नई दिल्ली: देश के मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने देश के 6 राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समयसीमा को बढ़ा दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार शामिल हैं।READ ALSO:-डिजिटल डकैती: मेरठ में 7 लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका, 54 लाख स्वाहा! एक क्लिक ने बर्बाद कर दिया सब कुछ
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विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि यहां SIR की प्रक्रिया के लिए अब 31 दिसंबर को आखिरी तारीख तय किया गया है। वहीं, अन्य 5 राज्यों में इसे एक सप्ताह के लिए बढ़ाया गया है। इस फैसले से उन लाखों लोगों को मौका मिलेगा जो अब तक वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या ठीक करवाने से वंचित रह गए थे।
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क्यों बढ़ाई गई तारीख और क्या है नया शेड्यूल?

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चुनाव आयोग ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे। पहले वोटर वेरिफिकेशन यानी 'एन्यूमरेशन पीरियड' की आखिरी तारीख 4 दिसंबर थी, जिसे बढ़ाकर अब 11 दिसंबर कर दिया गया है।
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    ड्राफ्ट वोटर लिस्ट: पहले यह सूची 9 दिसंबर को जारी होने वाली थी, लेकिन अब नई समयसीमा के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी।
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    फाइनल वोटर लिस्ट: आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
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राजनीतिक दलों को मिलेगी 'मृत और अनुपस्थित' वोटरों की लिस्ट

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इस बार की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए आयोग ने एक नई पहल की है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले, राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को उन मतदाताओं की सूची सौंपी जाएगी जो या तो मृत हो चुके हैं, अपना स्थान बदल चुके हैं (Shifted), या लंबे समय से अनुपस्थित हैं।
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आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा तीन बार संपर्क करने के बावजूद न मिलने वाले वोटरों की अलग सूची बनाई जाए। यह कदम फर्जी वोटिंग रोकने और मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले बिहार में हुई एसआईआर प्रक्रिया में भी यही मॉडल अपनाया गया था।
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आखिर क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?

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आम जनता के मन में यह सवाल होना लाजमी है कि आखिर SIR क्या है? सरल शब्दों में, यह चुनाव आयोग का एक विशेष अभियान है जिसका मकसद 21 साल बाद वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध करना है।
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    नाम जोड़ना: इसमें 18 साल पूरा कर चुके नए युवाओं का नाम जोड़ा जाता है।
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    नाम हटाना: जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो दूसरे शहर शिफ्ट हो गए हैं, उनका नाम हटाया जाता है।
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    करेक्शन: नाम, पते या फोटो में हुई गलतियों को सुधारा जाता है।
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इस बार 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान में करीब 51 करोड़ मतदाताओं का डेटा अपडेट हो रहा है। इस काम में 5.33 लाख बीएलओ (BLO) और 7 लाख से ज्यादा बीएलए (BLA) लगे हुए हैं।
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SIR के लिए जरूरी दस्तावेज

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अगर आप भी इस दौरान अपना नाम जुड़वाना या सही करवाना चाहते हैं, तो आपके पास निम्नलिखित में से कोई एक दस्तावेज होना चाहिए:
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    आधार कार्ड
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    10वीं की मार्कशीट
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    जन्म प्रमाणपत्र
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    पासपोर्ट
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    पेंशनर पहचान पत्र
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    स्थायी निवास प्रमाणपत्र
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    जमीन या मकान आवंटन पत्र
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महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

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सवाल: अगर लिस्ट से नाम कट जाए तो क्या करें? जवाब: ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद आप एक महीने के भीतर अपील कर सकते हैं। ईआरओ (ERO) और डीएम (DM) के पास अपील का विकल्प मौजूद है।
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सवाल: शिकायत कहां करें? जवाब: किसी भी समस्या के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करें या अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करें।
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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तारीख बढ़ाना चुनाव आयोग का एक स्वागत योग्य कदम है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 31 दिसंबर तक का समय मिलने से यह सुनिश्चित होगा कि एक स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची तैयार हो सके। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बीएलओ को सही जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
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चुनाव आयोग ने यूपी, एमपी समेत 6 राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ा दी है। यूपी में अब 31 दिसंबर तक वोटर लिस्ट अपडेट होगी। ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को आएगी और फाइनल लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी होगी। पारदर्शिता के लिए राजनीतिक दलों को मृत और शिफ्टेड वोटरों की जानकारी पहले ही दी जाएगी।
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