उत्तर प्रदेश इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ और जानलेवा भीषण गर्मी की चपेट में है। बुंदेलखंड के बांदा में तो मंगलवार को पारा सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि आसपास के जिलों में भी सूर्यदेव का ऐसा ही सितम जारी है। इस जानलेवा धूप और बढ़ते तापमान के बीच सड़क पर चलते वाहनों में अचानक आग लगने की खौफनाक घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। बीते कल, यानी 18 मई को ही बरेली में एक चलती कार धू-धू कर जल उठी, वहीं कई वातानुकूलित (AC) बसों में भी हीटिंग के कारण आग लगने की खबरें सामने आई हैं।READ ALSO:-यूपी में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव: योगी सरकार ने लेट फीस 10 गुना तक बढ़ाई; 21 दिन चूके तो जेब होगी ढीली, 1 साल बाद और सख्त हुई प्रक्रिया
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बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है। इस खतरे के पीछे सबसे बड़ी वजह बसों का एयरकंडीशन (AC) सिस्टम पाया गया है। दरअसल, भीषण गर्मी में लंबी दूरी तय करने के कारण एसी बसों के आंतरिक उपकरण अत्यधिक ओवरहीट (Heat) हो रहे हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का जोखिम कई गुना बढ़ गया है। इसके मद्देनजर परिवहन निगम ने 19 प्राइवेट फर्म के हवाले वाले सभी तकनीकी आउटसोर्स डिपो के लिए एक बेहद सख्त 12 सूत्रीय मेंटेनेंस गाइडलाइन जारी कर दी है।
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ड्राइवर-कंडक्टर की इन लापरवाहियों से पैदा होता है शॉर्ट सर्किट का खतरा

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आमतौर पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के खराब मेंटेनेंस को लेकर यात्रियों द्वारा हमेशा सवाल खड़े किए जाते रहे हैं, जहां बीच रास्ते में ही बसें दम तोड़ देती हैं। लेकिन गर्मियों के दौरान यह संचालन और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। साधारण बसों में सफर जहां भट्टी जैसा हो जाता है, वहीं एसी बसों में तकनीकी खराबी और प्रेशर बढ़ने से उपकरण गर्म हो जाते हैं।
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समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है कि एसी बसें बेहद सेंसिटिव (संवेदनशील) होती हैं और उनकी वायरिंग में रत्ती भर भी कट नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद, कई बार ड्राइवर और कंडक्टर गर्मी से बचने के लिए अपनी तरफ अतिरिक्त पंखा लगाने या फिर सफर में मनोरंजन के लिए गाने सुनने की खातिर मुख्य तारों को काटकर अवैध रूप से ऑडियो टेप या अन्य सिस्टम लगा लेते हैं। स्टाफ की यही छोटी सी लापरवाही पूरी बस में शॉर्ट सर्किट और भयंकर आग का कारण बन जाती है।
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परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) आरबीएल शर्मा की तरफ से सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों (RM), सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों (ARM) और सेवा प्रबंधकों को एक कड़ा सर्कुलर जारी किया गया है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे आउटसोर्स डिपो के प्रतिनिधियों से सीधा संपर्क कर बसों के मेंटेनेंस में तत्काल सुधार लाएं।
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इन 12 मुख्य बिंदुओं पर होगा एसी बसों का मेंटेनेंस और चेकिंग

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परिवहन निगम द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अब किसी भी वातानुकूलित बस को डिपो से सड़क पर संचालन के लिए भेजने से पहले निम्नलिखित 12 तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा:
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    वेंट और लाइट स्विच चेकिंग: वाहनों में ठंडी हवा के प्रवाह के लिए जिम्मेदार वेंट असेम्बली और उसके साथ लगे लाइट स्विच के मेंटेनेंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    इनवर्टर और मोबाइल चार्जर: यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में लगे इनवर्टर और मोबाइल चार्जिंग सिस्टम की वायरिंग को दुरुस्त रखा जाएगा ताकि लोड बढ़ने पर स्पार्किंग न हो।
