भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। Bay of Bengal Cyclone का नया और बड़ा खतरा देश के पूर्वी तटीय राज्यों पर मंडरा रहा है। मौसम विभाग की ताजा सैटेलाइट इमेजरी और बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के मिडिल-ईस्टर्न (मध्य-पूर्वी) और उससे सटे साउथ-ईस्टर्न (दक्षिण-पूर्वी) हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बन चुका है। यह वेदर सिस्टम आने वाले कुछ ही दिनों में एक भयंकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

इस संभावित चक्रवात का सबसे ज्यादा और सीधा असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और ओडिशा के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने स्पष्ट रूप से 27 से 29 अक्टूबर के बीच इन दोनों राज्यों में बेहद भारी बारिश (Heavy Rainfall) होने की चेतावनी जारी की है।

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चक्रवात बनने का क्या है पूरा टाइमलाइन? आईएमडी (IMD) के मौसम वैज्ञानिकों ने इस नए वेदर सिस्टम के आगे बढ़ने और इसके ताकतवर होने की पूरी टाइमलाइन साझा की है।

  • 24 अक्टूबर की स्थिति: समुद्र में बना यह कम दबाव का क्षेत्र गुरुवार, 24 अक्टूबर तक एक डिप्रेशन (Depression) में तब्दील हो जाएगा।

  • 25 अक्टूबर का पूर्वानुमान: इसके अगले ही दिन यानी 25 अक्टूबर को यह सिस्टम और अधिक ऊर्जा बटोरकर गहरे दबाव वाले क्षेत्र, जिसे मौसम विज्ञान की भाषा में डीप डिप्रेशन (Deep Depression) कहा जाता है, में बदल जाएगा।

  • 26 अक्टूबर तक बनेगा तूफान: मौसम विभाग का सटीक अनुमान है कि 26 अक्टूबर की सुबह तक यह सिस्टम पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंचकर एक पूर्ण और विनाशकारी चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा।

किन इलाकों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा? चक्रवाती तूफान बनने के बाद यह वेदर सिस्टम तेजी से आगे बढ़ेगा। इसका संभावित रास्ता उत्तर आंध्र प्रदेश (North Andhra Pradesh) और दक्षिण ओडिशा (South Odisha) के तटीय क्षेत्रों की ओर बताया जा रहा है।

जैसे-जैसे यह तूफान तट के करीब पहुंचेगा, समुद्र में ऊंची लहरें उठने लगेंगी और तेज हवाओं का दौर शुरू हो जाएगा। इसी वजह से 27 से 29 अक्टूबर के दौरान इन दोनों राज्यों के तटीय और निचले इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। मछुआरों को समुद्र में न जाने और जो लोग गहरे समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत सुरक्षित तटों पर लौटने की सख्त सलाह दी जा रही है।

इस नए चक्रवाती तूफान का नाम होगा 'अर्नब' मौसम विज्ञान की दुनिया में तूफानों का नामकरण एक विशेष और रोचक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। यदि मौसम विभाग की यह ताजा भविष्यवाणी सच साबित होती है और यह वेदर सिस्टम चक्रवात का रूप ले लेता है, तो इस तूफान को 'अर्नब' (Arnab) नाम दिया जाएगा।

  • किसने दिया यह नाम: यह नाम भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश द्वारा क्षेत्रीय चक्रवातों के नामों की आधिकारिक सूची के लिए सुझाया गया था।

  • क्या है इसका अर्थ: बंगाली भाषा में 'अर्नब' का मतलब 'समुद्र' (Ocean) होता है।

  • नामकरण की प्रक्रिया: उत्तर हिंद महासागर (North Indian Ocean) क्षेत्र में बनने वाले सभी चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और इस क्षेत्र से संबंधित देशों (पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन) की एक संयुक्त व्यवस्था के तहत पहले से ही तय किए जाते हैं।

पिछले महीने के चक्रवात से सबक लेना जरूरी बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों का आना कोई नई बात नहीं है। ठीक पिछले महीने भी बंगाल की खाड़ी में एक ऐसा ही मजबूत वेदर सिस्टम बना था। उसने कुछ ही दिनों में एक चक्रवात का रूप अख्तियार कर लिया था।

वह तूफान भी बिल्कुल इसी रास्ते से होते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से गुजरा था। उस दौरान दोनों राज्यों के कई तटीय जिलों में भयंकर बारिश हुई थी, जिससे भारी जलभराव हुआ और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। पिछले महीने की तबाही को देखते हुए, मौसम विभाग और राज्य सरकारों की ओर से जारी इस नए अलर्ट को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों से लोगों को निकालने की संभावित तैयारी और आपातकालीन सेवाओं को मुस्तैद करना शुरू कर दिया है।

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