गाजियाबाद (Ghaziabad News): उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद महानगर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। बुधवार की सुबह जब बच्चे अपने स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी रिहायशी इलाके गोविंदपुरम (Govindpuram) स्थित ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल में एक खूंखार तेंदुआ घुस आया। गाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ देखे जाने की खबर से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। आनन-फानन में स्कूल प्रशासन ने छुट्टी घोषित कर दी और 100 से ज्यादा छात्रों की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।READ ALSO:-मेरठ में दिनदहाड़े 'रक्तचरित्र': बीच बाजार युवक की कनपटी पर सटाकर मारी गोली, कातिल बोला- 'है कोई माई का लाल जो इसे बचा ले...'
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गनीमत यह रही कि घटना सुबह सवेरे की थी और बच्चे कक्षाओं में मौजूद नहीं थे। वन विभाग, स्थानीय पुलिस और मेरठ से आई विशेष रेस्क्यू टीम ने मिलकर करीब 7 घंटे तक एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कड़ी मशक्कत और कई असफल प्रयासों के बाद आखिरकार तेंदुए को ट्रेंकुलाइजर गन (Tranquilizer Gun) से बेहोश कर पिंजरे में कैद कर लिया गया। आइए, इस विस्तृत और एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट में जानते हैं कि इस 7 घंटे के खौफनाक ड्रामे के दौरान स्कूल के अंदर और बाहर क्या-क्या हुआ।
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सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर: सुबह 5 बजे से ही घूम रहा था तेंदुआ
\r\n\r\nगोविंदपुरम का इलाका सुबह की शांति में डूबा हुआ था। स्कूल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने पर पता चला कि तेंदुआ बुधवार सुबह करीब 5 बजे से ही स्कूल के आसपास की सड़कों पर बेखौफ टहल रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@khabreelal_news गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल में तेंदुआ घुसने से भारी हड़कंप। 100 छात्रों की परीक्षा रद्द। 7 घंटे के खौफनाक ड्रामे के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ा। pic.twitter.com/NB4PUTzW29
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) February 25, 2026
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पहली नजर में तेंदुआ (6:45 AM): सुबह 6:45 बजे स्कूल के कैमरों में एक दिल दहला देने वाला दृश्य रिकॉर्ड हुआ। सीसीटीवी में स्पष्ट दिखाई दिया कि तेंदुआ स्कूल परिसर के अंदर बने पार्क में बड़े आराम से चहलकदमी कर रहा है। पार्क में कुछ देर टहलने के बाद वह एक क्लासरूम/ऑफिस के अंदर चला गया।
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सिक्योरिटी इंचार्ज और नाइट गार्ड के उड़े होश: इस खौफनाक सच का खुलासा तब हुआ जब ड्यूटी पर आते वक्त स्कूल के सिक्योरिटी इंचार्ज ने रूटीन चेक के दौरान अपने मोबाइल पर सीसीटीवी (CCTV) लाइव फीड चेक की। फुटेज देखते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत बिना एक पल गंवाए यह वीडियो स्कूल प्रबंधन और वन विभाग (Forest Department) को भेज दिया।
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वहीं, स्कूल के मालिक पृथ्वी सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे जब स्कूल का नाइट गार्ड बाथरूम जाने के लिए उठा, तो उसकी सांसें अटक गईं। उसने देखा कि एक विशालकाय तेंदुआ बिल्कुल उनके ऑफिस के बाहर बैठा हुआ है। गार्ड ने अपनी जान बचाते हुए तुरंत प्रिंसिपल और एडमिनिस्ट्रेशन को इस खतरे से सूचित किया।
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100 बच्चों की परीक्षा रद्द, अभिभावकों को भेजा गया इमरजेंसी मैसेज
\r\n\r\nचूंकि बुधवार को ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल (CBSE Board) में 11वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं होनी थीं, इसलिए स्कूल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को स्कूल आने से रोकना था। गाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ घुसने की पुष्टि होते ही स्कूल में तत्काल प्रभाव से 'इमरजेंसी हॉलिडे' (आपातकालीन छुट्टी) घोषित कर दी गई।
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प्रशासन का त्वरित एक्शन:
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- \r\n स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन ने तुरंत सभी छात्रों के परिजनों को व्हाट्सएप और SMS के जरिए मैसेज भेजा: "सुरक्षा कारणों से आज स्कूल बंद रहेगा, कृपया अपने बच्चों को स्कूल न भेजें।"\r\n \r\n
- \r\n 11वीं कक्षा के 100 से ज्यादा बच्चों की आज होने वाली परीक्षा को तुरंत प्रभाव से कैंसिल (Cancel) कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n जो बच्चे रास्ते में थे या स्कूल के गेट तक पहुंच चुके थे, उन्हें गेट से ही सुरक्षित उनके घरों की ओर वापस लौटा दिया गया।\r\n \r\n
