उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आधिकारिक रूप से राजनीति में नई शुरुआत की है। उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम का ऐलान कर दिया है। दिव्या मित्तल द्वारा गठित इस दल का नाम Divya Mittal Political Party पहल के तहत ‘जननीति भारत’ रखा गया है।

गुरुवार दोपहर एक बजे सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए पूर्व अधिकारी ने घोषणा की कि वह वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर जिले की सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी अन्य दल के साथ गठबंधन करने के बजाय स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेगी।

वीडियो में दिव्या मित्तल के 4 प्रमुख संकल्प और नीतियां

दिव्या मित्तल ने गंगा नदी के तट से रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो संदेश में अपनी पार्टी का विजन और कार्ययोजना साझा की। उन्होंने 'जननीति भारत' की दिशा तय करने के लिए चार प्रमुख बातें सामने रखीं:

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1. 'जन से नीति, नीति से भारत' का सिद्धांत दिव्या मित्तल ने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक सुनवाई की कमी है। जैसे गंगा में हर बूंद बराबर होती है, वैसे ही जननीति भारत में हर नागरिक की भागीदारी समान होगी। उन्होंने देवकली देवी के गांव में स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी बड़े उद्योगपति के लिए रास्ता बनाना होता है तो वन विभाग 80 दिन में मंजूरी दे देता है, लेकिन किसी गरीब बच्चे के स्कूल या अस्पताल की फाइल 80 साल तक लटकी रहती है। उनकी नीति में किसान, छोटे व्यापारी और आम जनता ही निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में रहेंगे।

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2. पहचान नहीं, जरूरत देखकर होंगे फैसले पार्टी का दूसरा वचन देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं और निर्माण कार्य किसी की व्यक्तिगत पहचान या रसूख देखकर तय नहीं होंगे। उन्होंने एक गांव का उदाहरण दिया जहां एक प्रभावशाली व्यक्ति के कारण पूरी सड़क की दिशा मोड़ दी गई और सैकड़ों गरीबों के घर टूट गए। दिव्या मित्तल ने घोषणा की कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक मोबाइल ऐप बनाया जाएगा, जहां लड़कियां असुरक्षित या अंधेरे वाले मोड़ों को मार्क कर सकेंगी। जिस स्थान पर 100 मार्क हो जाएंगे, वहां बिना किसी नेता या पुलिस अफसर के आदेश के सीधे लाइट, कैमरा और गश्त की व्यवस्था की जाएगी।

3. जरूरत से फैसला और जनता को पारदर्शी हिसाब तीसरे वचन के तहत उन्होंने सरकारी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और सरकारी निधि का पूरा ब्योरा मोबाइल पर उपलब्ध होगा। सरकारी सुविधाओं जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़क और कोटे की दुकानों की स्थिति जांचने के लिए तीन रंगों (हरा-अच्छा, पीला-ठीक, लाल-खराब) की व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे अधिकारियों और मंत्रियों को सीधे पता चलेगा कि किस ब्लॉक या जिले में कहां सुधार की जरूरत है।

4. 'राजनीति नहीं, जननीति करेंगे' दिव्या मित्तल ने कहा कि जननीति भारत के जनप्रतिनिधि (विधायक) सरकार की ओर मुंह करके बैठने के बजाय जनता की ओर मुंह करके बैठेंगे। उनका काम जनता के द्वार जाकर उनकी समस्याओं को दर्ज करना होगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के पास बाहुबल या विज्ञापनों के लिए करोड़ों रुपए नहीं हैं। इसलिए यह लड़ाई पोस्टर से नहीं, बल्कि हर घर को कार्यालय बनाकर और हर व्यक्ति को प्रचारक बनाकर लड़ी जाएगी।

30 सितंबर को किया था राजनीति में आने का ऐलान

इससे पहले 30 सितंबर को दिव्या मित्तल ने सिविल सेवा छोड़ने के बाद राजनीति में आने की इच्छा व्यक्त की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहकर जनता के मुद्दों पर सवाल करेंगी और किसी भी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। उनका उद्देश्य राजनेताओं को बदलना नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की पूरी नीति को बदलना है। इसके बाद नवरात्रि के पहले दिन जब वह मिर्जापुर पहुंचीं, तो स्थानीय लोगों और समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया था।

प्रशासनिक अनुभव और मिर्जापुर से जुड़ाव

सितंबर 2022 में दिव्या मित्तल मिर्जापुर की जिलाधिकारी (DM) बनी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान वह ग्रामीण क्षेत्रों में जन-चौपालों और पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए जानी गईं। मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में पहली बार पाइपलाइन से पीने का पानी पहुंचाने का काम उनके कार्यकाल में ही शुरू हुआ था।

मिर्जापुर से तबादले के बाद देवरिया में भी उनका कार्यकाल प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद उन्होंने 30 अगस्त को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, जिसे सरकार ने 14 सितंबर को स्वीकार कर लिया। इस्तीफा मंजूर होने पर उन्होंने जयशंकर प्रसाद की पंक्तियों "प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो" के साथ अपने नए सफर का संकेत दिया था।

लंदन की नौकरी छोड़कर चुनी थी सिविल सर्विसेज

मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल का शैक्षणिक और व्यावसायिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने लंदन में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे वेतन पर नौकरी की।

लंदन में ही उनकी मुलाकात गगनदीप सिंह से हुई, जिनसे बाद में उनका विवाह हुआ। कुछ वर्षों बाद दोनों ने विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। दिव्या ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस कैडर हासिल किया। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने दोबारा तैयारी की और वर्ष 2013 में आईएएस अधिकारी के रूप में चुनी गईं। उनके पति गगनदीप सिंह ने भी वर्ष 2010 में पहले प्रयास में यूपीएससी पास किया था और इंडियन ट्रेड सर्विस में रहे। गगनदीप ने वर्ष 2022 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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