उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर राज्य पुलिस बल के लिए तीन बड़ी कल्याणकारी घोषणाएं की हैं। लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाने और उनके दैनिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी का ऐलान किया। UP Police Allowance Hike की इस घोषणा के तहत प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारियों, सब-इंस्पेक्टरों और मैदानी कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून व्यवस्था के सुधार, पुलिस आधुनिकीकरण और कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्योछावर करने वाले 6 पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानित भी किया।

वर्दी, वाहन और मोबाइल भत्ते में भारी बढ़ोतरी मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, अब प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अफसरों को वर्दी भत्ते के रूप में प्रतिवर्ष 6,400 रुपये के स्थान पर 15,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, क्षेत्र में लगातार गश्त करने वाले इंस्पेक्टरों और सब-इंस्पेक्टरों का मासिक मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, पुलिसकर्मियों को आधिकारिक संचार और मोबाइल रिचार्ज के लिए मिलने वाले भत्ते को भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार वर्ष 2017 के बाद से तीसरी बार पुलिस भत्तों में संशोधन कर चुकी है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में सिपाहियों का वार्षिक वर्दी भत्ता 3,000 से बढ़ाकर 6,400 रुपये किया गया था। अक्टूबर 2022 में 200 रुपये के साइकिल भत्ते को खत्म कर 700 रुपये का मासिक मोटरसाइकिल भत्ता शुरू हुआ था, जबकि अक्टूबर 2021 में मोबाइल व सीयूजी भत्ते को बढ़ाकर 2,000 रुपये किया गया था।

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कानून-व्यवस्था और पुलिस सुधारों पर दिया जोर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों के कार्यकाल की तुलना में वर्तमान कानून-व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पुलिस अधिकारी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरते थे क्योंकि सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। उन्होंने दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 815 दंगे हुए थे, जबकि मथुरा के जवाहर बाग कांड में पुलिस को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया गया है, जिससे आज अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई हो रही है और कानून का शासन कायम है। इसके अलावा, राज्य में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता को 6,000 से बढ़ाकर 60,000 से अधिक किया गया है। 7 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है, हर जिले में साइबर थाना और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क गठित की गई है।

कर्तव्य पालन के दौरान शहीद 6 जवानों को श्रद्धांजलि पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 6 पुलिसकर्मियों की शहादत को नमन किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अभियानों के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं और 1,953 जवान घायल हुए हैं। सरकार द्वारा शहीद परिवारों को अब तक 425 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी जा चुकी है।

सम्मानित किए गए 6 जवान दो अलग-अलग घटनाओं में शहीद हुए थे:

  1. ग्रेटर नोएडा अग्निकांड: इकोटेक-3 स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में 4 अगस्त को लगी भीषण आग में 450 कर्मचारियों को बचाते समय दीवार व बीम गिरने से फायरमैन रोहित यादव (32) और ड्राइवर तीर्थपाल सिंह (48) मलबे में दबकर शहीद हो गए।

  2. जालौन व्यापारी अपहरण कांड: अपहृत व्यापारी की तलाश में हरियाणा जा रही पुलिस टीम की स्कॉर्पियो गाड़ी केएमपी एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में सब-इंस्पेक्टर सत्यभान सिंह, मोहित कुमार यादव, कांस्टेबल अशोक कुमार, प्रदीप कुमार और एक नागरिक की मृत्यु हो गई। बाद में पुलिस ने अपहरणकर्ताओं मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार कर जंगल से कंकाल बरामद किया।

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