आने वाले समय में सिगरेट, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पाद महंगे होने वाले हैं। केंद्र सरकार इन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स का बोझ बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश करने जा रही है: सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस (Health Security to National Security Cess) विधेयक।READ ALSO:-मेरठ को जाम से मिलेगी 'आजादी': बेगमपुल से गांधी बाग तक बनेगा 700 मीटर लंबा फ्लाईओवर, ₹59 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा
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इन बिलों के माध्यम से सरकार क्षतिपूर्ति सेस की अवधि समाप्त होने के बाद भी इन उत्पादों पर राजस्व का संग्रह सुनिश्चित करेगी और लोगों को इनकी खपत के लिए हतोत्साहित करेगी।
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नए कानून क्यों लाए जा रहे हैं?

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वर्तमान में, तंबाकू उत्पाद महंगे होने के बावजूद भी इनकी बिक्री जारी है और सरकार इन पर 28% जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति सेस वसूलती है। क्षतिपूर्ति सेस की अवधि अगले साल मार्च में समाप्त हो जाएगी।
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क्षतिपूर्ति सेस समाप्त होने के बाद:

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    राजस्व की हानि: कानूनी तौर पर सरकार क्षतिपूर्ति सेस नहीं लगा सकेगी, जिससे राजस्व पर बड़ा फर्क पड़ेगा।
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    टैक्स की कमी: क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने से इन उत्पादों पर टैक्स कम हो जाएगा, जिससे इनकी खपत बढ़ सकती है।
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इस दोहरी चुनौती से निपटने के लिए, सरकार एक्साइज संशोधन बिल और स्वास्थ्य सुरक्षा सेस कानून ला रही है, ताकि राजस्व की भरपाई हो सके और लोगों को इन उत्पादों की खपत के लिए हतोत्साहित किया जा सके।
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सिगरेट पर कितना बढ़ेगा टैक्स?

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सेंट्रल एक्साइज संशोधन बिल 2025 में विभिन्न तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।
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उत्पाद
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पुरानी दर (प्रति 1000 पीस)
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प्रस्तावित नई दर (प्रति 1000 पीस)
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सिगार
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12% या ₹4006 (जो भी अधिक हो)
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25% या ₹5000 (जो भी अधिक हो)
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65 MM की सिगरेट
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₹440
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₹3000
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65-70 MM फिल्टर सिगरेट
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₹440
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₹5200
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70 MM से बड़ी सिगरेट
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₹545
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₹7000
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यह प्रस्तावित बढ़ोतरी तंबाकू उत्पादों के खुदरा मूल्यों में एक बड़ी उछाल लाएगी।
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उत्पादन क्षमता पर लगेगा नया सेस

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स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस के तहत एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अभी तक यह सेस उत्पादित माल की संख्या पर लगता था, लेकिन अब इसे मशीन की उत्पादन क्षमता (Production Capacity) पर लगाया जाएगा। 
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इसका मतलब है कि अगर किसी मशीन की उत्पादन क्षमता 100 यूनिट है, लेकिन उत्पादन केवल 50 यूनिट ही हो रहा है, तो भी सेस 100 यूनिट की क्षमता पर ही वसूला जाएगा। इससे कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा, जिससे तंबाकू उत्पाद महंगे होंगे और इसकी बिक्री पर नियंत्रण लग सकेगा।
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राजस्व और लोन की भरपाई

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वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के समय, राज्यों को वित्तीय मदद देने के लिए क्षतिपूर्ति सेस शुरू किया गया था। कोरोना काल में संग्रह कम होने पर केंद्र ने राज्यों को वित्तीय सहायता देने के लिए लोन लिया था, जिसकी भरपाई के लिए यह सेस अभी भी वसूला जा रहा है। अगले साल मार्च तक लोन खत्म होने के बाद, नए बिल राजस्व की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे।
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एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी का सीधा फायदा राज्यों को भी होगा, क्योंकि केंद्र के इस राजस्व में राज्यों का भी हिस्सा होता है। 
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GST स्लैब का भविष्य

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वर्तमान में तंबाकू और पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी ही लिया जा रहा है, जबकि जीएसटी काउंसिल के सितंबर में हुए फैसले के तहत 28 प्रतिशत के स्लैब को खत्म कर 40 प्रतिशत का नया स्लैब लाया गया था। वित्त मंत्री (जो जीएसटी काउंसिल की चेयरपर्सन हैं) इस पर फैसला लेंगी कि इन हानिकारक उत्पादों को 40 प्रतिशत के नए स्लैब में कब डाला जाएगा, जिससे इनकी कीमतें और भी बढ़ जाएंगी।
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सरकार सिगरेट, पान मसाला समेत सभी तंबाकू उत्पाद महंगे करने की तैयारी में है। सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) 2025 बिल के तहत सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में भारी वृद्धि का प्रस्ताव है, जबकि स्वास्थ्य सुरक्षा सेस अब मशीन की उत्पादन क्षमता पर लगेगा। ये कदम राजस्व की भरपाई करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
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