अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही भयंकर जंग के बीच वैश्विक सर्राफा बाजार (Bullion Market) में एक अप्रत्याशित भूचाल आ गया है। आम तौर पर जब भी दुनिया में युद्ध या अनिश्चितता का माहौल होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ भागते हैं, जिससे इसके दाम आसमान छूने लगते हैं। लेकिन इस बार का परिदृश्य बिल्कुल उलट है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का ऐसा दौर शुरू हुआ है जिसने बड़े-बड़े निवेशकों और आर्थिक विश्लेषकों को हैरत में डाल दिया है।READ ALSO:-पेट्रोल-डीजल पर सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक': कच्चे तेल में उबाल और ईरान युद्ध के बीच एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी; समझिए कैसे बची आम आदमी की जेब?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बाजार में सोने और चांदी के भाव औंधे मुंह गिर गए हैं। इस अभूतपूर्व गिरावट ने सर्राफा बाजार के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत और एक्सक्लूसिव बिजनेस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर युद्ध के इस माहौल में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है, अलग-अलग शहरों में इसके दाम क्यों बदलते हैं, और कमोडिटी एक्सपर्ट्स आम खरीदारों को क्या सलाह दे रहे हैं।
\r\n\r\n
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़े और क्रैश का गणित
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
भारत में सोने और चांदी की थोक कीमतों का निर्धारण मुख्य रूप से इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा किया जाता है। IBJA के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, कीमती धातुओं के बाजार में भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) और 'पैनिक सेलिंग' देखने को मिल रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सोने की कीमतों में भारी सेंध: ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट (24 Carat) शुद्ध सोने की कीमत में एक ही झटके में 2,490 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के बाद 10 ग्राम सोने का भाव लुढ़ककर 1.44 लाख रुपये पर आ गया है। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, बुधवार को सोने का यही भाव 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अगर हम पिछले 28 दिनों के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो अमेरिका-ईरान जंग की सुगबुगाहट और शुरुआत के बाद से अब तक सोना 15,382 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
चांदी ने तोड़े गिरावट के रिकॉर्ड: सोने से भी ज्यादा बुरा हाल 'गरीबों का सोना' कही जाने वाली चांदी (Silver) का है। औद्योगिक मांग (Industrial Demand) घटने और वैश्विक मंदी की आहट के कारण चांदी की कीमतों में भारी क्रैश देखा गया है। एक किलोग्राम चांदी की कीमत में सीधे 9,114 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के साथ ही एक किलो चांदी का भाव 2.25 लाख रुपये पर आ गया है। आपको बता दें कि कुछ ही दिन पहले 25 मार्च 2026 को चांदी 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी। पिछले 28 दिनों के भीतर चांदी ने निवेशकों को भारी झटका देते हुए 41,000 रुपये प्रति किलोग्राम का गोता लगाया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.44 लाख तक का गोता

\r\n\r\n
साल 2026 की शुरुआत सर्राफा बाजार के लिए बेहद शानदार रही थी। ऐसा लग रहा था कि सोना इस साल सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर देगा, और उसने किया भी। लेकिन उसके बाद जो ढलान शुरू हुई, वह अब तक जारी है। आइए समझते हैं कि पिछले कुछ महीनों में सोने ने कैसा सफर तय किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): पिछले साल के अंत में सोना 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के एक मजबूत और स्थिर स्तर पर था। उस समय बाजार में सकारात्मक माहौल था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): नए साल के पहले ही महीने में सोने ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई। वैश्विक केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की भारी खरीदारी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते 29 जनवरी 2026 को सोना अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर (All-Time High) 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह सिर्फ एक महीने के भीतर आया एक अभूतपूर्व उछाल था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मौजूदा स्थिति और क्रैश: लेकिन यह तेजी ज्यादा दिन टिक नहीं सकी। जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा और अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच सीधी जंग की नौबत आई, बाजार का मिजाज बदल गया। अपने 1.76 लाख रुपये के उच्चतम स्तर से गिरकर आज सोना 1.44 लाख रुपये पर आ गया है। यानी उच्चतम स्तर से निवेश करने वालों को अब तक 32 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम का भारी नुकसान हो चुका है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.01 लाख तक