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छात्रों ने साझा किया अपना डर:
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- \r\n वरदान यादव (11वीं के छात्र) का बयान: "मैं जैसे ही स्कूल के गेट पर पहुंचा, मुझे अंदर तेंदुए के होने की सूचना मिली। सब तरफ अफरा-तफरी मची थी। इसके बाद स्कूल में छुट्टी घोषित कर दी गई। आज मेरा 11वीं का बेहद महत्वपूर्ण पेपर था, लेकिन जान से बढ़कर कुछ नहीं।"\r\n \r\n
- \r\n आनंद चौधरी (11वीं के छात्र) का बयान: "मैं घर से पूरी तैयारी के साथ पेपर देने स्कूल निकल रहा था। आधे रास्ते में ही मुझे दोस्तों से पता चला कि छुट्टी घोषित हो गई है। जब मैं स्कूल के पास पहुंचा तो देखा कि पुलिस लगी है और तेंदुआ अंदर घुसा हुआ है। यह बहुत ही डरावना अनुभव था।"\r\n \r\n
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वन विभाग का 7 घंटे लंबा 'मिशन लेपर्ड' (Rescue Operation)
\r\n\r\nगाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ होने की खबर जैसे ही डीएफओ (Divisional Forest Officer) ईशा तिवारी को मिली, उन्होंने पूरे वन महकमे को अलर्ट कर दिया।
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सुबह 8:30 बजे पहुंची टीम: DFO ईशा तिवारी ने बताया, "सुबह करीब 8 बजे स्कूल प्रशासन ने मुझे वह सीसीटीवी वीडियो भेजा था, जिसमें तेंदुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा था। हमारी टीम तुरंत हरकत में आई और सुबह 8:30 बजे पूरे साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंच गई।" डीएफओ खुद वन विभाग की टीम के साथ स्कूल की दूसरी मंजिल (Second Floor) पर पहुंच गईं, ताकि सुरक्षित ऊंचाई से तेंदुए की सही लोकेशन को ट्रेस किया जा सके।
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मेरठ से बुलाई गई स्पेशल टीम: स्थिति की गंभीरता और तेंदुए की आक्रामकता को देखते हुए गाजियाबाद की टीम के अलावा 'मेरठ वन प्रभाग' (Meerut Forest Division) से भी एक विशेष रेस्क्यू टीम को आपातकालीन स्थिति में मौके पर बुलाया गया।
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रेस्क्यू के मुख्य चरण:
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- \r\n जाल बिछाना (Netting): वन विभाग की टीम और पुलिस ने मिलकर सबसे पहले स्कूल परिसर की पूरी बाहरी बाउंड्री पर मजबूत लोहे और नायलॉन का जाल (Net) लगा दिया। यह इसलिए किया गया ताकि रेस्क्यू के दौरान घबराकर तेंदुआ किसी भी हाल में स्कूल की दीवार फांदकर बाहर भीड़ पर हमला न कर दे।\r\n \r\n
- \r\n ड्रोन से निगरानी (Drone Surveillance): स्कूल का परिसर काफी बड़ा है और उसमें कई कमरे व छिपने की जगहें हैं। ऐसे में वन विभाग की टीम ने स्कूल के अंदर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे वाला ड्रोन (Drone) उड़ाकर तेंदुए की सटीक लोकेशन का पता लगाया।\r\n \r\n
- \r\n पिंजरे की तैनाती: वन विभाग की टीम एक बड़े लोहे के पिंजरे को स्कूल के अंदर ले गई, जिसमें मांस का टुकड़ा रखा गया था ताकि तेंदुए को आकर्षित किया जा सके।\r\n \r\n
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ट्रेंकुलाइजर गन से बेहोश करने की कोशिश: कई बार चूका निशाना
\r\n\r\nइस पूरे ऑपरेशन का सबसे मुश्किल हिस्सा तेंदुए को सुरक्षित रूप से बेहोश करना था। रेस्क्यू टीम के साथ आए विशेष स्नाइपर (Sniper) और वनकर्मियों ने ट्रेंकुलाइजर गन (Tranquilizer Gun - बेहोश करने वाली बंदूक) से तेंदुए पर निशाना साधने की कोशिश की।
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शुरुआती असफलता: चूंकि तेंदुआ ऑफिस/बाथरूम के संकरे इलाके में छिपा हुआ था और लगातार अपनी जगह बदल रहा था, इसलिए शुरुआत में ट्रेंकुलाइजर डार्ट (Dart) मिस हो गए। तेंदुए के आक्रामक होने के डर से टीम बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ रही थी। कई घंटों तक लुकाछिपी का खेल चलता रहा।
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7 घंटे बाद मिली सफलता: आखिरकार, दोपहर के समय, जब तेंदुआ एक जगह थोड़ा शांत बैठा, तब स्नाइपर ने सटीक निशाना लगाते हुए उसे ट्रेंकुलाइजर का इंजेक्शन लगा दिया। दवाई का असर होने में करीब 10 से 15 मिनट लगे। जब टीम पूरी तरह आश्वस्त हो गई कि तेंदुआ बेहोश हो चुका है, तब सावधानीपूर्वक उसे स्ट्रेचर पर डालकर पिंजरे (Cage) में कैद कर लिया गया। इस पूरे खौफनाक ड्रामे को खत्म होने में करीब 7 घंटे का लंबा वक्त लगा।
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पुलिस की मुस्तैदी: 50 जवान तैनात, बेकाबू भीड़ को खदेड़ा
\r\n\r\nगाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ घुसने की खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। देखते ही देखते ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल के बाहर हजारों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई अपने मोबाइल में वीडियो बनाने और तेंदुए की एक झलक पाने को बेताब था। इससे माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था।
