Meerut Death Penalty Case में अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जिला कारागार में बंद साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की पहचान पूरी तरह से बदल गई है। अदालत का फैसला जेल प्रशासन तक पहुंचने के बाद अब साहिल को 'कैदी नंबर 395' और मुस्कान को 'कैदी नंबर 396' के नाम से जाना जाएगा। दोनों को उनके कैदी नंबर और नए कपड़े मुहैया करा दिए गए हैं। साथ ही सुरक्षा कारणों से उनकी बैरक भी बदल दी गई है और जल्द ही दोनों को सेंट्रल जेल (Central Jail) शिफ्ट करने की तैयारी है।

​रो-रोकर हुआ बुरा हाल, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

मुस्कान जेल में सजा कम होने की उम्मीद के साथ पहले से ही नवरात्र की पूजा कर रही थीं। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि शाम सवा चार बजे जैसे ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई, दोनों जोर-जोर से रोने लगे। उन्हें उम्मीद थी कि अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाएगी।

​फांसी की सजा सुनने के बाद दोनों इस कदर बदहवास हो गए कि जेल स्टाफ को मुस्कान की गोद से उनकी छोटी बेटी को संभालना पड़ा। इसके बाद तत्काल दोनों की काउंसलिंग की गई और उन्हें समझाया गया कि वे अभी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जेल प्रशासन की तरफ से उन्हें हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए एक सरकारी अधिवक्ता (वकील) भी मुहैया कराया जाएगा। साहिल और मुस्कान ने भी निचली अदालत के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। सदमे में होने के कारण बुधवार रात दोनों ने जेल में खाना नहीं खाया और मुस्कान की बेटी को भी अन्य महिला बंदियों ने ही दूध पिलाया।

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​165 पन्नों का फैसला और जज ने तोड़ दिया पेन

पुलिस ने इस जघन्य अपराध में एक हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट (Chargesheet) दाखिल कर मुस्कान और साहिल को मुख्य आरोपी बनाया था। मामले की सुनवाई करते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने 165 पन्नों के निर्णय में दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। न्यायिक परंपरा का पालन करते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने दोनों को फांसी की सजा मुकर्रर करने के तुरंत बाद अपने पेन की निब तोड़ दी। तोड़े गए इस पेन को भी निर्णय की फाइल में ही सुरक्षित रख लिया गया है।

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