केंद्र सरकार वाराणसी, अमृतसर और रायपुर समेत देश के 11 हवाई अड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दिसंबर 2026 तक बोली प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए दुबई, सिंगापुर और मुंबई जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में रोडशो आयोजित करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित सौदों को वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य है।

यह प्रक्रिया सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। योजना के मुताबिक, बड़े एयरपोर्ट के साथ छोटे हवाई अड्डों को भी जोड़ा जाएगा। इससे बड़े एयरपोर्ट से होने वाली कमाई के सहारे छोटे एयरपोर्ट के संचालन और विकास को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पांच समूहों में बांटे जाएंगे एयरपोर्ट

सरकार की योजना में 11 हवाई अड्डों को पांच समूहों में रखा गया है। इनमें पांच बड़े एयरपोर्ट के साथ छह छोटे एयरपोर्ट जोड़े गए हैं।

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  • अमृतसर और कांगड़ा-गगल: पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा-गगल एयरपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा।
  • वाराणसी, गया और कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के वाराणसी एयरपोर्ट के साथ बिहार के गया और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर एयरपोर्ट को समूह में रखा गया है।
  • भुवनेश्वर और हुबली: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के एयरपोर्ट को कर्नाटक के हुबली एयरपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा।
  • रायपुर और औरंगाबाद: छत्तीसगढ़ के रायपुर एयरपोर्ट के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद एयरपोर्ट को समूह में रखा गया है।
  • तिरुचिरापल्ली और तिरुपति: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट को आंध्र प्रदेश के तिरुपति एयरपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा।

इन समूहों के लिए संचालन, प्रबंधन और विकास से संबंधित रियायतें देने की योजना है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) ने 4 अगस्त 2026 की बैठक में प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।

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50 साल की लीज पर देने की तैयारी

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एयरपोर्ट समूहों को 50 साल के लीज समझौते पर निजी ऑपरेटरों को देने की योजना है। निजी कंपनियां समझौते की शर्तों के अनुसार हवाई अड्डों के संचालन, रखरखाव और विकास का काम करेंगी।

सरकार का उद्देश्य निजी क्षेत्र की पूंजी, तकनीकी क्षमता और प्रबंधन का इस्तेमाल करके हवाई अड्डों की सुविधाओं में सुधार करना है। खास तौर पर छोटे एयरपोर्ट के सामने यात्रियों की सीमित संख्या और संचालन लागत जैसी चुनौतियां रहती हैं। बड़े एयरपोर्ट के साथ उन्हें जोड़ने से इनकी आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होने की उम्मीद है।

हालांकि, निजी ऑपरेटरों को सौंपने की योजना का अर्थ यह नहीं है कि सभी हवाई अड्डों का स्वामित्व सीधे निजी कंपनियों को बेच दिया जाएगा। यह प्रस्ताव संचालन और विकास के लिए दीर्घकालीन रियायत व्यवस्था से जुड़ा है। अंतिम अधिकार और जिम्मेदारियां समझौते की शर्तों से तय होंगी।

विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोडशो

सरकार इस बार केवल भारतीय कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ाना चाहती है। इसके लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में रोडशो आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में निवेशकों को एयरपोर्ट समूहों की संरचना, बोली प्रक्रिया और प्रस्तावित समझौतों की जानकारी दी जाएगी।

मौजूदा एयरपोर्ट ऑपरेटरों के अलावा नए निवेशकों और संप्रभु संपत्ति कोषों की भागीदारी आकर्षित करने की कोशिश भी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार एक ही कंपनी को दिए जा सकने वाले एयरपोर्ट समूहों की संख्या पर सीमा लगाने की भी योजना बना रही है। इसका उद्देश्य बाजार में कुछ ही कंपनियों का अत्यधिक दबदबा बनने और प्रतिस्पर्धा सीमित होने के जोखिम को कम करना है।

दिसंबर तक बोली, मार्च 2027 तक सौदे पूरे करने का लक्ष्य

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, बोली प्रक्रिया दिसंबर 2026 तक शुरू हो सकती है। इसके बाद चयन, समझौते और अन्य औपचारिकताएं पूरी करके वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक सौदों को अंतिम रूप देने का लक्ष्य है। यह समयसीमा प्रस्तावित योजना पर आधारित है; वास्तविक तारीखें निविदा और सरकारी प्रक्रिया के अनुसार बदल सकती हैं।

एयरपोर्ट के निजी संचालन से सुविधाओं और प्रबंधन में सुधार की संभावना है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ निवेश, सेवा की गुणवत्ता, शुल्क व्यवस्था और समझौतों की शर्तों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार की योजना बोली प्रक्रिया शुरू करने और निवेशकों को आकर्षित करने की है।

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