शामली (लोकल डेस्क): उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी (Heatwave) और आसमान से बरसती आग की चपेट में है। पारा लगातार अपने रिकॉर्ड तोड़ रहा है और गर्म लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस चिलचिलाती धूप में सबसे ज्यादा जरूरत अगर किसी चीज की होती है, तो वह है 'ठंडा पानी'। लेकिन, शामली जिले के सबसे प्रमुख और व्यस्त ग्रामीण व्यापारिक केंद्रों में शुमार हसनपुर लुहारी में राहगीर और आम जनता एक घूंट ठंडे पानी के लिए तरस रही है।READ ALSO:-शामली में मंत्री दिनेश खटीक की हुंकार: 'विकास के साथ विरासत से जुड़ रहा नया भारत', धर्मांतरण कराने वालों को दी सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हसनपुर लुहारी के मुख्य बाजार, बस स्टैंड और बाईपास मार्ग पर सार्वजनिक पेयजल (Drinking Water) की कोई व्यवस्था नहीं है। चिलचिलाती धूप में यहां आने वाले हजारों लोगों के लिए यह स्थिति किसी बुरे सपने से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और राहगीरों ने अब प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं के खिलाफ अपना रोष प्रकट करते हुए जल्द से जल्द सार्वजनिक वाटर कूलर (Water Cooler) स्थापित करने की पुरजोर मांग उठाई है। आइए, इस पूरे जल संकट और लोगों की परेशानियों का जमीनी स्तर पर विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
\r\n\r\n

 

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n

हसनपुर लुहारी: एक प्रमुख बाजार जहां सुविधाओं का है भारी अकाल

\r\n\r\n
हसनपुर लुहारी कोई छोटा-मोटा कस्बा नहीं है, बल्कि यह शामली जिले के ग्रामीण अंचल का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण व्यापारिक हब (Commercial Hub) है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    हजारों की दैनिक आवाजाही: इस क्षेत्र का प्रमुख बाजार होने के कारण यहां प्रतिदिन आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों लोग आते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    व्यापारिक केंद्र: ग्रामीण यहां घरेलू सामान, कपड़े, रोजमर्रा के राशन से लेकर भारी-भरकम कृषि उपकरण (Agricultural Equipment) और खाद-बीज की खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    यातायात का मुख्य साधन: हसनपुर लुहारी का बस स्टैंड और बाईपास वह जगह है, जहां से लोग दूसरे शहरों और गांवों के लिए बसें या डग्गामार वाहन पकड़ते हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इतनी बड़ी आबादी और इतने भारी फुटफॉल (Footfall) के बावजूद, इस पूरे इलाके में सरकारी या प्रशासनिक स्तर पर पीने के पानी का एक भी सार्वजनिक नल, प्याऊ या वाटर कूलर मौजूद नहीं है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक मूलभूत सुविधा (Basic Amenity) का यह अकाल प्रशासनिक लापरवाही की एक जीती-जागती तस्वीर पेश कर रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की टूट रही है सांसें

\r\n\r\n
गर्मी के मौसम में जब तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा हो, तब बाजार की भीड़भाड़ में चलना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। इस स्थिति का सबसे बड़ा खामियाजा उन कमजोर वर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जो शारीरिक रूप से इस भीषण गर्मी को सहने में असमर्थ हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    निजी दुकानों का लेना पड़ता है सहारा: सार्वजनिक स्थान पर पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बाजार में आने वाले लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरी में निजी प्रतिष्ठानों या दुकानों पर पानी मांगना पड़ता है। कई बार दुकानदार भीड़ देखकर पानी पिलाने से मना कर देते हैं या फिर लोगों को झिझक के कारण प्यासा ही रहना पड़ता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    डिहाइड्रेशन का खतरा: चिलचिलाती धूप में बिना पानी के घंटों तक बस स्टैंड पर बस का इंतजार करने वाले यात्रियों, खासकर बच्चों और महिलाओं में डिहाइड्रेशन (Dehydration) और हीटस्ट्रोक (Heatstroke) यानी लू लगने का गंभीर खतरा बना रहता है। कई बार चक्कर खाकर गिरने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मजदूरों का हाल बेहाल: बाजार में लोडिंग-अनलोडिंग का काम करने वाले पल्लेदार और दिहाड़ी मजदूर, जो दिन भर धूप में पसीना बहाते हैं, उनके लिए ठंडा पानी किसी अमृत से कम नहीं है। लेकिन उन्हें भी एक बोतल पानी के लिए 20 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जो उनकी दिनभर की दिहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा होता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा: "समय की सबसे बड़ी जरूरत है वाटर कूलर"

\r\n\r\n
पानी की इस भारी किल्लत और प्रशासन की अनदेखी से नाराज होकर अब स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। हसनपुर लुहारी के निवासी और सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले ग्रामीण अनुज, लवकुमार, दीपक और सन्नी ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इन युवाओं का स्पष्ट कहना है कि:

