भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का सपना अब जल्द ही हकीकत में बदलने जा रहा है। बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की फैसिलिटी में इसका निर्माण जोरों पर है। Mumbai-Ahmedabad Bullet Train कॉरिडोर के लिए तैयार की जा रही इस हाई-स्पीड ट्रेन का नाम 'B-28' या 'भारत 28' रखा गया है। अगस्त 2027 से इसका कमर्शियल परिचालन (Commercial Operation) शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्पीड और कोच की क्षमता 'भारत 28' ट्रेनसेट लगभग 202 मीटर लंबा होगा। इसे 280 किमी प्रति घंटे की अधिकतम टेस्ट स्पीड के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि इसकी ऑपरेशनल स्पीड 249 किमी प्रति घंटा होगी।

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यात्रियों के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं भारतीय यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के इंटीरियर को बेहद आरामदायक बनाया गया है:

  • सीटिंग और लेगरूम: आरामदायक सीटें और पैरों के लिए पर्याप्त जगह (लेगरूम) के साथ बड़ी खिड़कियां दी गई हैं।

  • मनोरंजन और कनेक्टिविटी: ट्रेन में वाई-फाई आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम, हर सीट के पास चार्जिंग पॉइंट और LED लाइटिंग की सुविधा होगी।

  • जानकारी: LCD डिस्प्ले पर अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलेगी।

दिव्यांगों और दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम 'भारत 28' को सभी के लिए सुलभ बनाया गया है। ट्रेन का फर्श प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के बराबर होगा। दरवाजों में खास स्टेप्स होंगे जो जरूरत पड़ने पर बाहर निकल आएंगे। कम चलने-फिरने की क्षमता वाले यात्रियों के लिए व्हीलचेयर के अनुकूल दरवाजे और टॉयलेट होंगे। इसके अलावा, दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में ब्रेल लिपि (Braille) वाले सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

'स्क्वीज टेस्ट' के बाद जलवायु परीक्षण की तैयारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर को बेंगलुरु में BEML फैसिलिटी का दौरा कर निर्माण कार्य का जायजा लिया था। फिलहाल ट्रेन के पहले कोच की इंटीग्रेटेड कार बॉडी का 'स्क्वीज़ टेस्ट' (Squeeze Test) अंतिम चरण में है। यह टेस्ट ट्रेन के ढांचे की मजबूती जांचने के लिए किया जाता है। इसके बाद कोच में प्रोपल्शन सिस्टम लगाकर 'क्लाइमेटिक टेस्टिंग' (Climatic Testing) होगी। इसमें ट्रेन को 50 डिग्री सेल्सियस तापमान, अत्यधिक ठंड और धूल भरे मौसम में परखा जाएगा।

ऊर्जा की बचत और नॉइज़ कंट्रोल डिजाइन

  • रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ट्रेन 25 kV AC ओवरहेड सिस्टम से चलेगी। ब्रेक लगाने पर पैदा होने वाली ऊर्जा वापस ग्रिड में चली जाएगी, जिससे बिजली की बचत होगी।

  • एयरोडायनामिक डिजाइन: हवा के प्रतिरोध को कम करने के लिए ट्रेन के आगे के हिस्से को एयरोडायनामिक शेप दिया गया है।

  • साउंड इंसुलेशन: ट्रेन के अंदर शोर कम करने के लिए खास साउंड इंसुलेशन और नॉइज़-डैम्पिंग कोटिंग का इस्तेमाल किया गया है।

रेलवे का लक्ष्य है कि 2027-28 के वित्तीय वर्ष में सूरत-वापी सेक्शन (100 किमी) पर इस ट्रेन का टेस्ट रन शुरू किया जाए और 508 किलोमीटर लंबे पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा कर लिया जाए।

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