\r\n\r\n
चांदी की चाल हमेशा से सोने के मुकाबले ज्यादा अस्थिर (Volatile) रही है, क्योंकि चांदी का इस्तेमाल न सिर्फ आभूषणों में, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और ईवी (EV) इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर होता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): साल के अंत में चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रही थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): सोने की तर्ज पर चांदी ने भी जनवरी में एक ऐतिहासिक और अकल्पनीय बढ़त हासिल की। सट्टेबाजों और बड़े निवेशकों की भारी मांग के कारण 29 जनवरी को चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    गिरावट का चौंकाने वाला आंकड़ा: लेकिन यह बुलबुला बहुत जल्दी फूट गया। पिछले 57 दिनों के भीतर चांदी ने ऐसा क्रैश देखा है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। यह अपने उच्चतम स्तर से 1.60 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है और वर्तमान में 2.25 लाख रुपये (और कुछ निचले स्तरों पर 2.01 लाख रुपये तक) के आसपास संघर्ष कर रही है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का यह ट्रेंड निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

गिरावट के 3 मुख्य कारण: मेटल छोड़कर 'कैश' पर क्यों बढ़ रहा है भरोसा?

\r\n\r\n
जैसा कि हमने पहले बताया, युद्ध के समय में सोना आमतौर पर महंगा होता है। तो फिर इस बार ऐसा क्या हुआ कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आ रही है? इसके पीछे वैश्विक अर्थशास्त्र और निवेशकों के मनोविज्ञान से जुड़े 3 बड़े कारण हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. कैश इज किंग (नकद की ओर रुझान): जब वैश्विक युद्ध का खतरा मंडराता है, विशेषकर ऐसा युद्ध जिसमें अमेरिका और ईरान जैसी बड़ी शक्तियां शामिल हों, तो बाजार में एक 'लिक्विडिटी क्रंच' (Liquidity Crunch) का डर पैदा हो जाता है। निवेशक अब जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। उन्हें डर है कि युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूट सकती है और आपात स्थिति आ सकती है। ऐसी अनिश्चितता के समय में, बड़े निवेशक और फंड मैनेजर अपने गोल्ड और सिल्वर पोर्टफोलियो को बेचकर 'कैश' (नकद डॉलर) इकट्ठा कर रहे हैं। उनके लिए इस समय लिक्विड मनी सबसे सुरक्षित संपत्ति बन गई है। जब बाजार में अचानक सोने की भारी बिकवाली (Selling) होती है, तो सप्लाई बढ़ने से दाम अपने आप गिर जाते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली): शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार का एक सीधा नियम है- जो चीज जितनी तेजी से ऊपर जाती है, वह मुनाफावसूली का शिकार भी उतनी ही जल्दी होती है। जनवरी 2026 में जब कीमतें 1.76 लाख (सोना) और 3.86 लाख (चांदी) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, तब जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, उन्हें भारी मुनाफा हो रहा था। युद्ध की खबरों के बीच इन बड़े निवेशकों (Whales) ने जोखिम कम करने के लिए ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया। इस भारी प्रॉफिट बुकिंग ने कीमतों को धड़ाम से नीचे गिरा दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का सख्त रुख: सोने की कीमतों का अमेरिकी डॉलर और वहां की ब्याज दरों से उल्टा संबंध (Inverse Relationship) होता है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती करने से हिचकिचा रहा है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने (जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता) के बजाय सरकारी बॉन्ड (Bonds) और डॉलर में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं। इस सख्त रुख ने कीमती धातुओं की चमक को फीका कर दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के दाम क्यों बदलते हैं?

