उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गोवंश संरक्षण और उनकी उचित देखभाल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ी पहल शुरू की गई है। कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आयोजित जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक में Bijnor Gaushala Land Identification को लेकर अहम फैसले लिए गए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि गोवंश की सेवा और उनका संरक्षण एक अत्यंत पुण्य का कार्य है। उन्होंने जनपद में दो नई बृहद गौशालाओं की स्थापना के लिए तत्काल प्रभाव से एक-एक हेक्टेयर भूमि चिह्नित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
तहसील स्तर पर भूमि चिह्नित करने के ऑनलाइन निर्देश समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े सभी उप जिलाधिकारियों (SDM) को निर्देश दिए कि नई गौशालाओं के लिए भूमि आवंटन के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हित की जाने वाली भूमि एक-एक हेक्टेयर क्षेत्रफल की होनी चाहिए ताकि वहां बृहद स्तर पर गोवंशों के रहने, चारे और सुरक्षा का समुचित प्रबंध किया जा सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गोवंशों का संरक्षण और उनकी देखरेख करना समाज एवं प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जीरामजी योजना से बनेगी बाउंड्री वॉल और केयरटेकर रूम गौशालाओं में अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने के लिए जिलाधिकारी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिन गौशालाओं में सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्री वॉल नहीं है, वहां तत्काल बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इसके साथ ही गौशाला परिसरों में केयरटेकर रूम, भूसा भंडारण कक्ष (भूसा रूम) तथा तालाब (पॉन्ड) बनाने के निर्माण कार्य जीरामजी योजना के अंतर्गत स्वीकृत कर पूरे कराए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि इन मूलभूत सुविधाओं के विकास से संरक्षित गोवंशों को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचाया जा सकेगा और उनकी देखभाल बेहतर ढंग से हो सकेगी।
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हर माह तहसील स्तर पर होगी समीक्षा और सीसीटीवी से निगरानी प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बनाने के लिए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपनी-अपनी तहसीलों में प्रत्येक माह गोवंश संरक्षण कार्यों की नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने का आदेश दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं गौशालाओं का भौतिक निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं का जायजा लें।
निरीक्षण के दौरान गौशालाओं में स्थापित सीसीटीवी कैमरों के क्रियान्वयन, संचालन, प्रबंधन और गोवंशों के स्वास्थ्य की स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया जाए। इसके अलावा उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) द्वारा संचालित गो सेवा केंद्रों का भी नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिले में 13 हजार से अधिक गोवंशों का हो रहा संरक्षण बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) डॉ. लोकेश अग्रवाल ने जिले में गोवंश संरक्षण के अद्यतन आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि बिजनौर की विभिन्न आश्रयशालाओं में वर्तमान में 10,617 निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। इसके अलावा जनपद की निजी पंजीकृत गौशालाओं में लगभग 2,500 गोवंशों की देखरेख की जा रही है। इस प्रकार संपूर्ण जिले में कुल 13,000 से अधिक गोवंशों का सफलतापूर्वक संरक्षण किया जा रहा है।
सहभागिता योजना के तहत 2,573 गोवंश सुपुर्द, प्रतिदिन 50 रुपये अनुदान डॉ. लोकेश अग्रवाल ने शासन की महत्वाकांक्षी सहभागिता योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि जिले को 1,032 गोवंश सुपुर्द करने का लक्ष्य मिला था। हालांकि, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के प्रयासों से लक्ष्य से अधिक 2,573 गोवंश पशुप्रेमियों को सुपुर्द किए जा चुके हैं।
इस योजना के तहत संरक्षित गोवंशों के भरण-पोषण के लिए संबंधित लाभार्थी को 50 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बायोगैस प्लांट के संचालन का काम भी प्रगति पर है।
Sabse pehle comment karne wale banein.