\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"अगर गांव के मुख्य मार्गों, खासकर बस स्टैंड और मुख्य बाजार के चौराहों पर वाटर कूलर स्थापित कर दिए जाएं, तो दूर-दराज से आने वाले राहगीरों और ग्रामीणों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। क्षेत्र में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए सार्वजनिक पेयजल की व्यवस्था अब कोई लग्जरी नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ग्रामीणों का मानना है कि 'जल सेवा' (Jal Seva) भारतीय संस्कृति में सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। एक समय था जब लोग स्वेच्छा से सड़कों के किनारे प्याऊ (Pyaau) लगवाया करते थे, लेकिन आज के इस आधुनिक दौर में प्रशासन और संपन्न लोग भी इस बुनियादी जरूरत से मुंह मोड़े हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जनता की आवाज: क्या कहते हैं स्थानीय लोग और व्यापारी? (Voices from the Ground)

\r\n\r\n
इस ज्वलंत समस्या पर जब स्थानीय निवासियों और बाजार के नियमित ग्राहकों से बात की गई, तो उनका दर्द और गुस्सा साफ छलक कर सामने आया। लोगों ने अपनी बात को प्रमुखता से रखते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तुरंत एक्शन लेने की अपील की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वर्जन (Quote) - 1: गौरव सिंघल

\r\n\r\n
"हसनपुर लुहारी इस पूरे क्षेत्र का सबसे प्रमुख बाजार है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग अपनी दैनिक जरूरतों की खरीदारी के लिए आते हैं। भीषण गर्मी का यह आलम है कि लोगों को एक घूंट पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। बाजार में सार्वजनिक वाटर कूलर जल्द से जल्द लगाया जाना चाहिए, जिससे भीषण गर्मी में झुलस रहे राहगीरों को फौरी राहत मिल सके।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वर्जन (Quote) - 2: अनुज सैनी

\r\n\r\n
"बाजार में आस-पास के दर्जनों दूर-दराज के गांवों से लोग तपती धूप में सफर करके आते हैं। गर्मी के मौसम में यहां पेयजल की कोई व्यवस्था न होने से उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन (Administration) और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों (विधायक/ग्राम प्रधान) को जनहित को सर्वोपरि रखते हुए बाजार के प्रमुख स्थानों और बस स्टैंड पर तत्काल वाटर कूलर लगवाना चाहिए, ताकि हर राहगीर को मुफ्त और स्वच्छ पेयजल मिल सके।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं से एक बड़ी अपील

\r\n\r\n
हसनपुर लुहारी में पेयजल संकट की यह स्थिति सीधे तौर पर व्यवस्था की नाकामी को दर्शाती है। ग्रामीणों ने इस रिपोर्ट के माध्यम से शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की भूमिका: स्थानीय ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट होता है। जनहित के इस कार्य के लिए पंचायत निधि का इस्तेमाल कर तुरंत बस स्टैंड और बाजार के मुख्य चौराहे पर इंडिया मार्का हैंडपंप के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाटर कूलर (Electric Water Cooler) की स्थापना की जानी चाहिए।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    विधायक और सांसद निधि का उपयोग: क्षेत्रीय विधायक और सांसद को भी जनता की इस छोटी लेकिन सबसे जरूरी मांग पर ध्यान देना चाहिए। उनकी निधि का एक छोटा सा हिस्सा हजारों लोगों की प्यास बुझा सकता है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    समाजसेवी संस्थाओं (NGOs) और दानदाताओं का आह्वान: जो व्यापार मंडल या समाजसेवी संस्थाएं इलाके में सक्रिय हैं, उन्हें कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) या निजी चंदे के माध्यम से आगे आना चाहिए। गर्मी के इन 3-4 महीनों के लिए अस्थाई प्याऊ की व्यवस्था भी एक बड़ा समाधान हो सकती है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्यास बुझाना सिर्फ प्रशासन का नहीं, इंसानियत का भी फर्ज है

\r\n\r\n
'जल ही जीवन है' यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में तपते हुए किसी भी इंसान की सबसे बड़ी सच्चाई है। शामली जिले के हसनपुर लुहारी में पानी के लिए मची यह हाहाकार इस बात का संकेत है कि हम विकास की अंधी दौड़ में बुनियादी नागरिक सुविधाओं (Basic Civic Amenities) को बहुत पीछे छोड़ आए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब देखना यह है कि ग्रामीणों, युवाओं और व्यापारियों की इस जोरदार मांग का प्रशासन पर क्या असर होता है। क्या शामली जिले के आला अधिकारी (DM/SDM) इस खबर का संज्ञान लेकर हसनपुर लुहारी के लोगों की प्यास बुझाने का इंतजाम करेंगे, या फिर राहगीरों को यूं ही चिलचिलाती धूप में एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा? प्रशासन को यह समझना होगा कि एक वाटर कूलर सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि इस चिलचिलाती गर्मी में जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा साधन है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें