उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गंगा नदी के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा अभियान चलाया गया। उत्तर प्रदेश राज्य पोषित योजना के अंतर्गत आयोजित Bijnor Ganges River Ranching कार्यक्रम के तहत बुधवार को गंगा नदी में रोहू, नैन और कतला प्रजाति की कुल 1 लाख मत्स्य अंगुलिकाएं (फिश फिंगरलिंग्स) प्रवाहित की गईं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्राकृतिक मत्स्य संपदा का संरक्षण करना, जलीय जैव विविधता में निरंतर वृद्धि करना और नदियों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना रहा। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिजनौर जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे।

गंगा की स्वच्छता और आजीविका संवर्धन पर बल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गंगा नदी में रोहू, नैन और कतला जैसी स्वदेशी प्रजातियों की मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित करने से गंगा की स्वच्छता बनी रहती है। यह पहल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्राकृतिक रूप से बनाए रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि नदी में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से जलीय जैव विविधता के संरक्षण को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस प्रकार की योजनाएं केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये मत्स्य पालन के व्यवसाय से सीधे जुड़े स्थानीय लोगों और निषाद समाज की आजीविका को सुदृढ़ करने में भी बेहद मददगार साबित हो रही हैं।

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वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील समारोह के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने उपस्थित मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन की विभिन्न नवीन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों और मत्स्य पालकों से पारंपरिक तौर-तरीकों के स्थान पर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि निजी व सार्वजनिक तालाबों में वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करके मछलियों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में सीधी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गंगा संरक्षण, स्वच्छ गंगा अभियान और राज्य में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन के लिए चलाए जा रहे विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रमों की खुले दिल से सराहना की।

रिवर रैंचिंग योजना का वैज्ञानिक महत्व और दूरगामी लाभ कार्यक्रम के दौरान मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिवर रैंचिंग योजना की बारीकियों और इसके पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्राकृतिक जल स्रोतों तथा नदियों में रोहू, कतला और नैन जैसी मुख्य प्रजातियों का संचयन करना प्राकृतिक जल संतुलन के लिए आवश्यक है।

यह कदम नदियों में मछलियों की घटती संख्या को रोकने, प्राकृतिक जल संसाधनों को संरक्षित करने तथा जलीय खाद्य श्रृंखला को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इससे नदियों के मत्स्य संसाधनों का सतत विकास होगा, जिससे आने वाले समय में स्थानीय मत्स्य पालकों को दीर्घकालिक और स्थायी आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकेगा।

मत्स्य विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मत्स्य पालक रहे मौजूद मत्स्य विभाग, बिजनौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्यगण, क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से आए मत्स्य पालक, निषादराज पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता तथा स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिजनौर के सहायक निदेशक मत्स्य शिव कुमार, वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक अमित कुमार शुक्ला, मत्स्य निरीक्षक विनय कुमार गौतम तथा नितेश कुमार गौड़ सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने उपस्थित ग्रामीणों एवं किसानों से गंगा नदी की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।

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