नई दिल्ली (IMD Weather Updates): चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से झुलस रहे भारतवासियों की निगाहें इन दिनों आसमान और मौसम विभाग (IMD) के बुलेटिन पर टिकी हुई हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर मानसून (Southwest Monsoon) कब दस्तक देगा और इस साल बारिश का मिजाज कैसा रहेगा?READ ALSO:-सूर्या हत्याकांड महा-अपडेट: एनकाउंटर के बाद अब असद के घर पर चलेगा 'योगी का बुलडोजर', संगीत सोम की जिहादियों को खुली चेतावनी- "फन ठीक से दबा दिया जाएगा"
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में मानसून की चाल, प्री-मानसून बारिश (Pre-monsoon Showers) और देशभर के मौसमी बदलावों को लेकर एक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। एक ओर जहाँ उत्तर भारत और मध्य भारत के कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश ने पारे को नीचे ला दिया है, वहीं मुख्य मानसून की चाल दक्षिणी तटों पर थोड़ी सुस्त पड़ गई है। आइए, मौसम के इस बदलते मिजाज और अगले कुछ महीनों के विस्तृत अनुमान को गहराई से समझते हैं।
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1. केरल में मानसून की दस्तक: क्यों हुई देरी और अब कब पहुंचेगा?
\r\n\r\nभारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक शुरुआत केरल तट से मानी जाती है। किसानों से लेकर आम जनता तक, सभी के लिए यह एक बहुत बड़ा इवेंट होता है।
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- \r\n सामान्य तारीख और वर्तमान स्थिति: आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल के तटों से टकराता है। लेकिन इस साल 2026 में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के महानिदेशक के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों (यानी जून के पहले सप्ताह) में मानसून के केरल पहुंचने की प्रबल संभावना बन रही है।\r\n \r\n
- \r\n अनुकूल मौसमी परिस्थितियां: देरी के बावजूद राहत की बात यह है कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए रास्ता पूरी तरह से साफ है। IMD के बुलेटिन के अनुसार, अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के कई इलाकों में मौसमी परिस्थितियां मानसून के अनुकूल बनी हुई हैं।\r\n \r\n
- \r\n क्यों फेल हुआ पुराना अनुमान? इससे पहले मौसम विभाग ने अपनी सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर 26 मई को ही मानसून के केरल पहुंचने का अनुमान लगाया था। लेकिन समुद्री हवाओं के पैटर्न में हुए अचानक बदलाव और चक्रवाती विक्षोभों के कारण इसकी रफ्तार बीच में ही धीमी पड़ गई।\r\n \r\n
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2. हीटवेव से राहत: 27 राज्यों में प्री-मानसून आंधी और बारिश का अलर्ट
\r\n\r\nभले ही मुख्य मानसून में देरी हो, लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों ने तबाही और राहत दोनों एक साथ दी है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक हीटवेव (लू) का प्रभाव अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। मौसम विभाग ने देश के 27 राज्यों में हल्की से लेकर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
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यहाँ जानिए विभिन्न राज्यों का ताजा हाल:
\r\n\r\n| \r\n राज्य का नाम \r\n | \r\n \r\n मौसम की वर्तमान स्थिति और अलर्ट \r\n | \r\n
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| \r\n उत्तर प्रदेश (UP) \r\n | \r\n \r\n यूपी में मौसम ने करवट ली है। झांसी और ललितपुर में तेज झमाझम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने राज्य के 63 जिलों में तेज आंधी, वज्रपात (बिजली गिरने) और हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। \r\n | \r\n
| \r\n राजस्थान \r\n | \r\n \r\n रेगिस्तानी राज्य में मौसम का रौद्र रूप दिखा है। सोमवार को अजमेर, नागौर और चित्तौड़गढ़ में अचानक तेज ओलावृष्टि (Hailstorm) हुई, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है। \r\n | \r\n
| \r\n मध्य प्रदेश (MP) \r\n | \r\n \r\n राज्य के 4 प्रमुख जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर जारी है। भोपाल और आस-पास के इलाकों में घने बादल छाए हुए हैं। \r\n | \r\n
