बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बुधवार को प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता उस समय उजागर हो गई, जब एक दिव्यांग नेशनल लेवल के खिलाड़ी को न्याय के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ी। जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) परिसर में बुधवार दोपहर उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब बागपत में नेशनल शूटर का आत्मदाह प्रयास (Baghpat Mein National Shooter Ka Aatmdah Prayas) करने की खबर फैली। व्हीलचेयर पर बैठे नेशनल शूटर अमित चौधरी ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ उड़ेलकर आग लगाने की कोशिश की।Read also:-मेरठ में अंधविश्वास का 'अतिक्रमण': सड़क किनारे रातों-रात खड़ी की गई मजार को पुलिस ने हटाया; बेकरी मालिक बोला- 'कारोबार बढ़ाने के लिए बनवाई थी'
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गनीमत रही कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अमित के हाथ से बोतल छीन ली और एक बड़ा हादसा होने से बचा लिया। यह घटना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा।
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बीजेपी का झंडा लगी कार और व्हीलचेयर पर संघर्ष

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र के बंदपुर गांव निवासी अमित चौधरी बुधवार को अपनी कार से कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनकी कार पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का झंडा लगा हुआ था। कार से उतरने के बाद अमित अपनी व्हीलचेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर दाखिल हुए। उनके हाथ में पेट्रोल या किसी ज्वलनशील पदार्थ की बोतल थी।
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अचानक उन्होंने बोतल खोली और खुद पर पदार्थ उड़ेलना शुरू कर दिया। यह देख वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने तुरंत दौड़कर अमित को पकड़ा और माचिस जलाने से पहले ही उन्हें काबू में कर लिया। बागपत में नेशनल शूटर का आत्मदाह प्रयास की यह घटना जंगल की आग की तरह पूरे जिले में फैल गई। 
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क्यों उठाना पड़ा ऐसा खौफनाक कदम?

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पुलिस और प्रशासन की पूछताछ में अमित चौधरी ने अपना दर्द बयां किया। अमित एक दिव्यांग नेशनल शूटर हैं और उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। लेकिन घर के भीतर वह अपनों से ही हार रहे थे।
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    जमीन पर कब्जा: अमित का आरोप है कि उनके परिवार के ही कुछ सदस्यों ने उनकी हिस्से की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। दिव्यांग होने के कारण वह उनसे शारीरिक रूप से लड़ने में असमर्थ हैं।
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    अधिकारियों की अनदेखी: अमित ने रोते हुए बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार पुलिस और डीएम से की थी। वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
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    हताशा: अमित का कहना है कि जब "डीएम साहब को शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई", तो वह पूरी तरह टूट गए। न्याय न मिलने की हताशा ही बागपत में नेशनल शूटर का आत्मदाह प्रयास का मुख्य कारण बनी।
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प्रशासन का पक्ष: पारिवारिक विवाद और जांच

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घटना के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडीएम (ADM) विनीत कुमार उपाध्याय ने स्थिति को संभाला। उन्होंने मीडिया को बताया कि यह मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद का है। अमित चौधरी अपना शिकायत पत्र देने आए थे, लेकिन आवेश में आकर उन्होंने यह कदम उठा लिया।
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एडीएम ने कहा, "पूरे मामले की जांच के लिए एसडीएम (SDM) को निर्देशित कर दिया गया है। प्रशासन सुनिश्चित करेगा कि अगर उनकी जमीन पर गलत कब्जा है, तो उसे हटाया जाए और उन्हें न्याय मिले।" वहीं, पुलिस ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। 
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सिस्टम पर उठते सवाल

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यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को सम्मान देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक दिव्यांग नेशनल शूटर को अपनी फरियाद सुनाने के लिए आत्मदाह जैसा कदम उठाना पड़ता है। बागपत में नेशनल शूटर का आत्मदाह प्रयास यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी आम जनता की शिकायतों को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अमित चौधरी जैसे व्यक्ति, जो बीजेपी का झंडा लगी गाड़ी में चलते हैं और राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, की सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम गरीब आदमी का क्या हाल होता होगा? 
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आगे की कार्रवाई

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फिलहाल पुलिस ने अमित चौधरी को हिरासत में लेकर उन्हें शांत किया है और उनके परिजनों को सूचित किया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उन्हें किसी ने उकसाया था। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि राजस्व विभाग की टीम जल्द ही बंदपुर गांव जाकर जमीन की पैमाइश करेगी और विवाद का निपटारा करेगी।
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बागपत में नेशनल शूटर का आत्मदाह प्रयास एक चेतावनी है कि प्रशासनिक लेटलतीफी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। अमित चौधरी की जान तो बच गई, लेकिन अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपनी नींद तोड़कर उन्हें उनकी जमीन का हक दिला पाता है या नहीं।
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