\r\n\r\n
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब सोना एक ही है, तो उत्तर प्रदेश के मेरठ, बिजनौर या लखनऊ में सोने का भाव दक्षिण भारत के चेन्नई या मुंबई से अलग क्यों होता है? इसके पीछे कई स्थानीय और लॉजिस्टिक कारण काम करते हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी कॉस्ट: सोना कोई साधारण वस्तु नहीं है। इसे एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने में भारी भरकम सुरक्षा और विशेष बख्तरबंद गाड़ियों (Armored Vehicles) की जरूरत होती है। आयात केंद्रों (Import Hubs) जैसे मुंबई या दिल्ली के हवाई अड्डों से दूरी जितनी ज्यादा होगी, ट्रांसपोर्टेशन और कड़ी सुरक्षा का खर्च (Insurance & Security Cost) उतना ही बढ़ जाएगा। यही खर्च अंततः प्रति 10 ग्राम सोने के दाम में जोड़ दिया जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. खरीदारी की मात्रा (Volume of Purchase): भारत में सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत (करीब 40%) से आता है। वहां के स्थानीय लोग और ज्वेलर्स बहुत बड़ी मात्रा (Bulk) में सोना खरीदते हैं। जब कोई थोक व्यापारी (Wholesaler) बड़ी मात्रा में आयातकों से सोना खरीदता है, तो उसे भारी छूट (Volume Discount) मिलती है। इस छूट का सीधा फायदा वे अपने ग्राहकों को कम दाम में सोना देकर पहुंचाते हैं। उत्तर भारत के कुछ छोटे शहरों में खरीदारी की मात्रा कम होने के कारण यह छूट नहीं मिल पाती।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
3. लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन का प्रभाव: हर राज्य और कई बड़े शहरों के अपने अलग-अलग सर्राफा और ज्वेलरी एसोसिएशन होते हैं (जैसे उत्तर प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन, मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन आदि)। ये एसोसिएशन अपने क्षेत्र की स्थानीय मांग (Local Demand), सप्लाई चेन की स्थिति और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए सुबह के समय एक 'ओपनिंग रेट' तय करते हैं, जो पूरे शहर में लागू होता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
4. पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य (Inventory Cost): यह भी एक बहुत बड़ा कारक है। मान लीजिए किसी बड़े ज्वेलर ने 3 महीने पहले तब भारी मात्रा में स्टॉक खरीद लिया था जब सोने का भाव बहुत कम था। अब जब बाजार में दाम गिरे हैं, तो वह अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए पुराने और सस्ते रेट वाले स्टॉक पर अतिरिक्त मार्जिन कम करके ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर आभूषण दे सकता है। वहीं, जिसने ऊंचे दामों पर स्टॉक खरीदा है, वह घाटा सहकर नहीं बेचेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की सलाह: क्या अभी निवेश करना सही है?

\r\n\r\n
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट को देखते हुए आम निवेशकों और शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने वालों के मन में यह दुविधा है कि क्या यह सोना खरीदने का सही समय है? इस पर देश के जाने-माने कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया (Ajay Kedia) ने अपनी महत्वपूर्ण राय रखी है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अभी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा है। ग्लोबल मार्केट में अभी भी दहशत का माहौल है और निवेशकों का रुझान 'कैश' की तरफ ही बना हुआ है। उनका साफ कहना है कि, "सोने और चांदी के दाम में आगे भी यह गिरावट जारी रह सकती है। तकनीकी चार्ट्स पर दोनों धातुएं अभी 'बेयरिश जोन' (Bearish Zone) में दिख रही हैं।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने खुदरा निवेशकों (Retail Investors) को सलाह दी है कि उन्हें गिरते हुए बाजार में चाकू पकड़ने (Catching a falling knife) की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में एकमुश्त निवेश (Lump sum investment) से पूरी तरह बचना चाहिए। अगर किसी को घर में शादी के लिए खरीदारी करनी ही है, तो वे किस्तों में (SIP के रूप में) थोड़ी-थोड़ी खरीदारी कर सकते हैं, ताकि कीमतों के और नीचे जाने पर उन्हें औसत (Averaging) का फायदा मिल सके।
\r\n\r\n
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का हमेशा रखें ध्यान
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चाहे बाजार में तेजी हो या सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, एक ग्राहक के रूप में आपको ठगी से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए। आभूषण खरीदते समय इन दो सबसे महत्वपूर्ण बातों का ध्यान जरूर रखें:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. हमेशा सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें (BIS Hallmark): सरकार ने अब सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है। हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। आभूषण पर तीन निशान जरूर चेक करें- पहला BIS का तिकोना लोगो, दूसरा सोने की शुद्धता बताने वाला ग्रेड (जैसे 22K916), और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक HUID कोड (जैसे- AZ4524)। आप अपने स्मार्टफोन में 'BIS Care App' डाउनलोड करके इस HUID कोड को स्कैन कर सकते हैं। यह ऐप तुरंत बता देगा कि वह आभूषण असली है या नकली, और उसे किस ज्वेलर ने हॉलमार्क करवाया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. कीमत और मेकिंग चार्ज को क्रॉस चेक करें: सुनार की दुकान पर जाने से पहले उस दिन का सही भाव जरूर पता कर लें। आप इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट या अपने शहर के स्थानीय सर्राफा एसोसिएशन की साइट से सोने का वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत क्रॉस चेक कर सकते हैं। ध्यान रखें कि सोने का भाव 24 कैरेट (शुद्धतम), 22 कैरेट (आभूषणों के लिए सबसे उपयुक्त) और 18 कैरेट के हिसाब से बिल्कुल अलग-अलग होता है। कई बार ज्वेलर्स 22 कैरेट का आभूषण देकर 24 कैरेट के भाव लगा देते हैं। इसके अलावा, मेकिंग चार्जेस (Making Charges) पर भी मोलभाव जरूर करें, क्योंकि यह हर ज्वेलर का अलग-अलग होता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

