिक भवन बनाकर तैयार करने के लिए नवंबर 2027 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वहीं, मोदीपुरम बस अड्डे की जमीन मिलते ही उसके भवन निर्माण की समय सीमा (Deadline) भी निर्धारित कर दी जाएगी। एनसीआरटीसी दोनों स्थानों पर नए बस अड्डों का निर्माण कराकर उसे परिवहन निगम (रोडवेज) को सौंपेगा।
शहर में नहीं घुसेंगी 400 बसें, मिलेगी स्थायी निजात
वर्तमान में दिल्ली रोड स्थित भैंसाली बस अड्डे में रोजाना 400 से ज्यादा बसें विभिन्न राज्यों और जनपदों से आती-जाती हैं। दिल्ली रोड शहर का मुख्य मार्ग होने के कारण इन भारी बसों की आवाजाही से दिन भर भयंकर जाम लगता है।
इन दोनों नए बस अड्डों के शुरू होने से इन 400 बसों का शहर में प्रवेश पूरी तरह बंद हो जाएगा। दिल्ली, गाजियाबाद जाने वाली बसें भूड़बराल से और मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, देहरादून जाने वाली बसें मोदीपुरम से ही संचालित होंगी, जिससे मेरठवासियों को जाम से स्थायी निजात मिलेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.