उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में तेजी से बदलते मौसम और लगातार खराब हो रही हवा ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। Meerut Weather Pollution Updates के अनुसार, शहर में धुंध, गिरते तापमान और प्रदूषण के कारण लोगों की सेहत पर सीधा असर दिखाई दे रहा है। मंगलवार को मेरठ शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 169 के चिंताजनक स्तर पर दर्ज किया गया। दिन और रात के तापमान में आ रहे लगातार उतार-चढ़ाव और प्रदूषित हवा के चलते शहर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इन अस्पतालों में सबसे ज्यादा मरीज सांस लेने में तकलीफ, पुरानी खांसी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
खराब हवा और बदलते मौसम का सबसे ज्यादा खामियाजा घर के बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है। मेरठ के मेडिकल कॉलेज में रोजाना 70 से 80 मरीज केवल सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अजीत चौधरी ने वर्तमान स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि छोटे बच्चों में निमोनिया के मामले भी अचानक बढ़ने लगे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) वयस्कों के मुकाबले कमजोर होती है, जिसके कारण वे हवा में मौजूद संक्रमण और बदलते तापमान की चपेट में बहुत जल्दी आ रहे हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ रही है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶शहर के वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन त्यागी ने भी इस बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी तापमान में बार-बार उतार-चढ़ाव होता है और मौसम एकदम से बदलता है, तो मनुष्य के शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) सीधे तौर पर प्रभावित होता है। इसी कारण से इन दिनों लोगों में निमोनिया और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। डॉ. त्यागी के अनुसार, अस्पतालों में स्थिति यह है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर ओपीडी में छाती और सांस से जुड़े मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, जो प्रदूषण के सीधे प्रभाव को दर्शाता है।

प्रदूषण और संक्रमण के इस दोहरे खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बचाव के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। डॉ. त्यागी ने बताया कि जिन बुजुर्गों को सांस की बीमारी पहले से है या जिन्हें सांस लेने में अधिक परेशानी हो रही है, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह पर नेबुलाइजर का इस्तेमाल करने को कहा जा रहा है। डॉक्टरों का सख्त कहना है कि इस मौसम में बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही या घरेलू नुस्खों पर निर्भरता स्वास्थ्य के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
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चिकित्सकों ने सभी शहरवासियों से अपील की है कि वायु प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय अच्छे मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें। इसके अलावा, सुबह और शाम के समय जब हवा में धुंध और प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है, तब बेवजह खुले में बाहर निकलने या सैर करने से पूरी तरह बचें। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में थोड़ी भी कठिनाई हो रही है, लगातार खांसी आ रही है या फेफड़ों में संक्रमण के कोई भी शुरुआती लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना देर किए तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें और उचित इलाज शुरू करवाएं।
Sabse pehle comment karne wale banein.