दिवाली (Diwali) यानी रोशनी, खुशियों और समृद्धि का त्योहार। भारत में यह पुरानी परंपरा रही है कि धनतेरस और दिवाली पर की गई खरीदारी घर में सुख-समृद्धि लाती है। यही वजह है कि सोने-चांदी के शोरूम से लेकर बर्तनों और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन, जिस दिवाली पर हम दिल खोलकर खर्च करते हैं, क्या उस दौरान हम अपने भविष्य के लिए निवेश (Investment) पर भी उतना ही ध्यान देते हैं?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि त्योहार पर खर्च करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन असली समृद्धि तब आती है जब आपका पैसा आपके लिए और पैसा बनाकर दे। इस खास रिपोर्ट में हम 'प्राइम म्यूचुअल फंड' के डेटा के जरिए यह समझेंगे कि दिवाली के दौरान भारतीयों का निवेश का मूड कैसा रहता है और सोना-चांदी निवेश के लिहाज से क्यों सुपरहिट साबित हो रहे हैं।

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म्यूचुअल फंड निवेश: त्योहार पर हमेशा नहीं आती तेजी

आम तौर पर माना जाता है कि दिवाली के महीने में हर जगह पैसों की बारिश होती है, लेकिन म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। primeMFdatabase.com से मिले पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि दिवाली के महीने में म्यूचुअल फंड निवेश का ट्रेंड काफी मिला-जुला रहा है। इसमें कोई एक जैसी बढ़त देखने को नहीं मिली है।

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म्यूचुअल फंड निवेश का 5 साल का ट्रेंड:

  • साल 2021: निवेश में 311% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा 5,866 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे 24,121 करोड़ रुपये पहुंच गया।

  • साल 2022: बाजार के मूड के कारण निवेश में 66% की बड़ी गिरावट आई और यह 18,602 करोड़ रुपये से घटकर 6,318 करोड़ रुपये रह गया।

  • साल 2023: निवेश में मामूली 4.4% की बढ़त देखी गई, जो 16,916 करोड़ रुपये से बढ़कर 17,654 करोड़ रुपये हुई।

  • साल 2024: यह साल म्यूचुअल फंड के लिए ब्लॉकबस्टर रहा। निवेश में 179% का जोरदार उछाल आया और यह 32,264 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 90,152 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

  • साल 2025: एक बार फिर बाजार में सुस्ती दिखी और निवेश 49% घटकर 46,442 करोड़ रुपये से 23,609 करोड़ रुपये पर आ गया।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

प्राइम डेटाबेस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव हल्दिया ने बताया, "आम रिटेल निवेशक त्योहारों को शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने का कोई सीधा ट्रिगर या बहाना नहीं मानते। उनका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि बाजार का स्तर क्या है और कंपनियों का वैल्यूएशन कैसा है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर त्योहार के समय बाजार में कोई गिरावट या सुधार आता है, तो वह निवेशकों के लिए एक बेहतरीन मौका होता है। अगर कंपनियों के फंडामेंटल्स मजबूत हैं, तो गिरे हुए दामों पर शेयर खरीदकर लॉन्ग टर्म (Long Term) में बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

सोना और चांदी: 10 सालों में निवेशकों की चांदी, तीन गुना से ज्यादा बढ़े दाम

अब बात करते हैं उस एसेट की जिसे भारतीय सबसे ज्यादा पसंद करते हैं—सोना और चांदी (Gold and Silver)। पिछले एक दशक में इन दोनों कीमती धातुओं ने रिटर्न के मामले में सबको चौंका दिया है। इनके दाम तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुके हैं। हालांकि, अब भारतीयों के खरीदारी के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। लोग अब गहनों (Jewelry) से ज्यादा इसे एक वित्तीय संपत्ति (Financial Asset) के रूप में देख रहे हैं। डिजिटल गोल्ड (Digital Gold), गोल्ड ईटीएफ (ETF) और सिक्कों की मांग तेजी से बढ़ी है।

रिद्धि-सिद्धि बुलियोंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कीमतों में आई जोरदार तेजी ने सोने-चांदी के प्रति निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। अब लोग भले ही ऊंचे दामों के कारण वजन में कम सोना खरीद रहे हों, लेकिन उनका कुल निवेश बजट बढ़ गया है।

10 साल और 5 साल का प्राइस ट्रेंड:

  • 10 साल का सफर: दिवाली 2016 में एमसीएक्स (MCX) पर सोना करीब 30,057 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अक्टूबर 2026 तक 1,43,100 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह 376% की भारी बढ़त है (सालाना लगभग 16.9% रिटर्न)। वहीं, चांदी 42,459 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,96,350 रुपये पर पहुंच गई है (362% की बढ़त)।

  • 5 साल का धमाकेदार रिटर्न: असली तेजी पिछले 5 सालों में आई है। दिवाली 2021 से अब तक सोने में 201% और चांदी में 206% का उछाल आया है।

गहनों से निवेश की तरफ बढ़ता झुकाव

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि साल 2025 में भारत में सोने की कुल मांग वजन के लिहाज से 11% घटकर 710.9 टन रह गई, लेकिन इसकी कुल वैल्यू 30% बढ़कर 7.51 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसमें गहनों का हिस्सा 24% गिरा है, जबकि कुल मांग में निवेश का हिस्सा 29% से बढ़कर 42% हो गया है।

सबसे बड़ी सफलता की कहानी चांदी (Silver ETF) की है। जनवरी 2022 में सिल्वर ईटीएफ की संपत्ति महज 123 करोड़ रुपये थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 85,488 करोड़ रुपये हो गई। धनतेरस 2025 पर भी सोने का वॉल्यूम 15% गिरा था, लेकिन चांदी के सिक्कों की बिक्री में 35 से 40 फीसदी का उछाल देखा गया था।

एक्सपर्ट एडवाइस: "पहले निवेश करें, फिर बचा हुआ पैसा खर्च करें"

इस पूरे ट्रेंड पर वैल्यू रिसर्च के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी धीरेंद्र कुमार ने निवेशकों को एक बेहद जरूरी सलाह दी है। उन्होंने कहा, "त्योहारों में खर्च और शॉपिंग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन लोगों को निवेश पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। रणनीति यह होनी चाहिए कि पहले निवेश की रकम अलग निकाल लें, और फिर जो पैसा बचे उससे शॉपिंग करें।"

धीरेंद्र कुमार ने आगाह किया कि घर में समृद्धि लाने की चाहत में अपनी लॉन्ग टर्म सिक्योरिटी से समझौता न करें। केवल दिखावे या शॉपिंग के लिए पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड लोन (Credit Card Loan) लेना घरेलू बजट पर भारी दबाव डाल सकता है। इस दिवाली की सबसे बड़ी सीख यही है कि अपने सरप्लस पैसे का इस्तेमाल समझदारी से करें और अपनी वित्तीय योजना में निवेश को पहली प्राथमिकता दें।

 

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