असली चांदी की पहचान करने के 4 अचूक तरीके

\r\n\r\n
चांदी खरीदते समय भी धोखाधड़ी की पूरी संभावना रहती है। कई बार बाजार में 'जर्मन सिल्वर' या गिलट (सफेद तांबा) को असली चांदी बताकर बेच दिया जाता है। आप घर बैठे या दुकान पर ही असली चांदी की पहचान इन 4 आसान और अचूक तरीकों से कर सकते हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. मैग्नेट टेस्ट (चुंबक परीक्षण): यह सबसे आसान और त्वरित तरीका है। असली चांदी (Silver) और सोना दोनों ही 'नॉन-मैग्नेटिक' धातुएं हैं। अगर आप चांदी के आभूषण या सिक्के के पास कोई शक्तिशाली चुंबक (Magnet) ले जाते हैं और वह चुंबक से चिपक जाता है, तो समझ लीजिए कि वह शत-प्रतिशत फेक (नकली) है और उसमें लोहे या स्टील की भारी मिलावट की गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. आइस टेस्ट (बर्फ परीक्षण): विज्ञान के अनुसार, सभी धातुओं में चांदी की थर्मल कंडक्टिविटी (उष्मा सुचालकता) सबसे अधिक होती है। इसका मतलब है कि यह बहुत तेजी से गर्मी को सोखती और छोड़ती है। असली सिल्वर की पहचान के लिए उस पर बर्फ का एक छोटा टुकड़ा रखें। असली चांदी पर रखी बर्फ कमरे के तापमान (Room Temperature) पर भी किसी सामान्य सतह की तुलना में बहुत तेजी से पिघलेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
3. स्मेल टेस्ट (गंध परीक्षण): उच्च गुणवत्ता वाली असली चांदी गंधहीन (Odorless) होती है। आप इसे सूंघकर देख सकते हैं। अगर आपको इसमें से जंग लगे लोहे, पीतल या कॉपर (तांबे) जैसी कोई भी धातु वाली गंध आ रही है, तो इसका मतलब है कि उसमें भारी मिलावट की गई है और वह शुद्ध चांदी नहीं है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
4. क्लॉथ टेस्ट (सफेद कपड़े का परीक्षण): असली चांदी हवा में मौजूद सल्फर के साथ प्रतिक्रिया करती है, जिससे उसकी सतह पर एक बहुत ही महीन काली परत जम जाती है। चांदी के बर्तन या सिक्के को एक बिल्कुल साफ और मुलायम सफेद सूती कपड़े से जोर से रगड़ें। अगर कपड़े पर हल्का काला निशान आ जाए, तो यह इस बात का मजबूत प्रमाण है कि आपके हाथ में मौजूद धातु असली चांदी ही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संक्षेप में कहा जाए तो, सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का यह वर्तमान दौर अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की आशंकाओं और निवेशकों के 'कैश' की तरफ बढ़ते रुझान का सीधा परिणाम है। सोना जो कभी 1.76 लाख रुपये के शिखर पर था, वह अब 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर संघर्ष कर रहा है, और चांदी ने तो 3.86 लाख से 2.25 लाख रुपये तक का गोता लगाकर निवेशकों को भारी सदमा दिया है। एक्सपर्ट्स अभी निवेश से दूर रहने और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे अस्थिर बाजार में अगर आप खरीदारी करने जा रहे हैं, तो BIS हॉलमार्क और शुद्धता की जांच खुद अवश्य करें। वैश्विक शांति ही अब इस सर्राफा बाजार को उसकी खोई हुई चमक वापस लौटा सकती है। खबरीलाल (Khabreelal) आपको आगे भी बुलियन मार्केट के हर उतार-चढ़ाव की पल-पल की अपडेट देता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें