मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार, 14 अक्टूबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाने से पहले जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा, “दंड भी धर्म है।” अदालत की इस टिप्पणी का अर्थ बताया गया कि अपराध करने वालों को दंड देना भी धर्म का हिस्सा है। जज ने यह भी कहा कि ऐसे अपराध समाज में भय पैदा करते हैं।

महाभारत का जिक्र कर दंड को धर्म से जोड़ा

सजा सुनाते समय अदालत में महाभारत का संदर्भ आया। सौरभ के पक्ष के वकील ने मीडिया को बताया कि जज ने कहा कि गलत काम करने वालों को दंड देना भी धर्म है और अदालत अपना कर्तव्य निभाएगी।

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अपराध से समाज में भय की टिप्पणी

रिपोर्ट के अनुसार, जज ने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध समाज में भय पैदा करते हैं। हालांकि, अदालत के विस्तृत लिखित फैसले का पूरा पाठ उपलब्ध नहीं होने के कारण टिप्पणी के सभी शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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गंभीर अपराधों पर कड़ी सजा का संदेश

30 सितंबर को दोषी करार

इससे पहले 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी करार देते समय भी अदालत की ओर से गंभीर अपराधों में उचित दंड और कानून के राज का संदेश देने की बात सामने आई थी। अभियोजन पक्ष ने हत्या की योजना, शव को छिपाने और मामले में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर कठोर सजा की मांग की थी।

126 सुनवाई और 22 गवाहों के बाद फैसला

13 महीने चला मुकदमा

सौरभ राजपूत हत्याकांड का मुकदमा करीब 13 महीने चला। इस दौरान 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया था। इसके करीब दो सप्ताह बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

नीले ड्रम में छिपाया गया था शव

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत की मार्च 2025 में हत्या की गई थी। आरोप था कि उनकी पत्नी मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से छिपा दिया। पुलिस जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, तकनीकी रिकॉर्ड और गवाहों के बयान मुकदमे का हिस्सा बने। अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

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