सावन का मनभावन मौसम और बारिश की बूंदें हर किसी को पसंद आती हैं। भीषण गर्मी के बाद जब आसमान से पानी बरसता है, तो तपती धरती को राहत मिलती है और किसानों के चेहरे खिल उठते हैं। सावन की यह बारिश किसी अमृत से कम नहीं होती। लेकिन, यही बारिश अगर सावन के बजाय मार्च और अप्रैल के महीने में होने लगे, तो यह अमृत पल भर में 'जहर' बन जाता है। इन दिनों उत्तर प्रदेश का मौसम कुछ ऐसा ही है। यूपी में बेमौसम बारिश ने न केवल आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि खेतों में खड़ी किसानों की मेहनत को भी पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है।READ ALSO:-योगी सरकार का 'डिजिटल मास्टरस्ट्रोक': प्रदेश के युवाओं को मिलेंगे 25 लाख नए फ्री टैबलेट, कैबिनेट ने दी भारी-भरकम प्रस्ताव को हरी झंडी!
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वाराणसी से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक, आसमान से बरस रही आफत ने लोगों को गर्मी से फौरी राहत तो दी है, लेकिन इसके साथ आई ओलावृष्टि और तेज आंधी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मौसम में यह अचानक बदलाव क्यों हो रहा है? किसानों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी? आइए इस पूरे घटनाक्रम और मौसम विज्ञानियों की राय पर विस्तार से नजर डालते हैं।
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बेमौसम बारिश का असली कारण: क्या है पश्चिमी विक्षोभ?

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मौसम के इस बड़े और अप्रत्याशित परिवर्तन को लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के भू-भौतिकी विभाग के विशेषज्ञ प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव ने अहम जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि इस यूपी में बेमौसम बारिश की मुख्य वजह 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) है।
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पश्चिमी विक्षोभ असल में बादलों का वह समूह है जो यूरोप, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश करता है। यह भूमध्य सागर के ऊपर उत्पन्न होता है और पूर्व की ओर बढ़ते हुए उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को प्रभावित करता है।
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क्या अल-नीनो (El Niño) या ला-नीना (La Niña) का है असर?

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प्रोफेसर श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति को 'अल-नीनो' या 'ला-नीना' से जोड़ना पूरी तरह गलत होगा। 15 मार्च के बाद से मौसम में जो भी बदलाव आए हैं, वे विशुद्ध रूप से पश्चिमी विक्षोभ का ही परिणाम हैं। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ कोई नई परिघटना नहीं है, लेकिन इसके समय काल (Timing) में जो बदलाव आया है, वह पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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सामान्य तौर पर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव नवंबर, दिसंबर या जनवरी के सर्दियों के महीनों तक ही सीमित रहता था। लेकिन अब मार्च और अप्रैल में इसका इतनी तीव्रता से सक्रिय होना बाहरी देशों में हो रहे 'जलवायु परिवर्तन' (Climate Change) का सीधा संकेत है। भारत के पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी वजह से हल्की बारिश है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, आगरा, बुलंदशहर) में भारी बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली है।
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यूपी मौसम अपडेट: 9 अप्रैल तक तूफानी बारिश का अलर्ट

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यूपी में बेमौसम बारिश का यह सिलसिला अभी रुकने वाला नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, 7 से 9 अप्रैल के बीच पूरे प्रदेश में बेमौसम तूफानी वर्षा की भारी संभावना है।
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    हवाओं की रफ्तार: पिछले 5 दिनों से लगातार सुबह और शाम 20 से 22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवाएं चल रही हैं।
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    तापमान में गिरावट: इस बारिश के दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे (करीब 34.8 डिग्री) और न्यूनतम तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। अगले दो दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की और गिरावट आ सकती है।
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    कब मिलेगी राहत: 10 अप्रैल से प्रदेश का मौसम शुष्क होने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ 7 और 8 अप्रैल को अपना अधिकतम प्रभाव दिखाने के बाद धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएगा, जिसके बाद गर्मी अपने सामान्य स्तर पर आ सकती है।
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किसानों पर आफत: बर्बाद हो रही गेहूं और सरसों की फसल

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यह यूपी में बेमौसम बारिश किसानों के लिए किसी बड़े दुःस्वप्न (Nightmare) से कम नहीं है। खेतों में गेहूं, चना, सरसों, मसूर और मक्का की फसलें पूरी तरह से पककर तैयार हैं। आंधी और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। खलिहानों में काटकर रखी गई सरसों और गेहूं की फसल के भीगने से भारी नुकसान की आशंका है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ उद्यान अधिकारी अश्विनी कुमार देशवाल ने बताया कि हवा में नमी और धूप न निकलने से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा खतरा है। बारिश में भीगने के बाद गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं। इससे अनाज की गुणवत्ता (Quality) बुरी तरह प्रभावित होगी और बाजार में किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, आम के बौर (फूल) झड़ने से आम की पैदावार पर भी आंशिक असर पड़ने की संभावना है।
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नुकसान की भरपाई के लिए किसान क्या करें?

