मुंबई (News Desk): भारत युवाओं का देश है और इन युवाओं की आंखों में देश को विश्वगुरु बनाने के अनगिनत सपने पल रहे हैं। किसी भी युवा के सपनों को एक यथार्थ की जमीन और ऊंची उड़ान देने के लिए बेहतरीन शिक्षा और कौशल (Skill) का होना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है उसका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना। 'खाली पेट न होय भजन' की कहावत को चरितार्थ करते हुए, यह स्पष्ट है कि बिना उचित पोषण के कोई भी युवा अपनी पढ़ाई या तकनीकी प्रशिक्षण पर शत-प्रतिशत ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता।READ ALSO:-साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए संजीवनी: गृह मंत्रालय ने लॉन्च किया 'MRM पोर्टल', अब घर बैठे बैंक खाते में वापस आएगा लूटा हुआ पैसा!
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युवाओं के इसी दर्द और जरूरत को समझते हुए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बेहद शानदार और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत हुई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित 'अटल बिहारी वाजपेयी कौशल्य विकास केंद्र' (Atal Bihari Vajpayee Skill Development Centre) में प्रसिद्ध आभूषण ब्रांड मालाबार ग्रुप (Malabar Group) की महत्वाकांक्षी ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ (Hunger Free World) पहल का विधिवत शुभारंभ किया।
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क्या है 'हंगर फ्री वर्ल्ड' (Hunger Free World) पहल?

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'हंगर फ्री वर्ल्ड' मालाबार ग्रुप द्वारा संचालित एक ऐसा अनूठा और मानवीय अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा और कौशल प्राप्त करने की राह में 'भूख' कभी किसी विद्यार्थी के आड़े न आए।
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इस विशेष पहल के तहत, कांदिवली के 'अटल बिहारी वाजपेयी कौशल्य विकास केंद्र' में विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक कोर्सेज में अध्ययनरत 100 विद्यार्थियों को प्रतिदिन मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन (Nutritious Meals) उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र-छात्राएं अपनी आजीविका या दो वक्त की रोटी की चिंता छोड़कर, केवल और केवल अपने बेहतर स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और एक शानदार करियर निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का प्रेरणादायक संबोधन

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इस भव्य उद्घाटन समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और कॉर्पोरेट जगत के लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कौशल विकास (Skill Development) और पोषण के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "युवाओं को सशक्त बनाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें कल के सार्थक रोजगार (Meaningful Employment) के लिए तैयार करने में कौशल विकास की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। पोषण जैसी बुनियादी और आवश्यक सेवाओं के माध्यम से जब विद्यार्थियों का समर्थन किया जाता है, तो यह उन्हें अपनी सीखने की क्षमता (Learning Ability) और व्यक्तिगत विकास पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने में अभूतपूर्व सहायता प्रदान करता है।"
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मंत्री गोयल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 'स्किल इंडिया' (Skill India) का सपना तभी पूरी तरह से साकार होगा, जब हमारे युवा शारीरिक रूप से भी उतने ही मजबूत होंगे जितने वे मानसिक और तकनीकी रूप से हैं। उन्होंने मालाबार ग्रुप के इस सामाजिक सरोकार की जमकर सराहना की।
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सिर्फ भोजन नहीं, उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत नींव

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल एक समय का भोजन उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं है। भारत जैसे विकासशील देश में कुपोषण (Malnutrition) और शिक्षा के बीच ड्रॉपआउट (Drop-out) रेट का एक सीधा संबंध रहा है। कई बार युवा केवल इसलिए अपने ट्रेनिंग प्रोग्राम या पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें अपने पेट की आग बुझाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती है।
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'हंगर फ्री वर्ल्ड' जैसी योजनाएं ऐसे ही युवाओं को एक मजबूत संबल प्रदान करती हैं। जब एक विद्यार्थी को यह चिंता नहीं होती कि उसका अगला भोजन कहां से आएगा, तो उसकी उत्पादकता (Productivity) और रचनात्मकता (Creativity) अपने चरम पर होती है। यह पहल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का सही उपयोग करने की दिशा में एक मजबूत नींव रखने का प्रयास है।
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मालाबार ग्रुप का विशाल CSR विजन: 200 करोड़ रुपये का बजट

