रोहतास (Bihar Local News Special Report): भारत में सोने को सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, संपन्नता और खुशहाली का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। लेकिन, बिहार के रोहतास (Rohtas) जिले से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश के व्यापारिक जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिन हाथों में कभी तराजू और सोने के चमचमाते महंगे आभूषण हुआ करते थे, वे हाथ अब सड़क किनारे चाय की केतली और पकौड़े तलने की कड़ाही थामे हुए हैं।READ ALSO:-यूपी में प्रचंड लू का तांडव: 46.4°C के साथ देश में सबसे गर्म रहा बांदा, 33 जिलों में अलर्ट; हीटवेव को लेकर सीएम योगी ने मोर्चे पर उतारे अफसर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की गई एक भावुक और राष्ट्रीय हित की अपील का सीधा, लेकिन नकारात्मक असर देश के छोटे और मंझोले सर्राफा कारोबारियों पर भारी पड़ने लगा है। रोहतास के प्रतिष्ठित स्वर्ण कारोबारी और स्थानीय चेम्बर ऑफ कॉमर्स (Chamber of Commerce) के अध्यक्ष सच्चिदानंद प्रसाद द्वारा सरेआम चाय-पकौड़े की दुकान खोलना इसी आर्थिक संकट और बेबसी का एक जीता-जागता प्रमाण बन गया है।
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क्या थी पीएम मोदी की अपील और क्यों आया यह भारी संकट?

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इस पूरे व्यापारिक घटनाक्रम की जड़ में वह अहम अपील है, जो मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए की थी। पीएम मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से देशवासियों से एक खास आग्रह किया था।
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    विदेशी मुद्रा बचाने की कवायद: प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि अगले एक साल तक, चाहे घर में शादी-विवाह का कितना भी बड़ा आयोजन हो या कोई बड़ा त्योहार आए, लोग सोने-चांदी के गहने खरीदने से बचें।
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    आयात का बोझ: दरअसल, भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अपनी जरूरत का 80 से 90 प्रतिशत सोना और कच्चा तेल विदेशों से भारी मात्रा में आयात (Import) करता है। इस आयात का भुगतान विदेशी मुद्रा यानी डॉलर (US Dollar) में करना पड़ता है, जिससे देश के खजाने पर बहुत भारी बोझ पड़ता है। सरकार की रणनीति सोने के आयात को घटाकर देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की है।
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लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर विदेशी मुद्रा बचाने की इस व्यापक रणनीति ने स्थानीय और छोटे सर्राफा कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का एक बेहद गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जनता ने पीएम की इस अपील को इतनी गंभीरता से लिया है कि सर्राफा बाजारों से ग्राहकों की रौनक पूरी तरह से नदारद हो गई है।
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रोहतास का अनोखा विरोध: जब स्वर्ण कारोबारी को बेचना पड़ा पकौड़ा

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रोहतास जिले के जाने-माने और दशकों से स्वर्ण कारोबार से जुड़े व्यवसाई सच्चिदानंद प्रसाद इस भारी मंदी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। एक समय था जब उनकी दुकान पर सुबह शटर खुलते ही ग्राहकों की भारी भीड़ लग जाती थी। खासकर लगन (शादियों के सीजन) में तो उनकी दुकान में पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी। कारीगरों को फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन आज स्थिति 180 डिग्री बदल चुकी है।
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अब दिन भर उनकी दुकान खाली पड़ी रहती है और बोहनी (दिन की पहली बिक्री) तक के लाले पड़े हुए हैं।
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सच्चिदानंद प्रसाद ने अपना दर्द और गुस्सा बयां करते हुए कहा:

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"मुझे प्रधानमंत्री जी की इस अजीबोगरीब अपील पर बहुत हैरानी है। एक तरफ चीन (China) जैसा हमारा पड़ोसी देश दुनिया भर से सोना खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था और रिज़र्व को लगातार मजबूत कर रहा है, तो वहीं हमारे देश में आम लोगों से सोना खरीदने को एक साल के लिए टालने को कहा जा रहा है। मुझे प्रधानमंत्री का यह फैसला बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा है। आज हालत यह है कि कोई ग्राहक हमारी दुकान की तरफ देख भी नहीं रहा है, जिसके कारण हमारी आमदनी बिल्कुल शून्य हो गई है। मजबूरी में आकर अपने परिवार का पेट पालने के लिए हमने अब चाय-पकौड़ी की दुकान खोल ली है।"
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शून्य आमदनी और बढ़ते खर्चों ने तोड़ी छोटे व्यापारियों की कमर

