बिजनौर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार का दिन भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच गुजरा। Bijnor DM Lawyer Clash की इस घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह और एक स्थानीय अधिवक्ता के बीच अचानक हुई तीखी नोकझोंक के बाद मामला काफी गरमा गया। घटना से नाराज अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट में भारी संख्या में इकट्ठा होकर डीएम कार्यालय के ठीक बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विवाद की शुरुआत एक पीड़ित व्यक्ति की समस्या को लेकर हुई। अधिवक्ता रामेन्द्र सिंह का आरोप है कि वह बुधवार को एक फरियादी की गुहार लेकर जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह के पास पहुंचे थे। वकील का दावा है कि बातचीत के दौरान डीएम ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उनका यह भी आरोप है कि जिलाधिकारी ने उन्हें अपने कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया।
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अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता की खबर जैसे ही कचहरी परिसर में फैली, वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में स्थानीय वकील अपना कामकाज छोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने डीएम कार्यालय के बाहर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए। इस विरोध प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति बनी रही।

दूसरी तरफ, जिला प्रशासन ने Bijnor DM Lawyer Clash मामले में अधिवक्ता रामेन्द्र सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राम प्यारे जायसवाल ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए घटना की असल वजह बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के समय जिलाधिकारी अपनी नियमित जनसुनवाई (Jansunwai) कर रहे थे और एक पीड़ित व्यक्ति की समस्या को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे।
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प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अधिवक्ता रामेन्द्र सिंह फरियादी के साथ दो अन्य लोगों को लेकर कार्यालय में पहुंचे थे। इस पर डीएम ने केवल इतना कहा था कि पीड़ित अपनी समस्या बताने के लिए अकेले भी आ सकता था। प्रशासन का दावा है कि इसी बात पर अधिवक्ता अचानक नाराज हो गए और जिलाधिकारी के सामने ऊंची आवाज में बहस करने लगे। प्रशासन ने डीएम की ओर से किसी भी प्रकार के अभद्र व्यवहार से पूरी तरह इनकार किया है।
कलेक्ट्रेट में वकीलों के धरने और हंगामे की गंभीरता को देखते हुए जिले के तमाम आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। एडीएम प्रशासन अंशिका दीक्षित और एडीएम वित्त एवं राजस्व देवेंद्र पाल ने हालात को संभालने का मोर्चा संभाला। इसके साथ ही शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, एसडीएम सदर स्मृति मिश्रा और तहसीलदार भी वहां पहुंचे।

सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने आक्रोशित अधिवक्ताओं से लंबी बातचीत कर मामले को शांत कराने का पूरा प्रयास किया। दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर विवाद का समाधान निकालने की कोशिशें जारी हैं। जिलाधिकारी कार्यालय में हर दिन दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों लोग अपनी फरियाद लेकर आते हैं। प्रशासन लगातार यही प्रयास कर रहा है कि आपसी समन्वय के जरिए इस विवाद का स्थाई समाधान निकाला जाए, ताकि जनसुनवाई और कलेक्ट्रेट का कामकाज फिर से सुचारू रूप से चल सके।
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