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मालाबार ग्रुप केवल एक व्यापारिक घराना नहीं है, बल्कि यह अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR - Corporate Social Responsibility) को लेकर भारत के अग्रणी संस्थानों में से एक माना जाता है। ग्रुप ने समाज को वापस लौटाने (Giving back to society) की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है।
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मालाबार ग्रुप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरे 200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम सीएसआर व्यय (CSR Expenditure) की घोषणा की है। यह विशाल धनराशि केवल किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक परिवर्तन को गति देने वाले कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खर्च की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    शिक्षा (Education): गरीब और मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
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    भूख उन्मूलन (Hunger Eradication): 'हंगर फ्री वर्ल्ड' जैसी पहलों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में मुफ्त भोजन का वितरण।
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    स्वास्थ्य (Health): जरूरतमंदों के लिए मुफ्त चिकित्सा शिविर, जीवन रक्षक दवाएं और अस्पताल निर्माण में सहयोग।
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    महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment): महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम।
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    पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection): वृक्षारोपण, जल संरक्षण और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाली सस्टेनेबल योजनाएं।
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चेयरमैन एम.पी. अहमद का विजन: कॉर्पोरेट और सरकार का महा-संगम

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इस अवसर पर मालाबार ग्रुप के सम्मानित चेयरमैन एम.पी. अहमद (M.P. Ahammed) ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि समाज का असली विकास तब होता है जब हर तबके को समान अवसर मिलते हैं।
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चेयरमैन एम.पी. अहमद ने कहा, "हमारा दृढ़ विश्वास है कि पोषण (Nutrition) और शिक्षा (Education) एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं। आप किसी भूखे व्यक्ति को बेहतर भविष्य का पाठ नहीं पढ़ा सकते। ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ अभियान के माध्यम से हम युवाओं को आत्मनिर्भरता और आर्थिक रूप से सशक्तिकरण (Economic Empowerment) की दिशा में आगे बढ़ाने का एक ईमानदार प्रयास कर रहे हैं।"
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उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, "आज का यह कार्यक्रम और पहल इस बात का सबसे ज्वलंत उदाहरण है कि जब सरकार की नीतियां और कॉर्पोरेट जगत का संसाधन व सामाजिक सरोकार एक साथ मिलते हैं (Government-Corporate Synergy), तो युवाओं के लिए अवसरों के नए और असीमित द्वार खुलते हैं। यह साझेदारी समाज के समग्र विकास (Overall Development) को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का काम करती है।"
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एक सशक्त और स्वस्थ 'न्यू इंडिया' की ओर कदम

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मुंबई के कांदिवली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी कौशल्य विकास केंद्र से उठी यह पहल एक स्पष्ट संदेश देती है—'कौशल के साथ पोषण'। यह इस बात का प्रमाण है कि जब उद्योगपति और सरकार हाथ मिलाते हैं, तो बदलाव जमीनी स्तर पर दिखाई देता है। 'हंगर फ्री वर्ल्ड' पहल सिर्फ 100 विद्यार्थियों की भूख नहीं मिटाएगी, बल्कि यह उन 100 परिवारों की गरीबी दूर करने का एक मजबूत हथियार बनेगी। जब ये युवा स्वस्थ होकर यहां से कौशल सीखकर निकलेंगे, तो वे देश की अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान देंगे। मालाबार ग्रुप की यह शानदार पहल अन्य कॉर्पोरेट घरानों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है कि वे आगे आएं और भारत के युवाओं को 'स्किल्ड' और 'हेल्दी' बनाने में अपना योगदान दें।
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