शामली: उत्तर प्रदेश में मानसून (Monsoon) की दस्तक अब बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है। बरसात का मौसम यूं तो चिलचिलाती गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह अक्सर जलभराव, कीचड़ और भयंकर संक्रामक बीमारियों (Infectious Diseases) का खौफ भी साथ लाता है। आमतौर पर बारिश शुरू होने के बाद प्रशासन जागता है, लेकिन शामली (Shamli) जिले के विकास खंड थानाभवन की ग्राम पंचायत हसनपुर लोहारी (Hasanpur Lohari) ने पूरे प्रदेश के सामने जागरूकता और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।READ ALSO:-बिजनौर दहेज हत्या: शादी के महज 50 दिन बाद नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, परिजनों ने ससुरालियों पर लगाया जहर देकर मारने का गंभीर आरोप
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यहाँ मानसून के आने से पहले ही ग्राम प्रधान रजिया कुरैशी (Raziya Qureshi) और उनके पति व वरिष्ठ समाजसेवी सलीम कुरैशी (Salim Qureshi) ने गांव को जलभराव मुक्त बनाने के लिए कमर कस ली है। इनके नेतृत्व में पूरे गांव में युद्धस्तर पर एक ऐतिहासिक महा-सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का एकमात्र लक्ष्य है— 'स्वच्छ गांव, स्वस्थ गांव'। गांव की सभी छोटी-बड़ी नालियों और मुख्य नालों की मुकम्मल सफाई की जा रही है, ताकि इस बार बरसात के मौसम में ग्रामीणों को जलभराव और मच्छरों के आतंक से न जूझना पड़े।
\r\n\r\n

 

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n
आइए, इस वृहद सफाई अभियान की जमीनी हकीकत, इसकी रणनीतियों और इसके दूरगामी फायदों को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

प्रधान ने खुद संभाला मोर्चा: सड़कों पर उतरकर दे रहीं दिशा-निर्देश

\r\n\r\n
अक्सर देखा जाता है कि जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद वातानुकूलित कमरों में बैठकर आदेश देते हैं, लेकिन हसनपुर लोहारी की तस्वीर बिल्कुल अलग है। ग्राम प्रधान रजिया कुरैशी इस महा-सफाई अभियान को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर उतार रही हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सफाई कर्मियों की बनाई गईं टोलियां: पूरे गांव को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर सफाई कर्मचारियों की विशेष टोलियां (Teams) गठित की गई हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    निगरानी तंत्र: ग्राम प्रधान रजिया कुरैशी खुद मौके पर मौजूद रहकर इन टोलियों के काम की निगरानी कर रही हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सिल्ट (गाद) की निकासी: उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल ऊपर-ऊपर का कूड़ा न उठाया जाए, बल्कि नालियों की तली में बैठी सिल्ट (Silt) और गाद को पूरी तरह से बाहर निकाला जाए।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
रजिया कुरैशी का मानना है कि, "मानसून के दौरान अक्सर नालियां चोक हो जाती हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है और लोगों के घरों के सामने जमा हो जाता है। इससे न सिर्फ ग्रामीणों का आवागमन बाधित होता है, बल्कि गांव का पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। हमारी कोशिश है कि बारिश की पहली बूंद गिरने से पहले ही पूरे गांव का ड्रेनेज सिस्टम (Drainage System) शीशे की तरह साफ हो जाए।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मच्छरों और बीमारियों पर 'डबल अटैक' (Attack on Vector-Borne Diseases)

\r\n\r\n
बरसात के दिनों में ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ा खतरा मौसमी और जलजनित बीमारियों का होता है। गंदे पानी का ठहराव मच्छरों के लिए सबसे बड़ा ब्रीडिंग ग्राउंड (Breeding Ground) बनता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस महा-सफाई अभियान के जरिए ग्राम पंचायत का मुख्य फोकस बीमारियों की रोकथाम पर है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    मलेरिया और डेंगू से बचाव: नालियों से कूड़ा और सिल्ट निकलने के बाद पानी का प्रवाह सुचारू हो जाएगा। रुके हुए पानी के न होने से एडीज (डेंगू) और एनाफिलीज (मलेरिया) जैसे मच्छरों का लार्वा पैदा नहीं हो पाएगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    टायफाइड और डायरिया पर लगाम: अक्सर जलभराव के कारण गंदा पानी पीने के पानी की लाइनों (हैंडपंप या पाइपलाइन) में रिस कर मिल जाता है, जिससे टायफाइड और डायरिया जैसी घातक बीमारियां फैलती हैं। नाले-नालियों की मुकम्मल सफाई से इस खतरे को भी शून्य किया जा रहा है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    दवाओं का छिड़काव: सफाई के तुरंत बाद नालियों में एंटी-लार्वा रसायनों और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि कीटाणुओं का पूरी तरह से खात्मा हो सके।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जल निकासी के लिए सलीम कुरैशी का 'मास्टरप्लान'