| \r\n बिहार \r\n | \r\n \r\n उमस भरी गर्मी से जूझ रहे बिहार के सासाराम और उसके आस-पास के इलाकों में दोपहर बाद राहत की बारिश हुई। \r\n | \r\n
| \r\n अन्य 27 राज्य \r\n | \r\n \r\n झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली-एनसीआर समेत देश के 27 राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। \r\n | \r\n
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(चेतावनी: मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि आंधी और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और जर्जर मकानों के पास खड़े होने से बचें।)
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3. इस साल कैसी रहेगी बारिश? (LPA और 90% का गणित)
\r\n\r\nदेश की लगभग आधी से ज्यादा कृषि भूमि सिंचाई के लिए सीधे तौर पर मानसून पर निर्भर करती है। ऐसे में बारिश का पूर्वानुमान अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है।
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- \r\n सामान्य से कम बारिश: मौसम विभाग ने अपने नए अपडेट में चिंताजनक बात कही है। इस साल पूरे मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान देशभर में 'सामान्य से कम' बारिश होने की संभावना है।\r\n \r\n
- \r\n LPA (लॉन्ग पीरियड एवरेज) का 90%: IMD के अनुसार, इस साल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 90% ही रहने का अनुमान है।\r\n \r\n
- \r\n क्या होता है LPA? लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का मतलब किसी क्षेत्र में पिछले 30 से 50 सालों के दौरान हुई औसत बारिश से होता है। भारत में वर्ष 1971 से लेकर 2020 के मौसमी आंकड़ों के आधार पर मानसून की औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। मौसम विज्ञान के नियमों के अनुसार, अगर किसी साल देश में बारिश LPA के 90% से कम रहती है, तो उसे 'सामान्य से कम' (Below Normal) बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। इसका सीधा असर धान, सोयाबीन और मक्का जैसी खरीफ की फसलों पर पड़ सकता है।\r\n \r\n
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4. कम बारिश का विलेन कौन? समझें 'अल नीनो' (El Nino) का खौफनाक प्रभाव
\r\n\r\nभारत में मानसून के कमजोर पड़ने और बारिश के आंकड़ों में इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण 'अल नीनो' (El Nino) को माना जा रहा है।
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अल नीनो क्या है? अल नीनो एक जटिल मौसमीय और समुद्री स्थिति है। इसके दौरान प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) की सतह का पानी अपने सामान्य तापमान से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है। जब प्रशांत महासागर का पानी गर्म होता है, तो हवाओं के चलने की दिशा और दबाव में भारी बदलाव आता है। यह बदलाव भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाओं (Trade Winds) की नमी और ताकत को सोख लेता है, जिसके परिणामस्वरूप भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है और बारिश कम होती है।
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वर्तमान में अल नीनो की स्थिति:
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- \r\n IMD के वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में स्थिति धीरे-धीरे अल नीनो की ओर बढ़ रही है।\r\n \r\n
- \r\n राहत की बात यह है कि शुरुआती मानसूनी महीने यानी जून में अल नीनो का प्रभाव थोड़ा कमजोर रह सकता है, जिससे शुरुआती बुवाई के लिए अच्छी बारिश हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n हालांकि, जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, अगस्त और सितंबर के महीने तक यह अल नीनो मध्यम या बहुत मजबूत रूप ले सकता है, जिससे मानसून के आखिरी दौर में देश को सूखे का सामना करना पड़ सकता है।\r\n \r\n
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मौसम विभाग का यह ताजा बुलेटिन स्पष्ट करता है कि भले ही तत्काल रूप से हीटवेव से राहत मिल गई हो, लेकिन 2026 का मानसूनी सीजन भारत के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। राज्य सरकारों और किसानों को अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश की संभावनाओं को देखते हुए अपनी कृषि योजनाओं और जल संरक्षण नीतियों में अभी से आवश्यक बदलाव करने की आवश्यकता है।

Sabse pehle comment karne wale banein.