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किसानों की इस बदहाली को देखते हुए प्रशासन ने भी एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह मौर्य ने बताया कि जिन किसानों ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PM Fasal Bima Yojana) के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है, वे नुकसान होने की स्थिति में तुरंत कदम उठाएं।
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    क्या करें: फसल क्षति की सूचना 72 घंटे के अंदर टोल-फ्री नंबर 14447 पर दर्ज कराएं।
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    वैकल्पिक उपाय: किसान सीधे जिला कृषि अधिकारी या उप कृषि निदेशक कार्यालय में जाकर भी अपनी लिखित शिकायत दे सकते हैं, जिसके बाद बीमा कंपनी सर्वे करके क्षतिपूर्ति प्रदान करेगी।
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सेहत पर मंडराता बीमारियों का खतरा

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एक तरफ बदले हुए मौसम ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, तो वहीं आम जनमानस के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। हर पल बदलते मौसम की वजह से वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और गले के इन्फेक्शन के मरीजों की संख्या अस्पतालों में तेजी से बढ़ गई है।
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दिन में धूप निकलने से गर्मी का एहसास होता है, जबकि शाम होते ही यूपी में बेमौसम बारिश और सर्द हवाएं ठंड बढ़ा देती हैं। लोगों में इस बात को लेकर भारी असमंजस है कि वे ठंडे पानी और आइसक्रीम का सेवन करें या नहीं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक मौसम पूरी तरह से साफ और स्थिर नहीं हो जाता, तब तक खान-पान में विशेष सावधानी बरतें और बच्चों को बदलते मौसम से बचाकर रखें।
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क्या मानसून पर पड़ेगा असर? बीते सालों के आंकड़े

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मार्च-अप्रैल में इस ठंड और बारिश को देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर आने वाले मानसून पर पड़ेगा? क्या मानसून देरी से आएगा? इस पर प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव ने राहत भरी खबर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यूपी में बेमौसम बारिश का मानसूनी हवाओं से कोई लेना-देना नहीं है।
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मानसून की चाल मुख्य रूप से मई और जून के महीने में होने वाली 'हीटिंग' (तपन) और 'मॉस्चर' (नमी) पर निर्भर करती है। अनुमान है कि इस साल भारत में मानसून समय पर और बहुत अच्छा आएगा।
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अगर हम बीते कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मार्च के महीने में बारिश पहले भी दर्ज की गई है:

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    11 मार्च 2015: 28.4 मिलीमीटर
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    02 मार्च 2016: 18.6 मिलीमीटर
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    09 मार्च 2020: 22.3 मिलीमीटर
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    20 मार्च 2023: 18 मिलीमीटर
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कुल मिलाकर, यूपी में बेमौसम बारिश ने पूरे प्रदेश के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के मिजाज को समझना अब पहले जितना आसान नहीं रहा। 9 अप्रैल तक प्रदेशवासियों और विशेषकर किसानों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। सरकार और कृषि विभाग को भी इस मुश्किल घड़ी में अन्नदाताओं के साथ खड़ा होना होगा ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। उम्मीद है कि 10 अप्रैल के बाद मौसम सामान्य होगा और जनजीवन फिर से पटरी पर लौट सकेगा।
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उत्तर प्रदेश में मार्च और अप्रैल के महीने में हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों और आम जनता की परेशानियां बढ़ा दी हैं। BHU के विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसमी बदलाव का मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) है, जिसका जलवायु परिवर्तन के कारण समय चक्र बदल गया है। मौसम विभाग ने 7 से 9 अप्रैल तक तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे गेहूं और सरसों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने प्रभावित किसानों को 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर फसल बीमा क्लेम दर्ज कराने की सलाह दी है। राहत की बात यह है कि इस बेमौसम बारिश का आगामी मानसून पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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