मुंबई (Entertainment Desk): भारतीय सिनेमा में इन दिनों रॉ (Raw) और सर्वाइवल थ्रिलर कहानियों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। दर्शक अब एसी कमरों और विदेशी लोकेशंस पर शूट हुई चमक-दमक वाली फिल्मों के बजाय उन कहानियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जो सीधे जमीन से जुड़ी हों और जिनमें किरदारों को पसीना बहाते, जूझते और मौत से लड़ते हुए दिखाया गया हो। इसी कड़ी में एक बेहद दिलचस्प और रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म 'डियर हसबैंड' (Dear Husband) सिनेमाघरों में तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।READ ALSO:-शेयर बाजार में दांव लगाने वालों के लिए खुशखबरी! 31 अगस्त से खुल रहा है 'पर्पल स्टाइल लैब्स' का IPO, महज ₹14,950 लगाकर करें बंपर कमाई
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'शूटिंग सेंस' (Shooting Sense) के बैनर तले बनी इस फिल्म का मुंबई में एक बेहद भव्य और रोमांचक ट्रेलर लॉन्च किया गया। प्यार, इंतजार और रिश्तों की भावनाओं से शुरू होने वाली यह कहानी जब अचानक खतरनाक हालात और जानलेवा संघर्ष में तब्दील हो जाती है, तो पर्दे पर जो थ्रिल पैदा होता है, वह दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखने का माद्दा रखता है।
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अयोध्या के पास टिकरी जंगल: जहां हर कदम पर था मौत का साया

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'डियर हसबैंड' सिर्फ अपनी कहानी के लिए नहीं, बल्कि अपनी खौफनाक और चुनौतीपूर्ण शूटिंग लोकेशंस के लिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म को रीयलिस्टिक टच देने के लिए मेकर्स ने किसी स्टूडियो के बजाय घने और खतरनाक जंगलों का रुख किया। इस सर्वाइवल थ्रिलर के सबसे महत्वपूर्ण और रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों को अयोध्या से करीब 30 किलोमीटर दूर गोंडा जिले के मनकापुर स्थित 'टिकरी जंगल' में फिल्माया गया है।
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यह कोई साधारण शूटिंग नहीं थी। फिल्म के ज्यादातर हिस्से रात के घने अंधेरे में शूट किए गए हैं। फिल्म में एक सख्त पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रहे दिग्गज अभिनेता सतीश त्रिपाठी ने शूटिंग के डरावने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि टिकरी का जंगल इतना घना और खतरनाक है कि वहां कदम-कदम पर सांप और जहरीले बिच्छुओं का खौफ बना रहता था।
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सतीश त्रिपाठी के मुताबिक, "पूरी टीम के लिए यह शूटिंग बेहद चुनौतीपूर्ण और डरावनी रही। हमने सचमुच जंगल में सांप-बिच्छुओं के खतरे के बीच काम किया है। रात के समय जंगल का माहौल वैसे ही खौफनाक होता है, उस पर से रोज रात करीब दो-ढाई बजे अचानक लाइट बंद हो जाती थी। उस घुप अंधेरे में जब कीड़े-मकोड़ों और जंगली जानवरों की आवाजें आती थीं, तो डर लगना लाजमी था। यह पूरा सफर थ्रिल और एडवेंचर से भरा हुआ था, जिसे हम जीवन भर नहीं भूल पाएंगे।"
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30 दिन की शूटिंग, और नींद सिर्फ 60 घंटे

