Meerut Garh Road Open Manhole: उत्तर प्रदेश को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के दावों के बीच मेरठ महानगर में सरकारी निर्माण कार्यों की संवेदनहीनता का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गढ़ रोड पर 'सीएम ग्रिड' (CM Grid) योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में ठेकेदारों और सुपरवाइजरों की मनमानी इस कदर हावी है कि एक प्रतिष्ठित व्यापारी को अपनी आजीविका छोड़कर इलाज के लिए शहर छोड़ना पड़ गया। दुकान के सामने सालभर से खुले पड़े अंडरग्राउंड लाइट के मैनहोल ने व्यापारी को इस कदर मानसिक तनाव दिया कि वे गंभीर रूप से बीमार होकर बेंगलुरु पहुंच गए हैं।

​15 फुट की दुकान और सामने मौत का जाल

गढ़ रोड स्थित दुकान संख्या 50 के मालिक प्रमोद कुमार केला ने मेरठ नगर निगम के महापौर (Mayor) को औपचारिक पत्र भेजकर अपनी व्यथा सुनाई है। पत्र के अनुसार, सीएम ग्रिड योजना के तहत सड़क का निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था ने उनकी मात्र 15 फुट चौड़ी दुकान के ठीक सामने अंडरग्राउंड बिजली का मुख्य मैनहोल (Main Hole) और बड़ा इलेक्ट्रिक बक्सा स्थापित कर दिया। इस निर्माण ने दुकान के मुख्य प्रवेश द्वार को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया, जिससे ग्राहकों का आना-जाना लगभग ठप हो गया।

​10 बार गुहार लगाई, 1 साल से खुला है जानलेवा ढक्कन

व्यापारी का आरोप है कि केवल ढांचा खड़ा करना ही समस्या नहीं थी, बल्कि पिछले एक पूरे साल से इस अंडरग्राउंड लाइट के गहरे मैनहोल का ढक्कन खुला छोड़ दिया गया है। खुले तारों और गहरे गड्ढे के कारण वहां हर वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। पीड़ित व्यापारी ने बताया कि उन्होंने सड़क निर्माण करवा रहे ठेकेदार और साइट सुपरवाइजर से कम से कम 10 बार हाथ जोड़कर ढक्कन बंद करने और व्यवस्था दुरुस्त करने की गुहार लगाई, लेकिन निर्माण एजेंसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

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​मानसिक तनाव से बिगड़ी तबीयत, बेंगलुरु में चल रहा इलाज

सालभर तक सरकारी सिस्टम और ठेकेदारों की बेरुखी झेलते-झेलते व्यापारी प्रमोद केला गहरे अवसाद और गंभीर मानसिक तनाव की गिरफ्त में आ गए। व्यापार ठप होने और लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न के चलते उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें मेरठ में अपना कारोबार बंद कर बेंगलुरु में रहने वाले अपने बेटे के पास जाना पड़ा, जहां वर्तमान में उनका इलाज चल रहा है।

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​"हमारे उत्पीड़न का जिम्मेदार कौन?" - पत्र में दागे तीखे सवाल

महापौर को लिखे पत्र में पीड़ित व्यापारी ने हताश होकर पूछा है कि उनके इस मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक नुकसान और बीमारी का जिम्मेदार आखिर कौन होगा? जब मौके पर मौजूद ठेकेदार और सुपरवाइजर आम नागरिक की 10 बार की गई प्रार्थना को दरकिनार कर देते हैं, तो शहर का करदाता अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? यह मामला सीधे तौर पर नगर निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था और सीएम ग्रिड की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है।

​डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह समाचार गढ़ रोड, मेरठ के व्यापारी प्रमोद कुमार केला द्वारा माननीय महापौर, नगर निगम मेरठ को भेजे गए आधिकारिक शिकायती पत्र में दर्ज तथ्यों पर आधारित है। खबर में निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और सुपरवाइजर की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। हमारा उद्देश्य जनहित से जुड़ी इस गंभीर समस्या को सक्षम अधिकारियों के संज्ञान में लाना है।

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