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    13 कोच फैन का अनिवार्य संचालन: प्रत्येक वातानुकूलित बस में यात्रियों की सुविधा के लिए 13 कोच फैन लगे होते हैं। बस को रूट पर रवाना करने से पहले वर्कशॉप में यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी 13 पंखे पूरी तरह काम कर रहे हों।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    कटी-फटी वायरिंग पर तत्काल रोक: बसों में कहीं भी कटी-फटी या खुली वायरिंग दिखने पर उसे तत्काल बदला या ठीक किया जाएगा।
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  9. \r\n
    फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता: आपातकालीन स्थिति और प्राथमिक उपचार के लिए सभी एसी वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स (First Aid Box) का होना अनिवार्य कर दिया गया है।
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  10. \r\n
  11. \r\n
    एयर लीकेज और विंडो रबर की मरम्मत: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बस के प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) से बाहर की गर्म हवा अंदर न आ रही हो और साइड विंडो के रबर लूज न हों, जिससे एसी की कूलिंग प्रभावित न हो।
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  12. \r\n
  13. \r\n
    सालाना नए पर्दे: बसों के भीतर सीधे धूप को रोकने के लिए प्रत्येक एक वर्ष के अन्तराल पर वातानुकूलित वाहनों में पूरी तरह से नए पर्दे लगाए जाएंगे।
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  14. \r\n
  15. \r\n
    25% अतिरिक्त पर्दों का बैकअप: डिपो फ्लीट के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त खिड़की के पर्दों की व्यवस्था आरक्षित रखी जाएगी, ताकि धुलाई के समय भी कोई बस बिना पर्दे के सड़क पर न चले।
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    प्रतिमाह पर्दों की धुलाई: प्रत्येक एम-20 (M-20) मेंटेनेंस स्तर पर बसों में धुले हुए या बिल्कुल नए पर्दे लगाए जाएंगे। यानी महीने में कम से कम एक बार पर्दों की धुलाई अनिवार्य होगी।
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  18. \r\n
  19. \r\n
    गैलरी मैटिंग का सुधार: यदि वाहन के भीतर यात्री गैलरी की मैटिंग (फर्श की रबर) खराब या उखड़ी हुई है, तो उसे तत्काल बदला जाएगा।
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  20. \r\n
  21. \r\n
    सीट कवर फैब्रिक की सफाई: जिन एसी बसों में सीट कवर फैब्रिक (कपड़े) के लगे हैं, उनकी सघन सफाई प्रत्येक एम-80 (M-80) मेंटेनेंस के दौरान निश्चित रूप से की जाएगी।
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    आर्मरेस्ट और रिक्लाईनिंग सिस्टम रिपेयर: यात्रियों के आराम के लिए सीटों के आर्मरेस्ट और रिक्लाईनिंग (सीट पीछे झुकाने वाला) सिस्टम को प्रत्येक एम-40 (M-40) मेंटेनेंस में रिपेयर कराना अनिवार्य होगा, साथ ही समय-समय पर सीटों की ड्राई क्लीनिंग भी कराई जाएगी।
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  24. \r\n
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अधिकारियों की सख्त चेतावनी: वायरिंग से छेड़छाड़ पर होगी कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) आरबीएल शर्मा ने साफ तौर पर कहा है कि गर्मियों में एसी का लगातार इस्तेमाल होने से मशीनरी पर भारी दबाव पड़ता है। लिहाजा, जरा सी भी चूक बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है।
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उन्होंने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे चालकों और परिचालकों (ड्राइवर-कंडक्टर) की विशेष काउंसलिंग करें और उन्हें समझाएं कि वे अपने निजी उपयोग के लिए बस की मूल वायरिंग से किसी भी कीमत पर छेड़छाड़ न करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले और लापरवाही बरतने वाले स्टाफ व आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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