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कविनगर पुलिस का एक्शन: कविनगर थाना पुलिस सूचना मिलते ही लाठी-डंडे, शील्ड और हेलमेट के साथ मौके पर पहुंच गई थी।
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- \r\n 50 पुलिसकर्मियों का पहरा: सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n बैरिकेडिंग और वन-वे: एसीपी (ACP) कवि नगर सूर्यबली मौर्य खुद मौके पर मौजूद थे। उन्होंने बताया, "हमने अलग-अलग कट पर बैरियर लगाकर मुख्य सड़क पर वन-वे (One-way) व्यवस्था लागू कर दी है, ताकि आम यातायात बाधित न हो। स्कूल वाली साइड किसी भी व्यक्ति या वाहन को प्रवेश की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जा रही है।"\r\n \r\n
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जब भीड़ ने तोड़ दी रस्सी: रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच एक ऐसा समय भी आया जब भीड़ बेकाबू होने लगी। उत्सुकता में लोग रस्सी और बैरियर तोड़ते हुए स्कूल के मेन गेट तक पहुंच गए। इससे रेस्क्यू टीम का काम बाधित होने लगा और बड़ा हादसा होने का खतरा पैदा हो गया। पुलिस ने स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लेने के लिए हल्की सख्ती बरती और बड़ी मशक्कत के बाद सभी को लाठियां फटकार कर गेट से काफी दूर खदेड़ दिया।
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सहारनपुर की शिवालिक पहाड़ियों में छोड़ा जाएगा तेंदुआ
\r\n\r\nअब सबसे बड़ा सवाल यह था कि इस विशालकाय वन्यजीव को कहां भेजा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिंजरे में कैद करने के बाद बेहोश तेंदुए का पहले पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) द्वारा मेडिकल चेकअप किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रेस्क्यू के दौरान उसे कोई चोट तो नहीं आई है।
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प्राथमिक उपचार और फिटनेस क्लीयरेंस के बाद, वन विभाग की एक विशेष टीम कड़ी सुरक्षा के बीच गाड़ी से तेंदुए को सहारनपुर (Saharanpur) लेकर जाएगी। वहां उसे मानव बस्ती से मीलों दूर, प्राकृतिक आवास यानी 'शिवालिक की पहाड़ियों' (Shivalik Forest Range) के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह वापस अपने प्राकृतिक वातावरण में जीवन जी सके।
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शहरीकरण और सिकुड़ते जंगल: आखिर शहर में क्यों आ रहे हैं तेंदुए?
\r\n\r\nगाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ घुसने की यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ के रिहायशी इलाकों (जैसे राजनगर एक्सटेंशन, कोर्ट परिसर आदि) में तेंदुए देखे जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे 3 मुख्य कारण हैं:
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- \r\n जंगलों का विनाश (Deforestation): तेजी से हो रहे शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कारण जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास छिनता जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n भोजन की तलाश (Search for Prey): जंगलों में शिकार की कमी के कारण तेंदुए अक्सर आवारा कुत्तों (Stray Dogs) और सूअरों का शिकार करने के लिए शहरों के बाहरी इलाकों और कूड़ाघरों के पास आ जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n कॉरिडोर का विखंडन: गाजियाबाद का यह इलाका गंगा कैनाल (Ganga Canal) और हिंडन नदी के बेल्ट से जुड़ा हुआ है। अक्सर जानवर रास्ता भटक कर गढ़मुक्तेश्वर या हस्तिनापुर सेंचुरी से होते हुए कैनाल के रास्ते शहर के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश कर जाते हैं।\r\n \r\n
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यह घटना हम इंसानों के लिए एक चेतावनी है कि हमें विकास के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण (Wildlife Conservation) पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।
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बुधवार, 25 फरवरी 2026 का दिन गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल के छात्रों और प्रशासन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। सुबह 6:45 बजे गाजियाबाद के स्कूल में तेंदुआ घुसने से पूरे इलाके की सांसें थम गईं। 11वीं के छात्रों की परीक्षा रद्द कर दी गई और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। डीएफओ ईशा तिवारी और एसीपी सूर्यबली मौर्य के नेतृत्व में वन विभाग और पुलिस ने बेहतरीन तालमेल का परिचय देते हुए भीड़ को नियंत्रित रखा। मेरठ से आई टीम ने 7 घंटे के मुश्किल ऑपरेशन के बाद आखिरकार ट्रेंकुलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में सुरक्षित कैद कर लिया। अब इस खूंखार मेहमान को सहारनपुर की शिवालिक पहाड़ियों में उसके असली घर वापस भेजा जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर समय रहते सतर्कता बरती जाए (जैसे सीसीटीवी चेक करना), तो किसी भी बड़ी अनहोनी को टाला जा सकता है।
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