उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। UP MLC Elections के तहत प्रदेश की 11 सीटों पर शुक्रवार को मतदान होना है। इसे देखते हुए राज्य में 23 और 27 अक्टूबर को शराब की दुकानें पूरी तरह से बंद रखने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, मतदान के दिन यानी 23 अक्टूबर को संबंधित क्षेत्रों में स्कूल और कॉलेज भी बंद रहेंगे।

स्कूल-कॉलेज और शराब बिक्री पर प्रतिबंध लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने के लिए 23 अक्टूबर (मतदान) और 27 अक्टूबर (मतगणना) को ड्राई डे घोषित किया गया है।

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प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, इन दोनों दिन देसी और विदेशी शराब की दुकानों के साथ-साथ बार, मॉडल शॉप और सैन्य कैंटीन में भी शराब की बिक्री पर सख्त पाबंदी लागू रहेगी। मतदान प्रक्रिया शुक्रवार सुबह 8 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी, जबकि मतों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।

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इन जिलों में लागू नहीं होगा नियम चुनाव और पाबंदी के यह नियम कानपुर, कानपुर देहात और उन्नाव में लागू नहीं होंगे। इसका मुख्य कारण यह है कि इन तीनों जिलों में वर्तमान में कोई चुनाव नहीं हो रहा है और न ही यहां आचार संहिता लागू है।

दरअसल, कानपुर खंड में स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव पिछले साल फरवरी 2023 में ही संपन्न हो चुके हैं। उस चुनाव में शिक्षक सीट से राजबहादुर सिंह चंदेल और स्नातक सीट से अरुण पाठक ने जीत दर्ज की थी, जिनका कार्यकाल 2029 तक है। इसलिए यहां के निवासियों के लिए न तो वोटिंग होगी और न ही शराब की दुकानें बंद रहेंगी।

किन 11 सीटों पर है कड़ा मुकाबला? चुनाव आयोग ने विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव की घोषणा की है, उनमें 5 स्नातक खंड की और 6 शिक्षक खंड की सीटें शामिल हैं।

  • स्नातक सीटें (5): इनमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी मंडल की सीटें हैं। वर्तमान राजनीतिक समीकरण के अनुसार, इलाहाबाद-झांसी और वाराणसी सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का कब्जा है, जबकि बाकी 3 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) काबिज है।

  • शिक्षक सीटें (6): इनमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और बरेली-मुरादाबाद खंड (2 सीटें) शामिल हैं। इन 6 सीटों में से 3 पर भाजपा, 1 पर सपा, 1 पर शिक्षक समूह और 1 पर निर्दलीय उम्मीदवार का कब्जा है।

10 लाख वोटर और राजनीतिक समीकरण उत्तर प्रदेश के इस 'मिनी-जनादेश' में 10 लाख से अधिक मतदाता प्रत्याशियों के राजनीतिक भाग्य का फैसला करेंगे। मतदान के नियमों के मुताबिक, स्नातक क्षेत्र का वोटर बनने के लिए डिग्री हासिल किए हुए 3 साल पूरे होना अनिवार्य है। वहीं, शिक्षक क्षेत्र में केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ा रहे सक्रिय शिक्षक ही वोट डाल सकते हैं।

इस चुनाव में 22 से 35 वर्ष के युवा मतदाता सबसे निर्णायक भूमिका में हैं। यही वजह है कि उम्मीदवारों ने युवाओं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, महिलाओं और शिक्षकों का बड़े पैमाने पर वोटर रजिस्ट्रेशन कराया है।

राजनीतिक लड़ाई भी दिलचस्प हो गई है। सपा जहां पुरानी पेंशन योजना (OPS), बेरोजगारी और हालिया पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को उठाकर युवाओं और कर्मचारियों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। वहीं, राज्य की योगी सरकार पारदर्शी भर्तियों और अपने कार्यकाल की उपलब्धियों के दम पर मतदाताओं से समर्थन मांग रही है।

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