नई दिल्ली (पॉलिटिकल एंड यूथ अफेयर्स डेस्क): भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में छात्र आंदोलनों ने हमेशा बड़े-बड़े बदलावों की नींव रखी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर (Jantar Mantar) एक बार फिर ऐसे ही एक युगांतरकारी बदलाव का गवाह बना है। 'नीट' (NEET) परीक्षा में हुए महा-घोटाले को लेकर पिछले कई हफ्तों से जो 'टिकिंग टाइम बम' टिक-टिक कर रहा था, उसने आखिरकार अपना असर दिखा दिया।READ ALSO:-छात्र शक्ति के आगे झुकी सरकार! केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा; कहा— 'राष्ट्र विरोधी ताकतें स्थिति का फायदा न उठाएं'
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छात्रों के उग्र प्रदर्शन, लाठीचार्ज, आंसू गैस और 130 पुलिसकर्मियों के घायल होने जैसी हिंसक घटनाओं के बीच जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा (Resignation) देने का ऐलान किया, तो जंतर-मंतर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जिन आंखों में अब तक आंसू और गुस्सा था, वहां अचानक जीत की चमक और जश्न का शोर गूंजने लगा।
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आइए तफसील से जानते हैं कि जंतर-मंतर पर इस 'Gen-Z' जश्न का माहौल कैसा था और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के युवा नेता अभिजीत दीपके (Abhijit Dipke) ने इस जीत के बाद अपनी आगे की क्या रणनीति तय की है।
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 जैसे ही अभिजीत दीपके के पास फोन आया कि प्रधान का इस्तीफा हो गया, वह घुटनों के बल बैठ गए और खुशी मनाने लगे।

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Gen-Z का अनोखा जश्न: मोबाइल की फ्लैशलाइट्स, गिटार और गूंजते नारे

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जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे अधिकांश छात्र 18 से 22 वर्ष की आयु वर्ग के हैं, जिन्हें 'Gen-Z' (जेनरेशन जेड) कहा जाता है। जैसे ही सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल्स के जरिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर उन तक पहुंची, पूरे जंतर-मंतर पर खुशी का ज्वार उमड़ पड़ा।
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यह कोई पारंपरिक राजनीतिक जश्न नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से एक आधुनिक 'Gen-Z' सेलिब्रेशन था।
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    हजारों छात्रों ने एक साथ अपने स्मार्टफोन की फ्लैशलाइट्स जलाकर आसमान की तरफ लहराईं।
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    कुछ युवा गिटार की धुनों पर 'इंकलाब' और 'वी शैल ओवरकम' (We Shall Overcome) के गीत गाने लगे।
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    हाथों में मीम्स (Memes) और व्यंग्यात्मक नारों वाले प्लैकार्ड्स पकड़े युवाओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाइयां दीं। इस जीत ने साबित कर दिया कि जब युवा ठान लेते हैं, तो इंटरनेट के हैशटैग्स सड़कों पर उतरकर सत्ताओं की नींव हिला सकते हैं।
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"ये कहते थे इस्तीफे नहीं होते...": अभिजीत दीपके की मंच से हुंकार

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इस पूरे आंदोलन की धुरी और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर बने मंच से अपने समर्थकों को संबोधित किया। टाइफाइड (Typhoid) जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उनके चेहरे पर जीत का तेज और आवाज में गजब की ऊर्जा थी।
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माइक संभालते ही दीपके ने वह डायलॉग बोला, जिसने वहां मौजूद हर युवा के रोंगटे खड़े कर दिए। उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान पर सीधा तंज कसते हुए कहा:
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"ये लोग कहते थे कि इस सरकार में कभी किसी मंत्री के इस्तीफे नहीं होते। ये अहंकार में डूबे थे। लेकिन आज इस छात्र शक्ति ने साबित कर दिया है कि मैं सही कहता था— 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए!' हमने अपने खून-पसीने से आज यह कर दिखाया है।"
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दीपके ने भावुक होते हुए इस पहली और बड़ी जीत को उन मासूम छात्रों को समर्पित किया, जिन्होंने नीट विवाद और पेपर लीक के तनाव में आकर अपनी जान (Suicide) गंवा दी। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा उन मृत छात्रों को एक सच्ची, लेकिन अधूरी श्रद्धांजलि है।
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पिक्चर अभी बाकी है: CJP की दो अन्य प्रमुख मांगें (The Next Step)

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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की सबसे बड़ी और 'नॉन-नेगोशिएबल' मांग पूरी होने के बाद, कई लोगों को लगा था कि आंदोलन अब समाप्त हो जाएगा। लेकिन CJP और अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अभी जंतर-मंतर खाली नहीं करने वाले हैं। सीजेपी ने अपनी बाकी बची दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार पर दबाव और तेज कर दिया है:
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    पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ का मुआवजा (Financial Compensation): CJP की मांग है कि नीट धांधली के कारण मानसिक अवसाद का शिकार होकर आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के पीड़ित परिवारों को सरकार तुरंत 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दे। यह राशि उनके जीवन की कीमत नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का दंड है।
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    सभी मुकदमों की तुरंत वापसी (Withdrawal of FIRs): पिछले एक महीने के दौरान दिल्ली, बिहार (सीवान, पटना) और देश के अन्य हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बेगुनाह छात्रों और युवा नेताओं पर पुलिस ने जो भी एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, उन्हें बिना शर्त तुरंत वापस लिया जाए। छात्रों का करियर पुलिस केस की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।
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"हम कॉकरोच हैं, इतनी जल्दी जाने वाले नहीं"

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अपने संगठन के अनूठे नाम 'कॉकरोच जनता पार्टी' को सार्थक करते हुए दीपके ने एक बहुत ही कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हम कॉकरोच हैं, हम किसी भी विपरीत परिस्थिति में सर्वाइव (Survive) करना जानते हैं। हम इतनी जल्दी मैदान छोड़कर जाने वाले नहीं हैं। लोकतंत्र में डरना नहीं, बल्कि सिस्टम की आंखों में आंखें डालकर बोलना सीखना चाहिए।"
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सीजेपी (CJP) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी स्पष्ट पोस्ट किया है कि जब तक सरकार के साथ 'मुआवजे' और 'मुकदमे वापसी' के मुद्दे पर लिखित समझौता (Written Agreement) नहीं हो जाता, तब तक यह ऐतिहासिक संघर्ष जारी रहेगा।
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारतीय राजनीति में छात्र आंदोलनों की प्रासंगिकता को एक बार फिर से स्थापित कर गया है। अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने दिखा दिया है कि यदि मुद्दे सच्चे हों और लड़ने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी घुटनों पर लाया जा सकता है। अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में है। क्या सरकार CJP की बाकी दोनों मांगें मानकर इस 'महा-आंदोलन' को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करेगी, या जंतर-मंतर पर यह 'Gen-Z' का संघर्ष अभी और लंबा खिंचेगा?
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