समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने और आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में एक महत्वपूर्ण Legal Literacy Camp Bijnor (विधिक साक्षरता शिविर) का सफल आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिजनौर के सख्त निर्देशों के अनुपालन में यह शिविर खण्ड विकास अल्हैपुर के अंतर्गत आने वाले कम्पोजिट विद्यालय, मिलक जहांगीराबाद में संपन्न हुआ। इस विशेष जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और समाज के लोगों को बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूक करना और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पराविधिक स्वयं सेवक (पैरा लीगल वॉलंटियर) जयवीर सिंह ने हिस्सा लिया। उन्होंने वहां उपस्थित छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए बाल विवाह के गंभीर परिणामों पर विस्तार से चर्चा की। जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के अनुसार विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़कों की उम्र 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है घातक असर पराविधिक स्वयं सेवक ने बताया कि यदि निर्धारित कानूनी उम्र से पहले किसी बच्चे की शादी कर दी जाती है, तो इसका सबसे बुरा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर गंभीर और घातक खतरों की ओर धकेल दिया जाता है। इस उम्र में उनका शरीर और मस्तिष्क वैवाहिक जिम्मेदारियों के लिए परिपक्व नहीं होता है, जिससे भविष्य में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं।

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शिक्षा के अधिकार का होता है हननLegal Literacy Camp Bijnor के दौरान शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए जयवीर सिंह ने बताया कि बाल विवाह से बच्चों के 'शिक्षा के अधिकार' (Right to Education) का सीधे तौर पर हनन होता है। पढ़ाई बीच में छूट जाने के कारण बच्चे अनपढ़ और अकुशल रह जाते हैं। जब ये बच्चे बड़े होते हैं, तो उन्हें रोजगार के उचित अवसर नहीं मिल पाते हैं, जिसके कारण वे जीवन भर आर्थिक रूप से परेशान रहते हैं। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण कई बार ऐसे युवा असामाजिक कार्यों और अपराधों में लिप्त हो सकते हैं, जो समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।

बाल विवाह कराने वालों को मिलेगी सख्त सजा शिविर में उपस्थित जागरूक नागरिकों और शिक्षकों से अपील की गई कि इस सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने चाहिए। यदि समाज में कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत टोल फ्री नंबर 1098 (चाइल्ड हेल्प लाइन), 181 (महिला हेल्प लाइन) या पुलिस के आपातकालीन नंबर 112 पर दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम में कानूनी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह कराना एक संज्ञेय अपराध है। जो भी व्यक्ति बाल विवाह संपन्न कराता है या उसमें किसी भी प्रकार का सहयोग करता है, उसके लिए कानून में सख्त सजा का प्रावधान है। ऐसे दोषियों को 2 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी जा सकती है।

इस महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता शिविर में कम्पोजिट विद्यालय मिलक जहांगीराबाद के छात्र-छात्राएं और सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं पूर्ण रूप से उपस्थित रहे। सभी ने ध्यानपूर्वक कानूनी जानकारियों को सुना और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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