\r\n\r\n
ग्राम पंचायत की इस पूरी कवायद में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और इलाके के जाने-माने समाजसेवी सलीम कुरैशी की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने इस अभियान को सिर्फ एक 'सफाई अभियान' न मानकर इसे एक 'तकनीकी सुधार' का रूप दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सलीम कुरैशी ने बताया कि इस बार ग्राम पंचायत ने जल निकासी (Water Drainage) के लिए एक ठोस और वैज्ञानिक रणनीति बनाई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    हॉटस्पॉट की पहचान (Identifying Hotspots): गांव के उन निचले हिस्सों और मोड़ों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है, जहां हर साल बारिश का पानी सबसे ज्यादा भरता था और कई-कई दिनों तक नहीं निकलता था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ड्रेनेज का ढलान सुधारना: इन चिन्हित जगहों पर ड्रेनेज की व्यवस्था को इस तरह से दुरुस्त किया जा रहा है कि भारी से भारी बारिश होने पर भी पानी एक जगह इकट्ठा न हो और ढलान के जरिए सुचारू रूप से आगे बड़े नालों की ओर बह जाए।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने बताया, "हमारा मकसद सिर्फ आज की सफाई नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम तैयार करना है जो आने वाले कई सालों तक गांव को जलभराव से मुक्त रखे।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्रामीणों से खास अपील: 'पॉलिथीन से करें तौबा'

\r\n\r\n
सिर्फ प्रशासन या ग्राम पंचायत के प्रयासों से कोई भी गांव तब तक साफ नहीं रह सकता, जब तक वहां की जनता उसमें अपना पूरा सहयोग न दे। इस बात को समझते हुए सलीम कुरैशी और रजिया कुरैशी ने ग्रामीणों को जागरूक करने का भी बीड़ा उठाया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अभियान के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को समझें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कूड़े का सही निस्तारण: घरों का कूड़ा, प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट या पॉलिथीन (Polythene) भूलकर भी खुली नालियों में न डालें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    प्लास्टिक है ड्रेनेज का सबसे बड़ा दुश्मन: पॉलिथीन नालियों में जाकर फंस जाती है और एक मजबूत 'डैम' (बांध) का काम करती है, जिससे पूरे इलाके का पानी रुक जाता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सहयोग की भावना: प्रशासन सफाई कर सकता है, लेकिन उस सफाई को बनाए रखना गांव के हर नागरिक का कर्तव्य है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बाजार और मुख्य रास्तों पर दिखा सीधा असर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

\r\n\r\n
इस महा-सफाई अभियान का असर अब जमीन पर साफ तौर पर दिखने लगा है। पिछले कुछ दिनों में गांव के प्रमुख रास्तों, चौराहों और मुख्य बाजार के पास स्थित बड़े नालों की युद्धस्तर पर सफाई की गई है। इन नालों से भारी मात्रा में बरसों पुरानी सिल्ट, कीचड़ और अटका हुआ कूड़ा बाहर निकाला गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ग्राम प्रधान व उनके पति की इस तत्परता (Proactiveness) और मेहनत को देखकर हसनपुर लोहारी के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है, "पहले हमें बरसात के नाम से ही डर लगने लगता था क्योंकि सड़कें तालाब बन जाती थीं। लेकिन इस बार प्रधान जी ने जो काम मानसून से पहले शुरू कराया है, वह काबिले तारीफ है। अगर हर साल इसी तरह मानसून से पहले ईमानदारी से सफाई हो जाए, तो हमारे गांव को जलभराव और मौसमी बीमारियों से पूरी तरह बचाया जा सकता है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अन्य पंचायतों के लिए बनी नजीर

\r\n\r\n
हसनपुर लोहारी ग्राम पंचायत में चल रहा यह सफाई अभियान शामली जिले और पूरे उत्तर प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक शानदार नजीर (Example) बन गया है। यह साबित करता है कि अगर ग्राम प्रधान के पास दूरदृष्टि (Vision), काम करने की इच्छाशक्ति और जनता के प्रति सच्ची जवाबदेही हो, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान समय रहते निकाला जा सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उम्मीद की जानी चाहिए कि रजिया कुरैशी और सलीम कुरैशी के इस प्रयास से प्रेरणा लेकर अन्य पंचायतें भी मानसून से पहले अपने ड्रेनेज सिस्टम को सुधारेंगी, ताकि ग्रामीण भारत सही मायनों में 'स्वच्छ' और 'स्वस्थ' बन सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें