सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को भारत में उतारने को लेकर एलन मस्क और रिलायंस जियो के बीच तनातनी बढ़ गई है। मस्क ने आरोप लगाया कि एक परिवार अपने एकाधिकार की रक्षा के लिए स्टारलिंक की राह रोक रहा है। 

मस्क ने अपने बयान में सीधे तौर पर किसी कंपनी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था। उनका कहना है कि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को लेकर जो प्रक्रिया चल रही है, उससे स्टारलिंक को नुकसान हो रहा है। मस्क पहले भी भारत के सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

विवाद की जड़ भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के बंटवारे के तरीके को लेकर है। सवाल यह है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी से दिया जाए या प्रशासनिक आवंटन से। मस्क की कंपनी स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की पैरोकार रही है, जबकि जियो समेत कुछ टेलीकॉम कंपनियां नीलामी की मांग करती रही हैं।

जियो का तर्क रहा है कि अगर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम बिना नीलामी दिया जाता है तो इससे बाजार में गड़बड़ी पैदा हो सकती है और घरेलू टेलीकॉम कंपनियों के साथ भेदभाव जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं बिना नीलामी आवंटन के समर्थकों की दलील है कि इससे तेज और सस्ता इंटरनेट दूरदराज के इलाकों तक पहुंच सकेगा।

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रिलायंस जियो के एमडी आकाश अंबानी ने कहा कि जियो भारतीय ग्राहकों को वैल्यू देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने मस्क के आरोपों पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। यह प्रतिक्रिया 9 अक्टूबर को इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान सामने आई।

एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए?

स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रवेश करने से रोक रहे हैं, ताकि उनका एकाधिकार बना रहे। उन्होंने इसे भारतीय उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ बताया।

मस्क का कहना है कि स्टारलिंक उन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड की सुविधा सीमित है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा और छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

9 अक्टूबर को मस्क ने मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहकर संबोधित किया और सवाल उठाया कि क्या वह स्टारलिंक को भारत में प्रतिस्पर्धा करने देंगे। हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है।

जियो और स्टारलिंक के बीच क्या है मामला?

मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो भारत के प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं में शामिल है। वहीं, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है।

गौरतलब है कि भारत में स्टारलिंक अभी सेवा शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रहा है। कंपनी को उम्मीद थी कि प्रशासनिक आवंटन का रास्ता खुलने से उसे भारत में उतरने में मदद मिलेगी। 

सरकार के मुताबिक, स्टारलिंक के अलावा जियो सैटकॉम और भारती समूह से जुड़ी यूटेलसैट वनवेब भी संबंधित सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया में हैं।

दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियामकीय व्यवस्था निष्पक्ष है। मंत्रालय के अनुसार, तीनों कंपनियां मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण में हैं और सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं।

सुनील मित्तल ने भी दिया था जवाब

इस विवाद पर भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी से जुड़ी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा यूटेलसैट वनवेब भी परिचालन शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रही है।

इस बयान के जरिए मित्तल ने संकेत दिया कि मंजूरी की प्रक्रिया केवल स्टारलिंक तक सीमित नहीं है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को सुरक्षा और नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने की निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं है। कंपनी को जरूरी सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

आकाश अंबानी ने मस्क के आरोपों पर सीधे बहस करने के बजाय जियो के ग्राहकों पर फोकस करने की बात कही है। वहीं, सरकार का कहना है कि सभी संबंधित कंपनियों को समान नियामकीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इस पूरे विवाद में अब मुख्य सवाल यह है कि स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी कब मिलती है और क्या इससे देश के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

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