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स्वर्ण कारोबार केवल एक एयर-कंडीशंड शोरूम या एक दुकानदार तक सीमित नहीं होता; यह एक पूरी लंबी चेन (श्रृंखला) है जो ग्राहकों के भरोसे और लगातार हो रही खरीदारी पर टिकी होती है। सच्चिदानंद प्रसाद ने विस्तार से बताया कि जब लोग सोना खरीदना बंद कर देते हैं, तो इसका सीधा और जानलेवा असर पूरे सर्राफा इकोसिस्टम पर पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि भले ही उनकी दुकान से सोने की बिक्री ठप हो गई हो, लेकिन खर्चे जस के तस बने हुए हैं:
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    दुकान का किराया और बिजली बिल: कमर्शियल दुकानों का किराया हजारों में होता है। साथ ही कमर्शियल मीटर का बिजली बिल हर महीने भरना ही पड़ता है।
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    कर्मचारियों का वेतन: "पहले हम लोगों को रोजगार देते थे। कई कारीगर हमारे भरोसे अपना घर चलाते थे। सुरक्षा गार्ड्स का वेतन देना होता है। लेकिन अब खुद की स्थिति ऐसी हो गई है कि दुकान का रोजमर्रा का खर्च निकालना भी नामुमकिन हो रहा है। मजबूर होकर मुझे चाय और पकौड़े की दुकान शुरू करनी पड़ी, ताकि कम से कम परिवार का पेट पल सके और घर का चूल्हा जलता रहे।"
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रोहतास में गरमाई सियासत: राजद ने साधा केंद्र सरकार पर सीधा निशाना

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चाय-पकौड़े की यह दुकान अब केवल एक स्वर्ण कारोबारी का व्यक्तिगत विरोध प्रदर्शन नहीं रह गई है, बल्कि इसने बिहार की सियासत का पारा भी सातवें आसमान पर चढ़ा दिया है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बहुत तेज हो गई है।
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विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता गुड्डू चंद्रवंशी ने केंद्र सरकार की इन आर्थिक नीतियों को पूरी तरह से जनविरोधी करार देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की अदूरदर्शी नीतियों का सीधा और सबसे घातक असर देश के मध्यमवर्गीय और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
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राजद नेता गुड्डू चंद्रवंशी ने सरकार को घेरते हुए कहा:

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"सर्राफा व्यवसाय कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है। इससे देशभर में लाखों-करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं। इसमें केवल बड़े शो-रूम वाले रईस व्यापारी ही नहीं, बल्कि दिन-रात आभूषण बनाने वाले गरीब बंगाली कारीगर, सोना चमकाने वाले दिहाड़ी मजदूर, छोटे दुकानदार और उनके परिवार भी शामिल हैं। अगर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना अपीलों से कारोबार ठप होगा, तो सबसे ज्यादा असर इन्हीं गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। सरकार को कोई भी अपील करने से पहले इन लाखों परिवारों की रोजी-रोटी के बारे में गहन विचार करना चाहिए था।"
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मुख्य पार्षद ने किया उद्घाटन: 'फैसले से पहले व्यवसाइयों की स्थिति पर हो विचार'

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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प और प्रतीकात्मक बात यह रही कि इस चाय-पकौड़ी की दुकान का बाकायदा फीता काटकर उद्घाटन करने के लिए स्थानीय मुख्य पार्षद शशि कुमारी खुद पहुंची थीं। उन्होंने इस दुकान की शुरुआत की और व्यापारियों की वर्तमान परेशानी को बेहद गंभीर, दुखद और चिंताजनक बताया।
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मुख्य पार्षद शशि कुमारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो संतुलन बनाकर चलें, न कि किसी एक वर्ग को पूरी तरह से तबाह कर दें।
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"व्यवसाई वर्ग हमारे देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत रीढ़ है। अगर छोटे दुकानदार इस तरह से परेशान होंगे और उन्हें अपना पुश्तैनी काम छोड़कर सड़क पर चाय बेचनी पड़ेगी, तो इसका सीधा असर समाज और बाजार दोनों पर पड़ेगा। सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कोई ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए जिससे व्यापार भी निर्बाध रूप से चलता रहे और लोगों की आजीविका पर भी कोई संकट न आए।"
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रोहतास में चाय-पकौड़े बेचते स्वर्ण कारोबारी की यह वायरल होती तस्वीर एक बहुत बड़े राष्ट्रीय आर्थिक द्वंद्व (Economic Dilemma) को दर्शाती है। एक ओर सरकार के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को संतुलित करने की एक बहुत बड़ी चुनौती है, तो दूसरी ओर उन लाखों छोटे व्यापारियों और कारीगरों की आजीविका दांव पर लग गई है, जिनका जीवन पूरी तरह से सोने-चांदी के व्यापार पर ही निर्भर है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वृहद आर्थिक नीतियां (Macro-economic policies) बनाते समय छोटे और मध्यम वर्गीय कारोबारियों को उनके हाल पर छोड़ा जा सकता है? फिलहाल, रोहतास का यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।
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