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फिल्म को परफेक्शन के साथ पर्दे पर उतारने के लिए कलाकारों और क्रू मेंबर्स ने अपनी जान की बाजी लगा दी। फिल्म के लेखक, पटकथा राइटर और अहम किरदार निभा रहे अभिनेता अजीत गोस्वामी ने इस प्रोजेक्ट के पीछे की अथाह मेहनत का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टिकरी जंगल के खतरनाक माहौल में 30 दिनों तक लगातार शूटिंग चली। इस एक महीने के दौरान पूरी टीम ने कुल मिलाकर मुश्किल से सिर्फ 60 घंटे की ही नींद ली थी। यानी हर दिन औसतन सिर्फ दो घंटे सोकर अभिनेताओं ने एक्शन और इमोशन से भरे सीन्स शूट किए हैं।
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अजीत गोस्वामी ने फिल्म की कहानी पर रोशनी डालते हुए कहा, "यह एक सर्वाइवल स्टोरी है। कहानी एक सीधे-सादे गांव के लड़के की है, जो अपनी प्रेमिका की निशानी पाने के लिए अजीब और खतरनाक परिस्थितियों में फंस जाता है। वह अचानक लूटपाट करने वाले खूंखार लोगों के बीच घिर जाता है। इसके बाद बचने की जो जद्दोजहद शुरू होती है, उसमें इमोशन, ड्रामा और हाई-ऑक्टेन एक्शन का जबरदस्त तड़का है।"
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अभिनेता से निर्माता बने रोहित राजावत का नया प्रयोग

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'डियर हसबैंड' फिल्म रोहित राजावत के करियर के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। इस फिल्म के जरिए वे अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण (Production) की दुनिया में भी कदम रख रहे हैं।
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निर्माता-अभिनेता रोहित राजावत ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "बतौर निर्माता यह मेरी पहली फिल्म है और मैं इसे लेकर बेहद उत्साहित हूं। हमने एक घिसी-पिटी कहानी से हटकर कुछ अलग करने की कोशिश की है। फिल्म में मेरा किरदार काफी अतरंगी और लेयर्ड (Layered) है। हमारी पूरी टीम मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखती है। इस प्रोजेक्ट के दौरान कई नए कलाकारों को अभिनय की बारीकियां सीखने का मौका मिला है। हमने जो खून-पसीना इस फिल्म में बहाया है, उम्मीद है दर्शकों को हमारी यह मेहनत और फिल्म जरूर पसंद आएगी।"
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फिल्म के कुशल निर्देशन की कमान धर्मेंद्र कुमार ने संभाली है। उन्होंने बताया कि एक प्रेमी की जद्दोजहद को कैमरे में उतारने के लिए टीम ने दिन-रात एक कर दिया। एक लड़के का अपनी प्रेमिका के लिए मुश्किल हालात से लड़ना और मौत के मुंह से वापस लौटना, फिल्म का मुख्य आकर्षण है।
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संगीत और रिलीज डेट: रोमांच के बीच गानों का तड़का

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किसी भी थ्रिलर फिल्म में जब भावनाओं का तड़का लगता है, तो संगीत उसकी जान बन जाता है। फिल्म में पूर्णिमा शर्मा और विश्वजीत माइती ने भी बेहद महत्वपूर्ण और दमदार भूमिकाएं निभाई हैं।
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इस थ्रिलर सर्वाइवल ड्रामा के संगीत को चार अलग-अलग प्रतिभाशाली संगीतकारों—रोहित दुबे, जय मेहता, देवरथ शर्मा और अभय त्यागी—ने मिलकर तैयार किया है। मुंबई में हुए ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान फिल्म के तीन प्रमुख गानों ने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इनमें एक पारंपरिक 'होली गीत', एक रोमांटिक ट्रैक 'खो जाना' और एक भावपूर्ण गाना 'रंग तेरा' शामिल है। ये गाने फिल्म की डार्क और थ्रिलर थीम के बीच दर्शकों को एक भावनात्मक राहत देने का काम करेंगे।
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उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि, खौफनाक टिकरी जंगल का असली डर, कलाकारों की अथक मेहनत और एक सर्वाइवल थ्रिलर की मजबूत कहानी—यह सब कुछ पर्दे पर देखने के लिए दर्शकों की बेकरारी बढ़ गई है। 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही 'डियर हसबैंड' बॉक्स ऑफिस पर थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन सौगात साबित हो सकती है।
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